भारतीय टीम को इंग्लैंड के खिलाफ जीत का अब भी इंतजार है. लेकिन, कम से कम उनके कप्तान साहब फॉर्म में आ गए हैं. आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे अय्यर आखिरकार फॉर्म में आ गए. उन्होंने चौथे टी20 में अर्धशतकीय पारी खेली और अपनी टीम की लाज बचा ली. लेकिन, यह टीम को जीत दिलाने के लिए काफी नहीं रही.
श्रेयस अय्यर की हाफ सेंचुरी भी नहीं बचा पाई टीम इंडिया की लाज!
इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच में अय्यर का बल्ला चला और उन्होंने 68 रन की पारी खेली. लेकिन यह पारी टीम की जीत के लिए काफी नहीं थी क्योंकि मैच बारिश में धुल गया. इसके बाद दूसरे मुकाबले में अय्यर ने 37 और तीसरे मैच में 5 रन बनाए और भारत यह दोनों ही मैच हार गया.


श्रेयस अय्यर को पहली बार कप्तानी करने का मौका मिला. आयरलैंड के दौरे पर टीम को क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा. अय्यर को काफी आलोचना झेलनी पड़ी. उनके लिए मुश्किल की बात यह थी कि वह दोनों ही मैचों में फ्लॉप रहे. उन्हें पहले मैच में तीन और दूसरे मैच में 10 ही रन बनाए.
इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच में अय्यर का बल्ला चला और उन्होंने 68 रन की पारी खेली. लेकिन, यह पारी टीम की जीत के लिए काफी नहीं थी क्योंकि मैच बारिश में धुल गया. इसके बाद, दूसरे मुकाबले में अय्यर ने 37 और तीसरे मैच में 5 रन बनाए और भारत यह दोनों ही मैच हार गया.
चौथे टी20 में फैंस को उम्मीद थी कि टीम इंडिया कुछ खास करेगी. लेकिन टीम की बल्लेबाजी फिर बिखर गई. वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, तिलक वर्मा और वॉशिंगटन सुंदर कुछ खास नहीं कर पाए. लेकिन कप्तान श्रेयस अय्यर एक छोर पर टिक गए. उन्होंने अकेले अपने कंधे पर टीम की जिम्मेदारी उठाई. उन्होंने 49 गेंदों में 80 रन बनाए. इस पारी में चार चौके और पांच छक्के लगाए. इसी कारण उनकी टीम 158 के स्कोर तक पहुंची. लेकिन यह स्कोर टीम की जीत के लिए काफी साबित नहीं हुआ.
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इंग्लैंड ने ये मुकाबला 13.5 ओवर में ही एक विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया. इंग्लैंड की तरफ से कप्तान हैरी ब्रूक और ओपनर फिल सॉल्ट दोनों ने हाफ सेंचुरी लगाई. अय्यर को बतौर कप्तान अब तक जीत तो नहीं मिली है, लेकिन वह इस बात से खुश हो सकते हैं कि उनकी बल्ले से एक दमदार पारी निकली. क्योंकि अय्यर की कप्तानी उनकी बल्लेबाजी पर भी निर्भर करती है. बोर्ड ने हाल ही में जो फैसले लिए हैं, वह यह बताने के लिए काफी हैं कि टीम किसी खिलाड़ी को सिर्फ इसलिए नहीं ढोएगी क्योंकि वह कप्तान हैं. उन्हें बल्ले से भी प्रदर्शन करना होगा.
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