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खेती करके खरीदी पिस्टल, अब ओलंपिक में लगाएंगे निशाना, शूटर जयपाल मालवीय ने कमाल कर दिया

जयपाल मालवीय ने ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता. साथ ही 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए निशानेबाजी में भारत का पहला कोटा हासिल किया.

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भारतीय शूटर जयपाल ने देश को पहला ओलंपिक कोटा दिलाया. (Courtsey-NRAI)

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  • जयपाल मालवीय ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर 2028 ओलंपिक के लिए कोटा हासिल किया है।
  • संक्रमण काल में बिना कोच और परिवार की जानकारी के मालवीय ने खेती करके शूटिंग के लिए जरूरी खर्च उठाया और पिस्टल शूटिंग की तरफ रुख किया।
  • मालवीय का प्रदर्शन युवा खिलाड़ियों के बीच दबाव में बेहतर परिणाम लाने का उदाहरण है, और अब वह मुख्य राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन गए हैं।

एक खिलाड़ी, जिसने 26 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की. परिवार को बताए बिना इस खेल को अपना करियर बनाया. खेती करके अपने खेल का खर्च उठाया और अपने दूसरे ही इंटरनेशनल टूर्नामेंट में देश के लिए मेडल जीत लिया. इतना ही नहीं, 2028 ओलंपिक के लिए कोटा भी हासिल किया. यह कहानी है 31 साल के जयपाल मालवीय की. उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में देश के लिए सिल्वर मेडल जीता है.

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कैसे हुई शूटिंग की शुरुआत?

मालवीय मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के चंदन गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने पहली बार NCC प्रोग्राम के दौरान बंदूक उठाई थी. उस समय उनके लिए शूटिंग महज एक हॉबी थी. शुरुआत में मालवीय राइफल से शूटिंग करते थे. राइफल की बैरल थोड़ी लंबी होती है. मालवीय को महसूस हुआ कि वह पिस्टल से शूटिंग करते हुए बेहतर बैलेंस बना पाते हैं. कोरोना के दौरान उन्होंने पिस्टल शूटिंग शुरू कर दी. बिना कोच के ही मालवीय ने पहले स्टेट और फिर नेशनल लेवल के लिए क्वालिफाई किया.

मालवीय को अपनी पहली पिस्टल खरीदनी थी. इसके लिए उन्हें करीब एक लाख रुपये की जरूरत थी. उन्होंने सोयाबीन, मक्का और गेहूं की खेती करके पैसे जुटाए. परिवार वालों से उन्होंने कहा कि उन्हें कोचिंग के लिए पैसे चाहिए. उनकी पहली पिस्टल पुरानी थी और उसमें अक्सर मरम्मत की जरूरत पड़ती थी. मालवीय लंबे समय तक इसी पिस्टल से प्रैक्टिस करते रहे.

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खेती के पैसों से ली पिस्टल

साल 2023 में पिस्टल शूटिंग कोच धर्मेंद्र दूदी की नजर मालवीय पर पड़ी. उस समय धर्मेंद्र भोपाल शूटिंग एकेडमी में कोच थे. उन्होंने मालवीय को शूटिंग के बेसिक टिप्स देने शुरू किए. इसके बाद मालवीय ने दिल्ली की कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में छह हफ्ते का कोर्स किया. फिर उन्होंने नेशनल ट्रायल्स में हिस्सा लिया और बी टीम में जगह बनाई.

धर्मेंद्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 26 साल की उम्र में कुछ नया शुरू करना आसान नहीं होता. इस उम्र में बहुत कम लोग आपका साथ देते हैं. हर किसी को लगता है कि यह शादी करने की उम्र है. एकेडमी में भी कई कोच उनका समर्थन नहीं करते थे. वे मालवीय से कहते थे कि वह दीवार में सिर न पटकें. लेकिन मालवीय ने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया. धीरे-धीरे उन्होंने बी टीम से निकलकर मुख्य टीम में जगह बना ली.

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ट्रायल्स में दिग्गज खिलाड़ियों को दी मात

इस चैंपियनशिप से पहले मालवीय ने पांच नेशनल ट्रायल्स में हिस्सा लिया था. इनमें उन्होंने कई बड़े और अनुभवी निशानेबाजों को पीछे छोड़ा. इनमें पेरिस ओलंपिक के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट सरबजोत सिंह और 2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप के गोल्ड मेडलिस्ट सम्राट राणा भी शामिल थे.

गुरुवार को मालवीय ने अपने कम इंटरनेशनल अनुभव को प्रदर्शन के आड़े नहीं आने दिया. इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में कम अनुभव की वजह से कई युवा भारतीय निशानेबाज दबाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे. लेकिन मालवीय ने ऐसा नहीं होने दिया. उन्होंने मेंस 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में 242.9 का स्कोर किया और सिल्वर मेडल अपने नाम किया. इसके साथ ही उन्होंने 2028 ओलंपिक के लिए कोटा भी हासिल कर लिया.

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