दिवाली आते ही हम घर की सफाई में जुट जाते हैं. पुरानी और बेकार चीजों को हटाकर नई शुरुआत की तैयारी करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी अपने निवेश पोर्टफोलियो की सफाई के बारे में सोचा है? अगर अब तक नहीं सोचा है तो कमर कस लीजिए.
दिवाली पर घर के साथ अपने निवेश पोर्टफोलियो की 'सफाई' भी करें, एक्सपर्ट ने तरीका बताया
कई लोग निवेश करके भूल जाते हैं. इसके अलावा कई निवेशक कई म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर देते हैं. जानकारों का कहना है कि कई फंड्स में निवेश संभालना काफी मुश्किल काम है.

जानकारों का कहना है कि वक्त के साथ हमारे पोर्टफोलियो में ऐसे शेयर, म्यूचुअल फंड होते हैं, जिनकी अब शायद जरूरत नहीं रह गई है. कई बार अलग-अलग फंडों में एक ही कंपनियों में पैसा लगा होता है, तो कुछ शेयर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाते. ऐसे में इस दिवाली पर अपने निवेश की समीक्षा करना जरूरी है.
कई फंड्स में निवेश संभालना मुश्किलसेबी रिसर्च एनालिस्ट वीके वेल्थवाइज के रिसर्च एनालिस्ट सीए वत्सल खेमका ने इस बारे में लल्लनटॉप से बातचीत की. उन्होंने कहा कि अक्सर निवेशकों के पास कई म्यूचुअल फंड होते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर का निवेश एक जैसी कंपनियों या सेक्टर्स में होता है. इसी तरह, कई बार पोर्टफोलियो में ऐसे शेयर भी बने रहते हैं जिनके भविष्य को लेकर अब पहले जैसी उम्मीद नहीं होती. केवल निवेशों की संख्या बढ़ाने से पोर्टफोलियो मजबूत नहीं बनता. असली बात यह है कि आपका पैसा कहां लगा है, उसमें कितना जोखिम है और क्या वह आपके वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप है.
वत्सल खेमका का कहना है कि पोर्टफोलियो की समीक्षा करते समय सबसे पहले निवेशों में दोहराव और जरूरत से ज्यादा डायवर्सिफिकेशन पर ध्यान देना चाहिए. बहुत सारे शेयरों और फंड्स को संभालना मुश्किल हो सकता है, जबकि समान निवेशों में पैसा लगाने से जोखिम भी उतना कम नहीं होता जितना दिखाई देता है. इसके साथ ही पुराने निवेशों का मूल्यांकन मौजूदा परिस्थितियों और भविष्य की संभावनाओं के आधार पर करना जरूरी है. किसी शेयर को सिर्फ इसलिए बनाए रखना ठीक नहीं है कि वह कभी ऊंचे भाव पर खरीदा गया था.
खेमका कहते हैं कि अच्छा पोर्टफोलियो वह नहीं जिसमें सबसे ज्यादा निवेश हों, बल्कि वह है जो आपके वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम क्षमता और निवेश की समयावधि के अनुरूप हो. आर्थिक समृद्धि केवल पैसा लगाने से नहीं, बल्कि सही सोच के साथ उसे निवेशित रखने और समय-समय पर उसकी समीक्षा करने से आती है.
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निवेश सलाहकार विनोद रावल ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि निवेश का संबंध आपके जीवन के लक्ष्यों से भी होना चाहिए. बच्चों की शिक्षा, घर खरीदने और रिटायरमेंट जैसे लक्ष्यों के लिए अलग-अलग समयावधि और जोखिम क्षमता की जरूरत होती है. इसलिए निवेशों की समीक्षा करते समय यह देखना चाहिए कि पैसा कब चाहिए और तब तक उसे कितना जोखिम उठाना चाहिए. साथ ही, किसी निवेश को बेचने या बदलने से पहले कैपिटल गेन टैक्स, एग्जिट चार्ज, लॉक-इन पीरियड और दूसरी लागतों को समझना भी जरूरी है. बिना सोचे-समझे निवेश बेच देना उतना ही नुकसानदायक हो सकता है.
इस प्रक्रिया की शुरुआत बहुत आसान है. अपने सभी शेयरों, म्यूचुअल फंड, बीमा पॉलिसियों और अन्य वित्तीय निवेशों की सूची बनाएं. हर निवेश के पीछे का उद्देश्य समझें, उसके प्रदर्शन और लागत की समीक्षा करें और देखें कि वह आपकी मौजूदा जरूरतों के लिए कितने काम का है. समय-समय पर ऐसा करने से पोर्टफोलियो को व्यवस्थित रखने और भावनाओं के बजाय तथ्यों के आधार पर फैसला लेने में मदद मिल सकती है.
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लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतरहिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजीत सिंह ने लल्लनटॉप से कहा कि हर फंड के प्रदर्शन की तुलना उसके बेंचमार्क और कैटेगरी के एवरेज से तीन से पांच साल में करें न कि एक साल के रिटर्न के हिसाब से. जो फंड लगातार तीन साल तक अपने बेंचमार्क से कम परफॉर्म करता है उसकी समीक्षा की जरूरत है. उन्होंने कहा कि तीन साल के भीतर निवेश के लिहाज से डेट या हाइब्रिड फंड बेहतर हो सकते हैं, जबकि लंबे समय के लक्ष्यों के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया जा सकता है.
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य वित्तीय जागरूकता के उद्देश्य से है. इसमें दिए गए विचार एक्सपर्ट के निजी विचार हैं. निवेशकों को सलाह दी जाती है कि निवेश संबंधी फैसले अपनी वित्तीय स्थिति, जोखिम क्षमता और लक्ष्यों के अनुरूप लें. साथ ही निवेश करने से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें.)
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