रांची में टीम इंडिया 249 रन बनाकर भी हार गई. T20I में वेस्टइंडीज ने सबसे बड़ा टारगेट अचीव कर लिया. लेकिन, क्या इसके लिए सिर्फ बॉलर्स जिम्मेदार हैं? जवाब है बिलकुल नहीं. टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर बैटर दिनेश कार्तिक ने असली प्रॉब्लम बता दी है. साथ ही उन्होंने भारतीय टीम को एक तगड़ी वॉर्निंग भी दी है.
टीम इंडिया की बॉलिंग सबसे बड़ी कमजोरी नहीं! कार्तिक ने असली प्रॉब्लम बता दी
Ind vs WI : टीम इंडिया के खिलाफ रांची में खेले गए दूसरे T20I मुकाबले में वेस्टइंडीज ने 250 रनों का टारगेट हासिल कर लिया. इस दौरान Shai Hope ने नाबाद 102 रन बनाए. वहीं, Sherfane Rutherford ने 84 रनों की तेजतर्रार पारी खेल दी.

उनका साफ कहना है कि अगर भारत को बड़े टूर्नामेंट जीतने हैं, तो अपनी फील्डिंग का रायता समेटना होगा. टीम मैच तो जीत रही है, लेकिन फील्डिंग का स्तर काफी नीचे गिर गया है. 2027 का ODI वर्ल्ड कप अब ज्यादा दूर नहीं है. ऐसे में इस बीमारी का इलाज करने के लिए वक्त कम है. अगर अभी नहीं सुधरे, तो बड़े मुकाबलों में ये टीम इंडिया को भारी पड़ सकता है.
अब आते हैं रांची वाले मैच पर. वेस्टइंडीज के खिलाफ ये दूसरा T20I मैच था. टीम इंडिया ने पहले बैटिंग करते हुए बोर्ड पर 249 का पहाड़ सा स्कोर टांग दिया. संजू सैमसन ने 41 गेंदों में 82 रन कूट डाले. लगा कि मैच मुट्ठी में है. लेकिन हुआ इसके ठीक उलट.
वेस्टइंडीज ने 9 गेंदें बाकी रहते ही ये टारगेट हासिल कर लिया. भारत 6 विकेट से मुकाबला हार गया. शे होप ने 45 गेंदों पर नाबाद 102 रन ठोके. वहीं, शेरफेन रदरफोर्ड ने 37 गेंदों पर 84 रनों की तूफानी पारी खेल दी. दोनों ने ऐसी कुटाई की कि पांच मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर हो गई.
कार्तिक ने लगाई क्लासइसी हार के बाद क्रिकबज पर बात करते हुए कार्तिक ने टीम की फील्डिंग की बखिया उधेड़ दी. उन्होंने कहा,
249 रन का स्कोर हर हाल में बढ़िया था. अगर आप इतने रन बनाकर भी सोच रहे हैं कि मैच मुश्किल होने वाला है, तो आपको सच में खुद के गिरेबान में झांकने की जरूरत है. असल दिक्कत फील्डिंग की है, जो कुछ समय से एक बड़ी प्रॉब्लम बनी हुई है. हम ODI सीरीज और एशियन गेम्स जीत गए. इसलिए किसी ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. लेकिन सच ये है कि एशियन गेम्स के फाइनल में भी लड़कों ने अच्छी फील्डिंग नहीं की थी. इंग्लैंड और आयरलैंड में भी फील्डिंग का यही हाल था. मतलब, ये एक पक्की बीमारी बन चुकी है.
BCCI ने पिछले फील्डिंग कोच टी दिलीप का कॉन्ट्रैक्ट आगे नहीं बढ़ाया. उनकी जगह अगस्त 2026 में शुभादीप घोष को टीम इंडिया का नया फील्डिंग कोच बना दिया गया है. दिनेश कार्तिक ने इस पर कहा,
उन्होंने पिछले फील्डिंग कोच को हटा दिया. मुझे यकीन है कि ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि मैनेजमेंट को लगा कि वो टीम को अगले लेवल पर नहीं ले जा पा रहे हैं. अब नए कोच शुभदीप घोष हैं. मुझे लगता है कि सबकी नज़रें उन पर गड़ी रहेंगी. आपका काम ये पक्का करना है कि टीम इंडिया पहले से तगड़ी फील्डिंग करे. अगर आप ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.
