संजू सैमसन. भारतीय क्रिकेट का वो नाम जिसे लेकर सोशल मीडिया पर हमेशा एक अलग तरह का भौकाल टाइट रहता है. टैलेंट की बात करें तो दुनिया भर के दिग्गज इनके लिए कसीदे पढ़ते नहीं थकते. लेकिन जब उस टैलेंट को मैदान पर कंसिस्टेंसी की बात आती है, तो मामला एकदम फुस्स हो जाता है. 14 अक्टूबर को हैदराबाद के उप्पल स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज (IndvsWI 4th T20I) के बीच सीरीज का चौथा टी20 मुकाबला खेला जाना है.
13 पारियों में 7 बार फेल हुए संजू! अब वैभव के लिए टीम इंडिया के दरवाजे खोलेंगे गंभीर?
Ind vs WI 4th T20I : T20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद से Sanju Samson बेहद खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं. पिछली 13 पारियों में 7 बार वो सिंगल डिजिट पर आउट हुए हैं. दूसरी तरफ, जिम्बाब्वे में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे Vaibhav Sooryavanshi उनके लिए बड़ा खतरा बन गए हैं.

सच कहें तो इस मैच में संजू सैमसन (Sanju Samson) पर इतना भारी दबाव होगा, जितना शायद किसी नए नवेले डेब्यूटेंट पर भी नहीं होता. वजह साफ है. उनकी अपनी खराब फॉर्म और प्लेइंग XI में दस्तक देते वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) का खौफ.
संजू लगातार हो रहे हैं फ्लॉपT20 वर्ल्ड कप के बाद से अगर आप संजू का रिपोर्ट कार्ड देखेंगे, तो बतौर फैन आपको भी भारी निराशा ही हाथ लगेगी. ऐसा लगता है जैसे उनका बल्ला रूठ कर बैठ गया है. आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते. वर्ल्ड कप के बाद खेली गई पिछली 13 T20 पारियों का हिसाब-किताब उठाकर देख लीजिए. संजू के स्कोर कुछ इस तरह रहे हैं- 5, 0, 1, 27, 10, 57, 50, 9, 7, 2, 11, 82 और 3.
इन 13 पारियों को ध्यान से देखिए. इनमें से 7 बार संजू सिंगल डिजिट पर पवेलियन का रास्ता नाप चुके हैं. मतलब दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं हुआ. इंटरनेशनल क्रिकेट में, खासकर T20 फॉर्मेट में जहां हर गेंद पर इंटेंट दिखाना होता है. वहां ऐसी इनकंसिस्टेंसी किसी भी टीम मैनेजमेंट के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकती है.
रांची में भी मिले दो जीवनदानअब आप कहेंगे कि रांची वाले मैच में तो उन्होंने रन बनाए थे. बिल्कुल बनाए थे. लेकिन उस 82 रन की पारी का एक्स-रे करना भी बहुत जरूरी है. रांची में बल्ले से रन जरूर निकले, लेकिन उस दिन किस्मत ने भी उन पर खूब मेहरबानी की थी. उस पारी के दौरान उन्हें एक नहीं, बल्कि दो-दो बार जीवनदान मिले थे. कैच छूटे, तब जाकर वो एक बड़ा स्कोर खड़ा कर पाए. अगर वो कैच समय पर पकड़े जाते, तो शायद वहां भी कहानी कुछ और ही होती. इंटरनेशनल लेवल पर आप हर दिन किस्मत के भरोसे नहीं बैठ सकते. अगर ऐसा ही चलता रहा, तो टीम मैनेजमेंट के सब्र का बांध किसी भी दिन टूट सकता है.
इसी सब्र के टूटने का इंतजार बाउंड्री लाइन के बाहर बैठा एक यंग्सटर कर रहा है. नाम तो आप समझ ही गए होंगे वैभव सूर्यवंशी. वैभव के लिए ये साल बहुत जबरदस्त रहा है. वो एक अलग ही जोन में बैटिंग कर रहे हैं. जिम्बाब्वे दौरे पर जब वैभव को टीम इंडिया की तरफ से मौका मिला, तो उन्होंने अपना इंटेंट साफ कर दिया था. तब वो 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' भी रहे थे. वो सीरीज वैभव के लिए लॉन्चपैड साबित हुई थी. लेकिन, इसके बाद से उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले हैं.
