हालांकि गेंदबाजों का प्रदर्शन बहुत उम्दा था. टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज टीम के पैर उन्होंने कभी जमने ही नहीं दिए. पहले और तीसरे विकेट की पार्टनरशिप को छोड़ दिया जाए, तो भारतीय गेंदबाज़ रेगुलर अंतराल पर विकेट निकालते रहे. ख़ास तौर से उमेश यादव, हार्दिक पंड्या और कुलदीप यादव की परफॉरमेंस शानदार रही. तीनों ने मिलके 30 ओवर्स में सिर्फ 107 रन देकर 8 विकेट झटक लिए. 1 रन आउट हुआ. वेस्टइंडीज की टीम 50 ओवर में सिर्फ 189 रन बना सकी. भारत की मज़बूत बल्लेबाजी और रीसेंट फॉर्म देखते हुए ये तय सा लग रहा था कि मैच झोली में है. लेकिन....लेकिन, पाकिस्तान के बाद अगर किसी टीम का फुल भरोसा नहीं किया जा सकता तो वो इंडिया ही है. एक सिंपल से लग रहे चेज को इतना कॉम्प्लिकेटेड कर दिया कि हार के ही माने. सबसे ज़्यादा निराश तो धोनी ने किया. इससे ज़्यादा सुस्त पारी धोनी ने कभी नहीं खेली होगी. 114 गेंदें खेल के 54 रन बनाए. एक, सिर्फ एक चौका लगाया. इतना सुस्त अर्धशतक धोनी से पहले सिर्फ एक ही खिलाड़ी ने लगाया है. एस रमेश ने. उन्होंने 50 रन बनाने के लिए 108 गेंदे खेली थीं. धोनी ने 107 खेली.
बहरहाल धोनी की स्लो इनिंग्स के बावजूद मैच इंडिया के काबू में था. शुरुआती ब्लंडर को बाद में संभाल लिया गया था. एक वक़्त तो ऐसा आया, जब 16 गेंदों में 17 रन चाहिए थे और 4 विकेट हाथ में थे. दुनिया के सबसे शानदार फिनिशर महेंद्र सिंह धोनी क्रीज़ पर थे. मैच इंडिया का था. लेकिन धोनी दर्जनों बार किया हुआ अपना करिश्मा फिर से नहीं दिखा सके. 48 वें ओवर में धोनी ने 3 गेंदें खेलीं. सिर्फ 1 रन बना पाए. जब ओवर की आख़िरी गेंद पर वो आउट हुए, मैच इंडिया के हाथ से फिसल गया.टीम को आख़िरी ओवर में 14 रन चाहिए थे. 2 ही बने. वेस्ट इंडीज ने मैच 11 रनों से जीता. कैप्टन जेसन होल्डर ने 5 विकेट झटके. वो 'प्लेयर ऑफ़ दी मैच' रहे.

कप्तान जेसन होल्डर.
धोनी पिछले कुछ समय से अपनी ‘बेस्ट फिनिशर’ की छवि से न्याय नहीं कर पा रहे हैं. साउथ अफ्रीका, वेस्ट इंडीज, ज़िम्बाब्वे. सब जगह वो फेल रहे. यहां तक कि आईपीएल के कई मैचों में वो अपनी टीम को जीत दिलाने में नाकाम रहे. ये मैच भी इसी नाकामयाबी की सीरीज की एक कड़ी था.
एक दिलचस्प बात ये है कि भारत की पिछली तीन हार उन टीमों के खिलाफ़ आई है, जो आईसीसी रैंकिंग में 6, 7 और 8 नंबर पर हैं. अब स्थिति ये हो गई है कि सीरीज जीतने के लिए भारत को आख़िरी वन डे जीतना ही होगा. वरना सीरीज ड्रॉ हो जाएगी.
धोनी की एक बेहद सुस्त पारी और बाकी बल्लेबाज़ों की बेकार बैटिंग की वजह से टीम इंडिया को एक और सीरीज विन से वंचित भी रहना पड़ सकता है.
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