इंडियन क्रिकेट टीम (Team India) के कई प्लेयर इंजर्ड हैं. चोट की वजह से जसप्रीत बुमराह, साई सुदर्शन, वॉशिंगटन सुंदर और हर्षित राणा श्रीलंका के टूर पर नहीं जा पाए. इन प्लेयर्स के अलावा हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी भी इंजर्ड हैं. दोनों प्लेयर्स ने इंग्लैंड के खिलाफ व्हाइट बॉल सीरीज मिस की. पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर इंजर्ड प्लेयर्स की बढ़ती तादाद से काफी चितिंत हैं. उनका कहना है कि प्लेयर्स की फिटनेस के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE)के फीजियो को टारगेट करना ठीक नहीं हैं.
‘जिम फिटनेस से अहम है मैच फिटनेस’, प्लेयर्स की इंजरी पर क्या बोले सुनील गावस्कर?
सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) ने इंजर्ड प्लेयर्स को लेकर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि खिलाड़ियों का चोटिल होना ट्रेनिंग का गलत तरीका हो सकता है. इस दौरान गावस्कर ने BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के फीजियो का बचाव किया.

हाल ही में प्लेयर्स की इंजरी और उनके इलाज का मुद्दा सुर्खियों में रहा. सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अलावा, हेड कोच गौतम गंभीर और चीफ सेलेक्टर अजित आगरकर पर भी सवाल उठे.
CoE को टारगेट करना ठीक नहींपूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का मानना है कि बेंगलुरु स्थिति सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के फीजियो को निशाना बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है. उनका कहना है कि इंजरी की वजह प्लेयर्स की ट्रेनिंग का गलत तरीका हो सकता हैं. इसके लिए उन्होंने CoEको क्लीन चिट दे दी. गावस्कर ने मिड-डे के कॉलम में लिखा,
बुमराह को घुटने में इंजरी है. लेकिन, ज्यादातर भारतीय खिलाड़ियों को हैमस्ट्रिंग की चोट लगी है. इससे साफ है कि उनकी ट्रेनिंग में कुछ गड़बड़ी है. इसी वजह से उन्हें बार-बार हैमस्ट्रिंग इंजरी हो रही है. उनके मुताबिक, ये इंजरी तब लगती हैं, जब प्लेयर्स भारत के लिए खेल रहे होते हैं. लेकिन दुर्भाग्य से इसका दोष BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के फिजियो पर डाल दिया जाता है.
उन्होंने आगे लिखा, ‘बायोमैकेनिक्स के नाम पर बॉलर्स को नेट्स में लिमिटेड संख्या में गेंदें डालने देना, ये सही तरीका नहीं है. ये सवालों के घेरे में है. IPL में भी पता चला है कि कुछ विदेशी फिजियो बॉलर्स को नेट्स में 20 से ज्यादा गेंदें नहीं डालने देते.’ गावस्कर के मुताबिक, अगर मैच में किसी बॉलर को 24 बॉल्स डालनी हैं. अगर कोई नो-बॉल या वाइड नहीं होती. तो नेट्स में इससे कम गेंदें डालने से क्या फायदा होगा?
मैच के लिए फिट होना जरूरीइस दौरान सुनील गावस्कर ने प्लेयर्स के रोज जिम में कड़ी मेहनत करने पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि प्लेयर्स के लिए मैच फिट होना ज्यादा जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार होने वाले इन इंजरी की असली वजह पता लगाने की जरूरत है.
गावस्कर ने आगे लिखा कि यह ऐसा मुद्दा है, जिस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है. यह पता लगाना जरूरी है कि ये चोटें बार-बार क्यों हो रही हैं? जिम के लिए फिट होने से ज्यादा जरूरी है मैच के लिए फिट होना. लेकिन, शायद मैं उस पीढ़ी से हूं, जिसके फिटनेस को लेकर अलग विचार थे.
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लक्ष्मण और सैकिया भी कर चुके हैं CoE का बचावहाल ही में हेड ऑफ क्रिकेट वीवीएस लक्ष्मण और BCCI के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बारे में बात की थी. उन्होंने बताया था कि CoE कैसे काम करता है? इस दौरान वीवीएस लक्ष्मण ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के फीजियो का बचाव किया था. तब उन्होंने कहा था कि CoE सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं हैं.
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