शुभदीप घोष के लिए ये रास्ता आसान नहीं है. वो इंडिया A और आंध्र प्रदेश की टीम के साथ काम कर चुके हैं. कार्तिक ने घोष के टैलेंट और एक्सपीरियंस की तारीफ तो की. लेकिन, ये याद भी दिला दिया कि इस पद का प्रेशर अलग ही होता है. वो बोले,
कप्तान गिल भी मान चुके हैं प्रॉब्लमटीम इंडिया का हिस्सा बनना हमेशा एक बड़ा चैलेंज होता है. वो एक टैलेंटेड फील्डिंग कोच हैं. काफी समय से इस लाइन में हैं. लेकिन यहां चुनौती बड़ी है.
डीके ने एक और जरूरी मुद्दे पर जोर दिया. वो है पेसर्स की फील्डिंग पोजिशन और उनके कैच पकड़ने की क्षमता. उन्होंने कहा,
मुझे लगता है कि फील्डिंग कोच को पेसर्स को सही जगह खड़ा करने का तरीका ढूंढना होगा. ये पक्का करना होगा कि जब कैच आए, तो वो उसे लपक लें.
रांची वाली हार में भी ठीक यही हुआ था. पेसर मयंक यादव ने शरफेन रदरफोर्ड का कैच तब टपका दिया था, जब वो महज 38 रन पर खेल रहे थे. इस एक जीवनदान ने पूरे मैच का रुख पलट दिया. नतीजा? रदरफोर्ड ने शे होप के साथ चौथे विकेट के लिए 120 रनों की पार्टनरशिप कर दी.
सिर्फ कार्तिक ही नहीं, कप्तान शुभमन गिल भी इस बात को मान चुके हैं. मुल्लांपुर में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे ODI के बाद गिल ने कबूला था कि कैच टपकाने और फील्डिंग में सुस्ती दिखाने की वजह से टीम को सीरीज में नुकसान झेलना पड़ा.
भारत ने वो ODI सीरीज 2-1 से जीती. लेकिन, आखिरी मैच में वेस्टइंडीज ने भारत के 351 के स्कोर को चेज कर लिया था. शे होप ने तब नाबाद 162 रन बनाकर टीम को पांच विकेट से जीत दिला दी थी.
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कहां हो सकता है सुधार?टीम इंडिया के पास सुधार के मौके कहां हैं? सबसे पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ T20I सीरीज के बचे हुए 3 मैचों में. उसके बाद अक्टूबर-नवंबर में न्यूजीलैंड का मल्टी-फॉर्मेट दौरा. इसमें 5 T20I, 5 ODI और 2 टेस्ट मैच हैं. इसके दिसंबर में श्रीलंका और जनवरी 2027 में जिंबाब्वे के खिलाफ ODI सीरीज. टीम इंडिया को इसके बाद कंगारुओं के खिलाफ घर टेस्ट और ODI सीरीज खेलनी है.
ये पूरा बिजी शेड्यूल दक्षिण अफ्रीका, जिंबाब्वे और नामीबिया में होने वाले 2027 ODI वर्ल्ड कप की तैयारी का हिस्सा है. टीम को सभी फॉर्मेट में अपनी फील्डिंग कसने का पूरा मौका मिलेगा. कार्तिक का मानना है कि फील्डिंग में ये गिरावट इतनी साफ है कि इसे इग्नोर नहीं किया जा सकता. उन्होंने आगे कहा,
कुल मिलाकर पिछले कुछ महीनों में टीम इंडिया की फील्डिंग का स्तर निश्चित रूप से गिरा है. अगर वो बड़े टूर्नामेंट जीतना चाहते हैं, तो उन्हें इस अहम पहलू को सुधारना ही होगा.
2027 का ODI वर्ल्ड कप 2 अक्टूबर 2027 से शुरू होने वाला है. ग्रुप स्टेज में भारत का 7 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया से और 10 अक्टूबर को पाकिस्तान से महामुकाबला है. आने वाले ODI मैच बहुत अहम हैं. टीम को उस फॉर्मेट में अपनी लय ढूंढनी ही होगी, जिसमें उन्हें वर्ल्ड कप जीतना है.
रांची की हार ने साफ दिखा दिया है कि कितने भी रन बना लो या विकेट ले लो, फील्डिंग में हुई एक चूक पूरे मैच का कबाड़ा कर सकती है. अच्छी से अच्छी बैटिंग पर पानी फिर सकता है. भारत के पास अपनी कमियों को सुधारने के लिए कई महीने और एक बिजी शेड्यूल है.
लेकिन वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले बदलाव दिखना चाहिए. अगर कैच छूटने और गलत पोजिशनिंग की समस्या ऐसे ही चलती रही, तो ये एक ऐसी कमजोरी बन जाएगी, जो टीम इंडिया को बहुत भारी पड़ सकती है.
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