E20 फ्यूल में एथेनॉल की मात्रा 20% तय की गई है. 1 अप्रेल 2026 से E20 फ्यूल पूरे देश में अनिवार्य होने के बाद यही स्टैंडर्ड है. मतलब जो आपने एक लीटर पेट्रोल लिया तो उसमें 20 फीसदी एथेनॉल मिला होगा. लेकिन कर्नाटक से एक खबर आई है. यहां के सात जिलों से इकट्ठा किए गए पेट्रोल के नमूनों पर किए गए लैब टेस्ट में एथेनॉल की मात्रा कथित तौर पर 13.5% से 31.2% के बीच पाई गई है (31% Ethanol in E20 fuel). इसके बाद राज्य सरकार ने तेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई और उपभोक्ताओं के लिए मुआवजे की मांग की है.
E20 पेट्रोल में '31%' एथेनॉल का दावा, कर्नाटक सरकार ने यूजर्स के लिए मुआवजा मांग लिया
कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु, कोलार, चिक्काबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु से नमूने एकत्र किए थे. लैब टेस्ट से इन सैंपल में एथेनॉल की मात्रा तय लिमिट से कम और ज्यादा, दोनों मिली है.

कर्नाटक सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल के कथित ओवर-ब्लेंडिंग पर चिंता व्यक्त की है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने बेंगलुरु, कोलार, चिक्काबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु से नमूने एकत्र किए थे. लैब टेस्ट से इन सैंपल में एथेनॉल की मात्रा तय लिमिट से कम और ज्यादा, दोनों मिली है.
शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले और विधिक माप विज्ञान मंत्री रिजवान अरशद ने कहा,
“लैब में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के एक आउटलेट से एकत्र किए गए सैंपल में एथेनॉल की मात्रा 31.2% तक पाई गई. हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) के एक अन्य नमूने में यह मात्रा 30.5% दर्ज की गई. एचपीसीएल के एक सैंपल में 27%, बीपीसीएल के एक सैंपल में 26.5%, नायरा एनर्जी में 26.1% और शेल के एक सैंपल में 25.5% एथेनॉल मिला. हालांकि शेल के ही एक अन्य सैंपल में एथेनॉल की मात्रा कम होकर 13.5% मिली.”
विभाग के अनुसार, कलेक्ट किए गए केवल दो सैंपल में एथेनॉल की मात्रा 20% से कम दर्ज की गई.
रिजवान अरशद नेबताया कि IOCL, HPCL, BPCL, नायरा एनर्जी, शेल और मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल लिमिटेड (MRPL) के कुल 14 सैंपलों का टेस्ट नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) द्वारा मान्यता प्राप्त और ISO-प्रमाणित लैब में किया गया था. राज्य सरकार ने इसके बाद ग्राहकों के लिए एक मुआवजा फंड और ईंधन के दूसरे ऑप्शन की मांग की है.
देश में चलने वाले ज्यादातर वाहन (कार और बाइक) E20 फ्यूल के हिसाब से नहीं बने हैं. साल 2023 के बाद आने वाले वाहन E20 फ्यूल के हिसाब से ही डिजाइन किए गए हैं. यानी सड़कों पर दौड़ रहे ज्यादातर वाहनों के इंजन सिर्फ 10% ब्लेंडिंग के लिए बने हैं. इसीलिए माना जाता है कि कि 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग से इन गाड़ियों के इंजनों में तकनीकी समस्या आ सकती है. एथेनॉल ब्लेंड फ्यूल के इस्तेमाल पर वाहनों का माइलेज कम होने के बारे में मंत्रालय का कहना है कि रेगुलर पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम है जिससे माइलेज में मामूली कमी आती है.
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सरकार के मुताबिक ये गिरावट 1-2% है. मगर वो स्टैंडर्ड टेस्टिंग में है. गाड़ी जब सड़क पर चलेगी तो ये फर्क 6 फीसदी तक होगा. माने जो गाड़ी अभी 40 का माइलेज देती थी वो गिरकर 37 पहुंच जाएगा. एथेनॉल एक हाइग्रोस्कोपिक नेचर का प्रोडक्ट है. मतलब ये बहुत जल्दी नमी पकड़ता है. इससे इंजन और दूसरे पार्ट्स में जंग का खतरा भी हो सकता है. 20 से 25 हजार किलोमीटर चलाने के बाद गाड़ी का परफ़ोर्मेंस कम होगा.
ऐसे में अगर एथेनॉल की मात्रा तय सीमा से ज्यादा होगी तो गाड़ियों पर असर भी ज्यादा होगा. फिर भले वो 2023 से पहले की हो या बाद की. क्योंकि नई गाड़ियां भी E20 के हिसाब से नहीं हैं.
इस मामले पर आगे जो भी अपडेट होगा, वो हम आपसे साझा करेंगे.
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