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कौन हैं विंबलडन की नई चैंपियन लिंडा नोस्कोवा? 21 की उम्र में रचा इतिहास, जानें उनका पूरा सफर

लिंडा ने अपना पहला ग्रैंडस्लैम जीतने के लिए अपने ही देश की कैरिलिना मुकोवा को हराया. मुकोवा पेरिस ओलंपिक्स में लिंडा की डबल्स पार्टनस थीं. लिंडा ने यह मुकाबला 6-2, 5-7, 6-3 से अपने नाम किया.

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लिंडा अपनी मां के बेहद करीब थीं. (Photo-PTI)

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  • लिंडा नोसकोवा ने 2024 में अपने ही देश की कैरोलिना मुचोवा को हराकर विंबलडन महिला सिंगल्स का खिताब 6-2, 5-7, 6-3 से जीता, यह चेक खिलाड़ियों के बीच पहला विंबलडन फाइनल था।
  • लिंडा ने टेनिस खेलना सात साल की उम्र में शुरू किया था, और पेत्रा को विंबलडन फाइनल में खेलते देख उन्होंने इस खेल में करियर बनाने का फैसला किया था।
  • लिंडा की इस जीत के बाद उन्हें लगभग 38.5 करोड़ रुपए की इनामी राशि मिली, और वह 7वीं रैंकिंग पर पहुंच गईं, जिससे उनके कैरियर को बढ़ावा मिला।

साल 2011. विंबलडन का महिला सिंगल्स फाइनल. एक तरफ थीं स्टाइलिश, ग्लैमरस और चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन मारिया शारापोवा. वहीं दूसरी तरफ थीं चेक रिप्बलिक की 21 साल की पेत्रा. इस फाइनल मुकाबले में पेत्रा ने 6-3, 6-4 से शोरापोवा को हराया और अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता. पेत्रा के इस मुकाबले को चेक रिपब्लिक के हजारों लोगों ने देखा. इन्ही में शामिल थीं 6 साल की लिंडा नोसकोवा. इस मैच ने उनके दिल में टेनिस के लिए प्यारा जगाया. साल 2014 में जब पेत्रा एक बार फिर विंबलडन चैंपियन बनीं तो लिंडा ने तय कर लिया कि वह एक दिन ऐसा ही कुछ करेंगी. 12 साल बाद लिंडा ने पेत्रा की मौजूदगी में ही यह कारनामा कर दिखाया. उन्होंने 21 साल की उम्र में विंबलडन का खिताब अपने नाम किया.

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खास था फाइनल मुकाबला

लिंडा ने अपना पहला ग्रैंडस्लैम जीतने के लिए अपने ही देश की कैरोलिना मुचोवा को हराया. मुचोवा पेरिस ओलंपिक्स में लिंडा की डबल्स पार्टनर थीं. विंबलडन के इतिहास में यह पहली बार था, जब दो चेक खिलाड़ियों के बीच फाइनल मैच खेला गया. लिंडा ने यह मुकाबला 6-2, 5-7, 6-3 से अपने नाम किया. इस जीत के साथ ही नोस्कोवा को करीब 38.5 करोड़ रुपए (£3.6 मिलियन) की इनामी राशि मिली. इस जीत से उन्हें रैंकिंग में भी मदद मिलेगी. वह अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 7वीं रैंकिंग पर पहुंच जाएंगी.

बीते चार सालों में वह विंबलडन जीतने वाली चेक रिपब्लिक की तीसरी महिला खिलाड़ी हैं. इससे पहले, मार्केटा वोंद्रोसोवा ने 2023 और बारबोरा क्रेजिकोवा ने 2024 में यह खिताब जीता था. मैच के बाद जब प्रिंसेस ऑफ वेल्स केट मिडलटन ने उन्हें ट्रॉफी दी, तो वह बहुत भावुक नजर आईं. उन्होंने चैंपियन बनने के बाद अपनी मां को याद  किया, जिन्हें वह दो साल पहले खो चुकी हैं.

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सात साल की उम्र में खेलना शुरू किया टेनिस

चेक रिपब्लिक के वसेटिन में पैदा हुईं लिंडा नोसकोवा अपनी मां के काफी करीब थीं. पेत्रा को टेनिस खेलते देख लिंडा ने भी टेनिस खेलने का मन बना लिया. मां ने उन्हें अकेडमी में डालने का फैसला किया. उस समय लिंडा केवल सात साल की थीं. जुलाई 2019 में उन्होंने ITF (इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन) डेब्यू किया. तीन साल बाद उन्होंने फ्रेंच ओपन गर्ल्स सिंगल्स टाइटल जीता और पहली बार चर्चा में आईं. अगले साल उन्होंने फ्रेंच ओपन के मेन ड्रॉ में डेब्यू किया. तब वह केवल 17 साल की थीं. वह साल 2009 के बाद ग्रैंड स्लैम में खेलने वाली अपनी देश की सबसे युवा खिलाड़ी बन गई थीं. हालांकि, उनकी यह शुरुआत अच्छी नहीं रही और पहले ही राउंड में उन्हें एम्मा राडुकानू के खिलाफ हार मिली.

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मां को खोने के बाद भी कोर्ट पर लौटीं

धीरे-धीरे उन्होंने चारों मेजर स्लैम में डेब्यू कर लिया. फिर आया साल 2024. लिंडा ऑस्ट्रेलियन ओपन खेल रही थीं.  इसी टूर्नामेंट में उन्होंने एक बड़ा उलटफेर भी किया. उन्होंने दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी इगा स्वांतेक को हराया और रातों-रात सनसनी मचा दी. इसके बाद विंबलडन शुरू होने से ठीक पहले उन्हें अपनी जिंदगी की सबसे बुरी खबर मिली. उन्हें पता चला कि उनकी मां अब नहीं रहीं. वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं. ऐसी स्थिति कई खिलाड़ी,  परिवार के पास लौट जाते हैं. लेकिन ने तय किया कि वह अपनी मां के सपने को जिंदा रखेंगी और खेलेंगी. वह अगले दिन कोर्ट पर उतरीं. मैच के बाद उन्होंने बताया कि मां के आखिरी शब्द यही थे कि कुछ भी हो जाए टेनिस खेलना मत छोड़ना. इसके बाद से वह हर मैच में अपनी मां को ही याद करती हैं.

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