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वैभव मजबूत दावेदारवैभव ने अब तक छोटे से करियर में कुल 8 मैच खेले हैं. इनमें उन्होंने 14, 13, 15, 50, 20, 81, 38 और 15 रन स्कोर किए हैं. इन आंकड़ों में एक बात बहुत खास है. वो ये कि अब तक अपने करियर में वैभव एक बार भी सिंगल डिजिट में आउट नहीं हुए हैं. कंसिस्टेंसी की कमी यहां भी नज़र आती है. लेकिन, ये भी साफ है कि इसमें उनकी इम्मैच्योरिटी भी झलकती है.
हालांकि, वैभव को लेकर टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम और कोचिंग स्टाफ का एंगल भी बड़ा दिलचस्प है. वीवीएस लक्ष्मण जब बतौर कोच जिम्बाब्वे दौरे और एशियन गेम्स में साथ गए, तो उन्होंने वैभव पर खूब भरोसा जताया. लक्ष्मण ने उन्हें हर मैच में मौके दिए. नतीजा सबके सामने है. लेकिन हेड कोच गौतम गंभीर उन पर अब तक बहुत भरोसा नहीं जता पाए हैं. गंभीर की कोचिंग में वैभव को सिर्फ 3 मैचों में ही आजमाया गया है. शायद गंभीर अपने कोर ग्रुप को ज्यादा तवज्जो दे रहे थे. या टीम कॉम्बिनेशन कुछ ऐसा था कि वैभव को चांस नहीं मिल पाया.
लेकिन इन सब के बावजूद वैभव जब भी मैदान पर कदम रखते हैं. अपनी अलग छाप छोड़ जाते हैं. उनका बल्ला उनके लिए वकालत कर रहा है. कम मौके मिलने के बावजूद वो लगातार टीम के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं. इसी कारण ये सवाल उठ रहा है कि इसे कब तक अनसुना किया जा सकता है?
फैंस का भी दबाव नहीं आएगा कामसंजू के साथ एक और दिक्कत है. उनकी फैन फॉलोइंग जितनी बड़ी है, उतनी ही उनसे उम्मीदें भी हैं. हर बार जब वो ड्रॉप होते हैं इंटरनेट पर कैंपेन चल पड़ते हैं. लेकिन फैंस की भावनाएं अपनी जगह हैं और मैदान पर डिलीवर करना अपनी जगह.
भारतीय टीम का मौजूदा सेटअप ऐसा है, जहां हर पोजीशन के लिए तीन-तीन तगड़े दावेदार लाइन में लगे हैं. ऐसे में अगर आप 13 पारियों में 7 बार 10 रन भी नहीं बना पा रहे हैं तो सवाल उठना लाजमी है. वेस्टइंडीज के गेंदबाजों के पास वो रफ्तार और उछाल है, जो संजू को अक्सर परेशान करती है.
हैदराबाद में दबाव में होंगे संजूवैैैसे हैदराबाद की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों को रास आती है. गेंद अच्छी तरह से बैट पर आती है. अगर यहां भी संजू कोई बड़ा स्कोर खड़ा करने में नाकाम रहते हैं, तो फिर बचाव का कोई रास्ता नहीं बचेगा.
कहानी एकदम शीशे की तरह साफ है. संजू सैमसन के लिए हैदराबाद और इसके बाद बेंगलुरु में होने वाले मैच एक तरह से 'करो या मरो' वाले होने वाले हैं. उन्हें अगर टीम इंडिया की प्लेइंग XI में अपनी जगह बचानी है तो जबरदस्त बैटिंग करनी होगी. सिर्फ 20-30 रन बनाकर काम नहीं चलेगा.
एक ऐसी मैच-विनिंग पारी खेलनी होगी, जो सिलेक्टर्स का भरोसा जीत सके. वरना वैभव सूर्यवंशी उनकी जगह लेने के लिए किटबैग टांगे खड़े हैं. अगर हैदराबाद और बेंगलुरु में संजू का बल्ला खामोश रहा, तो अगली सीरीज में हमें विकेट के पीछे ईशान और ओपनिंग में वैभव नज़र आ सकते हैं.
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