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भुवी की स्पीड, स्विंग को क्या हुआ! न्यूजीलैंड में क्यों पड़ गए कुंद?

Ind vs NZ T20I Series : 4 साल बाद टीम इंडिया में लौटे Bhuvneshwar Kumar न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में बेअसर दिखे हैं. 3 मैचों में उन्होंने 11.58 की इकॉनमी से 139 रन लुटाए हैं और सिर्फ 1 विकेट लिया है.

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भुवनेश्वर कुमार ने कमबैक पर अब तक 139 रन लुटा दिए. (Courtesy : AFP)

1430 दिन. यानी पूरे 4 साल. इतने लंबे इंतजार के बाद भुवनेश्वर कुमार ने टीम इंडिया में वापसी की. न्यूजीलैंड सीरीज से उनका कमबैक हुआ. फैंस में गजब का उत्साह था. लगा था कि स्विंग का सुल्तान लौटेगा और कीवी बैटर्स को नचाएगा. लेकिन हुआ क्या? तीन मैच बीत गए हैं. और भुवी की बॉलिंग से वो पुरानी धार एकदम गायब है.

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न रफ्तार दिख रही है. न वो जादुई स्विंग. उल्टा उनकी बॉलिंग ने टीम की टेंशन बढ़ा दी है. अब तो ये सवाल भी उठने लगे हैं. क्या भुवी पूरी तरह से फिट भी हैं या नहीं?

ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि इसी साल IPL 2026 में भुवी ने भौकाल काटा था. RCB के लिए खेलते हुए उन्होंने 28 विकेट चटकाए थे. वहां वो 135 से 142 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बॉल डाल रहे थे. गेंद को दोनों तरफ लहरा रहे थे. अंदर भी, और बाहर भी. फिर न्यूजीलैंड पहुंचते ही ये जलवा कहां गायब हो गया? जबकि न्यूजीलैंड की कंडिशंस तो पेस बॉलिंग के लिए भारत से कहीं बेहतर हैं. फिर भुवी अपना रिदम क्यों नहीं पकड़ पा रहे हैं?

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आंकड़े चिंताजनक हैं

सवाल बहुत सारे हैं. लेकिन जवाब किसी के पास नहीं. अभी एक दलील दी जा रही है कि हम तीनों मैच जीत तो गए हैं. सीरीज पर भी कब्जा हो गया है. बाकी बॉलर्स भी तो पिटे हैं. और हमारे बॉलर्स से ज्यादा बुरी हालत तो कीवी बॉलर्स की है.

ये बातें सुनने में अच्छी लगती हैं. लेकिन जरा भुवी के आंकड़ों पर नजर डालिए. इस सीरीज से पहले T20I में भुवी का करियर इकॉनमी रेट महज 6.96 यानी करीब 7 का था. और इस सीरीज में? उन्होंने तीनों मैचों में अपने कोटे के पूरे 12 ओवर्स डाले हैं. कुल 139 रन लुटा दिए हैं. इकॉनमी रेट 11.58 का रहा है. इस एक सीरीज ने उनके पूरे करियर की इकॉनमी को बिगाड़ कर साढ़े सात के करीब पहुंचा दिया है.

पूरी इंडियन बॉलिंग यूनिट में भुवी सबसे महंगे साबित हुए हैं. बाकी सभी भारतीय बॉलर्स की इकॉनमी 10 से नीचे है. यहां तक कि ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी भी स्पीड से लेकर इकॉनमी तक, हर मामले में भुवी से बेहतर दिख रहे हैं.

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विकेट के कॉलम में भी सन्नाटा है. पहले और तीसरे मैच में उनकी झोली खाली रही. दूसरे मैच में डैरिल मिचेल के रूप में बस एक विकेट मिला. वो भी नकलबॉल पर. जबकि उन्हीं कंडिशंस में अर्शदीप सिंह नई बॉल से लगातार शुरुआती ओवर्स में विकेट चटका रहे हैं.

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अश्विन ने क्या बताया?

तो फिर भुवी असरदार क्यों नहीं दिख रहे? इसकी सबसे बड़ी वजह है उनका 'टिप्पा'. यानी उनकी लेंथ. 27 अक्टूबर को वेलिंगटन T20I के दौरान रविचंद्रन अश्विन ने कॉमेंट्री में इसी नब्ज को पकड़ा. अश्विन ने साफ कहा कि पूरे करियर में जो भुवी की आइडियल लेंथ रही है, वो इस सीरीज में अब तक दिखी ही नहीं.

तीसरे टी20 में तो उनकी स्पीड में भारी गिरावट दिखी. वो महज 120 से 126 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर ऑपरेट कर रहे थे. वेलिंगटन में उनकी औसत स्पीड सिर्फ 126.05 Kmph रही. जब रफ्तार इतनी कम हो और टिप्पा आगे हो, तो बैटर्स को क्रीज पर खड़े-खड़े शॉट्स खेलने का पूरा वक्त मिल जाता है. फिन एलन और टिम साइफर्ट ने यही किया. भुवी की स्विंग में वो अनप्रिडिक्टेबिलिटी नहीं रही. बैटर्स उन्हें हाथ से ही रीड कर ले रहे हैं.

भुवी की सबसे बड़ी पहचान उनकी सटीकता यानी एक्यूरेसी रही है. लेकिन इस सीरीज में वो अपनी लाइन और लेंथ ही भटक गए हैं. एक चौंकाने वाला आंकड़ा देखिए. अपने पूरे टी20 इंटरनेशनल करियर में भुवी ने करीब 300 ओवर्स डाले थे. और कभी भी फ्रंट-फुट नो-बॉल नहीं फेंकी थी. लेकिन क्राइस्टचर्च के शुरुआती दो मैचों में ही उन्होंने 3 नो-बॉल फेंक दीं. कई वाइड भी डालीं. ये दिखाता है कि वो अपनी लय पाने के लिए एक्स्ट्रा जोर लगा रहे हैं. इसी चक्कर में क्रीज से बाहर जा रहे हैं.

लंबे ब्रेक ने बिगाड़ा खेल?

इस भटकाव की एक बड़ी वजह लंबा ब्रेक भी है. IPL और यूपी टी20 लीग के बाद से भुवी ने कोई कॉम्पिटिटिव क्रिकेट नहीं खेला था. सिलेक्टर्स ने उन्हें अचानक सीरीज के लिए चुन लिया. खुद भुवी ने वेलिंगटन मैच के बाद माना कि वो कॉल-अप की उम्मीद नहीं कर रहे थे. यानी सिलेक्टर्स ने भी उन्हें चुनने में देरी की और भुवी को मैच-रेडी होने का वक्त नहीं मिल पाया.

लेकिन अब जब मौका मिल ही गया है, तो भुवी को इसे भुनाना होगा. सीरीज में अभी दो मुकाबले बाकी हैं. भारत 3-0 से आगे है. यानी ड्रॉप होने या सीरीज हारने का कोई प्रेशर नहीं है. बॉलिंग कोच मोर्ने मॉर्कल ने भी कहा है कि वो भुवी को सेटल होने के लिए बैक कर रहे हैं.

मगर सच यही है कि टीम इंडिया में इस वक्त गलाकाट कॉम्पिटिशन है. कई युवा पेसर्स दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं. मॉर्कल का ये भरोसा एकाध सीरीज से ज्यादा नहीं चल पाएगा. अगर बचे हुए दो मैचों में भुवी ने अपनी पुरानी रफ्तार और स्विंग नहीं ढूंढी, तो डर है कि ये कमबैक सीरीज कहीं उनकी फेयरवेल सीरीज न बन जाए.

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