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600वां टेस्ट खेल रही टीम इंडिया, आपको पता है पहले टेस्ट में क्या हुआ था?

टीम इंडिया गॉल में अपना 600वां ऐतिहासिक टेस्ट खेल रही है. लेकिन, क्या आपको 1932 में खेले गए भारत के पहले टेस्ट के बारे में पता है? जब इंडियन पेसर Mohammad Nissar के खौफनाक स्पेल ने अंग्रेजों के होश उड़ा दिए थे.

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टीम इंडिया श्रीलंका के ख‍िलाफ गॉल में 600वां टेस्ट मैच खेल रही है. (फोटो-PTI)

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  • भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में शुरू हुआ टेस्ट मैच भारत का 600वां टेस्ट मैच है, जो भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
  • टीम इंडिया ने अपना पहला आधिकारिक टेस्ट मैच 25 जून 1932 को लॉर्ड्स ग्राउंड में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था, जहां मोहम्मद निसार ने पांच विकेट लेकर ध्यान आकर्षित किया था।
  • 600वां टेस्ट मैच खेलते हुए टीम इंडिया ने पिछले 94 वर्षों में क्रिकेट के क्षेत्र में निरंतर विकास किया है, जो भविष्य में इस खेल में उनकी स्थिति को और सुदृढ़ कर सकता है।

15 अगस्त, आजादी का दिन. पूरा देश जश्न में डूबा है. लेकिन, क्रिकेट के दीवाने टीवी स्क्रीन से चिपके हैं. श्रीलंका के खूबसूरत गॉल स्टेडियम में समंदर की लहरों के बीच भारत और श्रीलंका का टेस्ट मैच शुरू हो चुका है. ये कोई आम टेस्ट मैच नहीं है. गॉल टेस्ट भारतीय क्रिकेट इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज होने वाला है. क्योंकि गॉल में खेला जा रहा ये मैच भारत का 600वां टेस्ट मैच है.

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लेकिन, क्या आपको पता है टीम इंडिया दुनिया की सिर्फ तीसरी टीम है, जिसने 600 टेस्ट मैच खेले हैं. इस मामले में टॉप पर है- इंग्लैंड, जिन्होंने 1097 टेस्ट मैच खेले हैं. वहीं, दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया है. कंगारुओं ने टेस्ट 883 मुकाबले खेले हैं. अब टीम इंडिया भी 600 वाले क्लब में शामिल हो गई है. लेकिन, इसके जश्न से पहले उस पहली ईंट को याद करना तो बनता है, जहां से इस विशाल इमारत की शुरुआत हुई थी.

इसके लिए हमें समय को 94 साल पीछे धकेलना होगा. लंदन की ठंडी सुबह. जब पहली बार 11 भारतीयों ने क्रिकेट के मैदान पर अंग्रेजों की आंखों में आंखें डाली थीं. तारीख थी 25 जून 1932. लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड. टीम इंडिया अपना पहला आधिकारिक टेस्ट मैच खेलने उतरी थी. सामने थी क्रिकेट की जनक इंग्लैंड की टीम. कप्तान थे डगलस जार्डिन. वही जार्डिन, जो बाद में एशेज में बॉडीलाइन सीरीज के लिए कुख्यात हुए.

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पोरबंदर के राजा ने छोड़ दी कप्तानी

मैच से पहले एक गजब का किस्सा हुआ. उस वक्त भारतीय टीम में राजा-महाराजाओं का जलवा हुआ करता था. पोरबंदर के महाराजा को टीम का आधिकारिक कप्तान बनाया गया था. लेकिन, मौज-मौज में खेलना और प्रोफेशनल क्रिकेट खेलने में अंतर होता है. महाराजा साहब को पता था कि इंग्लैंड के धाकड़ तेज गेंदबाजों का सामना करना आसान नहीं होगा. मैच से ठीक पहले महाराजा साहब ने कप्तानी सी.के. नायडू को सौंप दी. नायडू उस दौर के असली सुपरस्टार थे. लंबे-लंबे छक्के मारने में उनका कोई सानी नहीं था.

इंग्लिश कप्तान डगलस जार्डिन ने टॉस जीता. पहले बैटिंग का फैसला किया. अंग्रेजों को लगा होगा कि ये भारत से आए नौसिखिए है. इनके तो पसीने निकाल देंगे. इंग्लैंड के ओपनर्स पर्सी होम्स और हर्बर्ट सटक्लिफ क्रीज पर उतरे. ये वही जोड़ी थी, जिसने कुछ ही दिन पहले यॉर्कशर के लिए खेलते हुए 555 रनों की वर्ल्ड रिकॉर्ड पार्टनरशिप की थी. कप्तान नायडू ने पंजाब के पेसर मोहम्मद निसार को गेंद थमा दी.

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निसार का तूफानी स्पैल

निसार ने लंबा रनअप लिया और गेंद फेंकी. रफ्तार इतनी कि अंग्रेजों की आंखें फटी रह गईं. टीम इंडिया के पास उस वक्त मोहम्मद निसार और अमर सिंह के रूप में एक फास्ट बॉलिंग जोड़ी थी. दोनों की स्पीड ऐसी थी कि ऑपोनेंट्स खौफ खाते थे.स्कोर बोर्ड पर अभी 8 रन ही टंगे थे कि निसार की एक इनस्विंग यॉर्कर ने हर्बर्ट सटक्लिफ की गिल्लियां बिखेर दीं. अंग्रेज सन्न रह गए.

कुछ ही देर बाद निसार ने पर्सी होम्स का भी स्टंप उखाड़ दिया. 11 रन पर इंग्लैंड के दोनों दिग्गज ओपनर पवेलियन लौट चुके थे. निसार ने उस पारी में 93 रन देकर 5 विकेट झटके. वो भारतीय टेस्ट इतिहास में 5-विकेट हॉल पूरा करने वाले पहले गेंदबाज बने. दूसरे छोर से अमर सिंह ने भी 2 विकेट चटकाए.

मैच हार गए, लेकिन कमा ली इज्ज्त

इंग्लैंड की पहली पारी 259 रनों पर सिमट गई. ये अंग्रेजों के लिए किसी झटके से कम नहीं था. इसके बाद जब टीम इंडिया की बैटिंग आई, तो कप्तान सी.के.नायडू ने सबसे ज्यादा 40 रन बनाए. भारत पहली पारी में 189 रन बना सका. दूसरी पारी में इंग्लैंड ने 275 रन बनाए और भारत को 346 रनों का टारगेट दिया. दूसरी पारी में भी भारतीय टीम 187 रन ही बना सकी.

टीम इंडिया अपना पहला टेस्ट मैच 158 रनों से हार गई. लेकिन, बात हार-जीत की थी ही नहीं. मैच के बाद अंग्रेजी अखबारों ने जो लिखा, वो भारतीय क्रिकेट की पहली बड़ी जीत थी. उन्होंने लिखा कि भारतीय टीम की तेज गेंदबाजी और फील्डिंग वर्ल्ड क्लास है. डगलस जार्डिन को भी मानना पड़ा कि ये टीम भविष्य में सबको रुलाने वाली है.

अब गॉल में जब भारतीय खिलाड़ी मैदान पर उतरे हैं, तो उन्हें सिर्फ 600वां मैच खेलने का गुरूर नहीं है. ये उस सफर का भी जश्न है, जो 1932 में लॉर्ड्स के मैदान से शुरू हुआ था. मोहम्मद निसार की रफ्तार और सी.के. नायडू की कप्तानी से सफर शुरू करने वाली ये टीम इंडिया आज दुनिया की सबसे अच्छी टीमों में से एक है.

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