कहते हैं कि अगर क्रिकेट में सबसे ज़्यादा इज्ज़त सचिन तेंदुलकर को मिली है तो वीरेंद्र सहवाग को सबसे ज़्यादा प्यार मिला है. वीरेंद्र सहवाग ने एक दफ़े प्रेस कांफ्रेंस में बोला था कि वो वन डे मैचों में डबल सेंचुरी मार सकते हैं. वन डे मैचों में ये काम सहवाग से पहले ही सचिन ने कर दिया. खैर, सचिन भी सचिन थे. सहवाग उन्हें ही देख के बल्ला पकड़े थे. लिहाज़ा सचिन का हक़ भी था. सचिन की डबल सेंचुरी पर सहवाग ने सबसे ज़्यादा तालियां पीटी थीं. 8 दिसंबर. इंदौर. ग्वालियर से कुछ दूर. ग्वालियर, वो जगह जहां सचिन ने डबल सेंचुरी मारी थी. और बगल में ही ग्वालियर, जिसमें सहवाग डबल सेंचुरी मारने वाले थे. सीरीज़ का चौथा मैच.
बॉलर्स की पहली गेंद से दुश्मनी
रवि रामपॉल. पहली बॉल. सहवाग के पैरों पर. मिडविकेट के ऊपर से गेंद बाउंड्री की ओर. फ़ास्ट आउटफ़ील्ड. बाउंड्री पर डेन्जा हयात की एक डाइव. मगर असफ़ल.
सुनील नारायण की पहली गेंद. लॉन्ग ऑन बाउंड्री के ऊपर. चार रन.
डैरेन सामी की पहली गेंद. एक्स्ट्रा कवर के ऊपर.
मार्लोन सेमुएल्स. पहली गेंद. शार्ट थर्ड मैन पर बाउंड्री से मिली जाकर.
पहला छक्का - बांध खुलने का इशारा
तीसरा ओवर. कीमार रोच की गेंद. ऑफ स्टम्प के बाहर, पटकी हुई. सहवाग ने इंतज़ार किया और बल्ले का फ़ेस खोल दिया. बॉल एक तरह से बल्ले पर आई और वहां से बाउंस हुई. स्लिप के ऊपर से 6 रन. जानबूझकर थर्ड मैन के ऊपर से खेला गया शॉट. थर्ड मैन पर खड़ा फील्डर कुछ स्क्वायर था. सिर्फ गेंद देख पाया.
किस्मत के धनी
सहवाग अपनी ही धुन में खेल रहे थे. अपनी ही स्टाइल में. 20 रन पर थे. नॉन स्ट्राइकिंग एंड पर. गंभीर ने बॉल को बस हल्का सा डैब किया. पॉइंट की ओर. कुछ कदम आगे बढ़ाये. सहवाग को लगा कि उन्हें दौड़ना है, मगर गंभीर रुक गए. सहवाग पिच पर बहुत आगे आ गए थे. पोलार्ड ने पॉइंट पर गेंद कलेक्ट की. सहवाग वापस लौटने को हुए लेकिन बीच में ही छोड़ दिया. अब वो भगवान भरोसे थे. बल्कि पोलार्ड भरोसे. और पोलार्ड का थ्रो सही जगह पर नहीं लगा. सहवाग बच गए.
सहवाग की डेस्पेरेशन
किसी भी बैट्समैन का खुद को रन आउट होने से बचाने के लिए डाइव मारना कोई बड़ी बात नहीं है. मगर ये काम अगर सहवाग करते हैं तो वो बड़ी बात हो जाती है. सहवाग बैटिंग बचाने के लिए डाइव नहीं मारते थे. मगर उस दिन ऐसा नहीं हुआ. 20वां ओवर. डीप स्क्वायर लेग पर सहवाग ने बॉल टपाई. एक रन तो हो गया मगर दूसरा चाहते थे. गंभीर ने मना कर दिया. सहवाग वापस दौड़े और डाइव मारकर खुद को बचाया. मैच का फ़लसफ़ा - 149 गेंद में 219 रन. 146.97 रन. 25 चौके और 7 छक्के. यानी 142 रन बाउंड्री में. सहवाग ने हर बॉलर को 100 से ज़्यादा स्ट्राइक रेट से मारा. पोलार्ड को 19 गेंद में 33 रन, आंद्रे रसेल को 22 गेंद में 37 रन, सैमुएल्स को 29 में 42, सैमी को 9 में 13, सुनील नारायण को 23 में 33, कीमार रोच को 22 में 31 और रवि रामपॉल को 25 में 30 रन मारे.
200 पर मिला फूलों का गुलदस्ता
सहवाग के 200 रन मारते ही मैदान में एक दर्शक घुस आया. उसके हाथ में फूलों से भरा गुलदस्ता था. मैदान के बीच में बैटिंग करते टाइम सहवाग गुलदस्ते का क्या करते, ये नहीं मालूम लेकिन सहवाग ने उसे वहां से भगा दिया. शायद ये कहते हुए कि इससे पहले उसे पुलिस वाले पकड़ें, वो भाग जाए.