सुप्रीम कोर्ट का हथौड़ा, अनुराग ठाकुर की BCCI प्रेसिडेंट पद से छुट्टी
जस्टिस लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट को तीन रिपोर्ट्स सौंपी थीं. उन पर अमल नहीं हो रहा था.
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फोटो - thelallantop
सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई प्रेसिडेंट के पद से हटा दिया है. अजय शिरके को भी बीसीसीआई सेक्रेटरी के पद से भी हटा दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके 18 जुलाई को दिए गए ऑर्डर को लागू नहीं किया गया है. और इसलिए वो ऐसा कदम उठा रही है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर से जवाब मांगते हुए पूछा है कि क्यों उनके खिलाफ़ कार्रवाई न की जाए? लोढ़ा पैनल के रिकमेंडेशंस पर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसले लिए और उसके बाद जो भी घटा उसकी टाइमलाइन कुछ ऐसी है: 18 जुलाई 2016 को लोढ़ा पैनल की रिपोर्ट्स के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुनाया था. उस फ़ैसले में जो बड़े पॉइंट्स थे वो थे: 1. बीसीसीआई में ऑफिस होल्ड करने वाले सभी लोगों की रिटायरमेंट एज 70 साल होगी. 2. बीसीसीआई की गवर्निंग काउंसिल में कोई भी मंत्री या सिविल सर्वेंट नहीं शामिल होगा. 3. CAG का एक मेम्बर बीसीसीआई की गवर्निंग काउंसिल में ज़रूर शामिल होगा. 4. एक स्टेट का एक वोट: रोटेशन बेसिस पर. इसका मतलब ये था कि एक स्टेट के पास किसी भी समय पर एक ही वोट होगा. महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रदेशों में जहां तीन-तीन क्रिकेट असोसिएशन हैं, रोटेशन पालिसी लागू होगी. माने एक टाइम पर एक ही क्रिकेट असोसिएशन वोट कर सकेगा. बाकी के दो असोसिएशन चुप-चाप बैठे रहेंगे. 5. संसद को बीसीसीआई को RTI के अन्दर लाने के लिए बिल बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी थी. साथ ही सट्टेबाजी के लिए भी कानून बनने की बात हुई थी. 6. एडवरटाइजिंग पॉलिसी बीसीसीआई के हाथों में ही रखी गयी थी. 7. लोढ़ा कमेटी ने दो प्लेयर्स असोसिएशन बनाने को कहा था. एक मेन प्लेयर्स के लिए और एक वुमेन प्लेयर्स के लिए. सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी लागू करने को कहा था. साथ ही बीसीसीआई को इन असोसिएशन्स को फंड करने को भी कहा था. 8. लोढ़ा पैनल इन सभी बदलावों को 6 महीने के अन्दर सुनिश्चित करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को फिर से बीसीसी आई को एड्रेस करते हुए कहा, "बीसीसीआई लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें बिना किसी शर्त के मानेगी. या फिर कोर्ट को इसके लिए ऑर्डर पास करने की जरूरत है? बीसीसीआई शुक्रवार तक सभी सिफारिशों को मानने का हलफनामा दे. नहीं तो हम आदेश जारी करेंगे." इस केस में कोर्ट की तरफ से इस पूरे मामले की जांच कर रहे एमिकस-क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यम ने कोर्ट से कहा "इस केस में बीसीसीआई के टॉप एडमिनिस्ट्रेशन पर बैठे लोगों को हटा दिया जाए." सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सिफारिश पर तथास्तु मूड में आते हुए गोपाल सुब्रमण्यम से कहा, "नए एडमिनिस्ट्रेटर खोजे जाएं, ताकि पुराने वाले हटाए जाएं तो विकल्प रहें." जस्टिस टी.एस. ठाकुर ने अपने ही अंदाज़ में अनुराग ठाकुर को आईना भी दिखाया था. बीसीसीआई के वकील कपिल सिब्बल से कोर्ट की प्रोसीडिंग में बात करते हुए टी.एस. ठाकुर ने पूछा "क्या एडमिनिस्ट्रेटर्स के पास कोई स्पेशल स्किल हैं?" जिस पर कपिल ने कहा कि हां अनुराग ठाकुर क्रिकेटर हैं. इसपर टी.एस. ठाकुर का जवाब था, "यहां हर कोई क्रिकेटर हैं. मैं भी सुप्रीम कोर्ट के जजों की क्रिकेट टीम का कप्तान हूं. क्या अनुराग ठाकुर एक सीरियस क्रिकेटर हैं या वो सीरियस ‘प्लेयर’ हैं?" साल 2017 के पहले वर्किंग डे पर सुप्रीम कोर्ट ने जो फ़ैसला दिया उस पर जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि "ये तो होना ही था. मैंने 3 रिपोर्ट्स जमा की थीं तब भी बीसीसीआई ने उन्हें लागू नहीं किया था." सुप्रीम कोर्ट ने फली नरीमन और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील गोपाल सुब्रमण्यम को एमिकस क्यूरी बनाते हुए ये जिम्मेदारी सौंपी है कि वो ये देखें कि बीसीसीआई किसे-किसे किन-किन पदों पर तैनात करेगा.
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