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एक सी गलती, सचिन बच गए पर काम्बली को तमाचा क्यूं पड़ा?

वो बातें जो कांबली को कांबली बनाती हैं. आज बड्डे है.

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फोटो - thelallantop
विनोद गणपत कांबली. 18 जनवरी 1972 की पैदाइश. एक मिडल क्लास फैमिली. काम्बली को क्रिकेट खेलना होता था. मगर जगह की कमी आड़े आती थी. वहां से निकले तो सीधे रमाकांत आचरेकर की शरण में. जहां मुलाक़ात हुई सचिन तेंदुलकर 'तेंडल्या' से. और 24 साल की उमर में साथ में टेस्ट क्रिकेट खेल रहा था. पढ़ते हैं काम्बली के जीवन से जुड़ी कुछ बातें जो काम्बली को काम्बली बनती हैं.

जगह की कमी ने बनाया विस्फ़ोटक बल्लेबाज

काम्बली जहां रहते थे, उनके आस पास बड़ी बड़ी बिल्डिंग थीं. बीच में एक सड़क. वही सड़क उनकी पिच हुआ करती थी. मगर ज़मीन नहीं थी. थी तो बस हवा और गेंद रोकती बिल्डिंगें. नियम बनाया गया कि बिल्डिंग पर जितना ऊपर मारोगे उतने रन मिलेंगे. काम्बली खूब ऊंचे ऊंचे शॉट्स मारते थे. और इसी ने उन्हें स्पिन गेंद पर चढ़ के मारे में एक्सपर्ट बना दिया. वो गेंद की पिच भांप कर उसे हवा में टांग देते थे.

वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते ही खाया अपने कोच से झन्नाटेदार थप्पड़

काम्बली और तेंदुलकर एक साथ शारदा आश्रम के लिए खेलते थे. विनोद कांबली उस रोज़ सेंट जेवियर के ख़िलाफ़ सचिन के साथ मिलकर 664 रन की रिकॉर्ड पार्टनरशिप कर चुके थे. लोकल रिकॉर्ड नहीं, वर्ल्ड रिकॉर्ड. ठीक इसी रिकॉर्ड के बाद उन्हें रमाकांत आचरेकर से थप्पड़ पड़ा था. कहानी के पीछे की एक कहानी ये है कि मैच का पहला दिन खतम होने पर सचिन 192 और कांबली 182 पर खेल रहे थे. जिसके बाद कोच रमाकांत अचरेकर ने सचिन से कहा कि अगले दिन सुबह पारी डिक्लेयर कर देना. सचिन ने हां कर दी. किसी वजह से आचरेकर अगले दिन ग्राउंड पर नहीं पहुंचे. इन दोनों को मौका मिल गया. कप्तान सचिन, कांबली के साथ बैटिंग करने उतर गए. उस वक़्त कोच लक्ष्मण चव्हाण बाउंड्री से इनिंग्स डिक्लेयर करने को कहते रहे. पर दोनों बैट्समैन उधर ध्यान ही नहीं दे रहे थे. achrekar उस वक्त मोबाइल का जमाना तो था नहीं, चव्हाण ने फिर बगल के ही खाऊ गली से अचरेकर को फ़ोन घुमाया और कहा ‘सर, स्कोर 700 से ऊपर जा चुका है...’ इतना सुनते ही आचरेकर ने गुस्सा करते हुए आगे खेलने से साफ़ मना कर दिया और इनिंग डिक्लेयर करने को कहा. मैच खत्म होने के बाद जब अचरेकर टीम के पास आए तो सचिन गायब थे. वे जानते थे सजा तो मिलेगी इसलिए खिसक लिए. सामने कांबली मिले, चमाट लगाते हुए कोच ने पूछा 'मेरे मना करने के बाद भी पारी घोषित क्यूं नहीं की?' कांबली डरते हुए बोले, ‘सर, सचिन ने मना किया था’. खैर सचिन और कांबली ने जो भी किया हो देश का नाम तो चमका ही दिया.

रणजी ट्रॉफी में सबसे शानदार शुरुआत

ये किस्सा एक लाइन का है. विनोद काम्बली ने रणजी ट्रॉफी करियर की सबसे शानदार शुरुआत की. उन्होंने अपनी पहली ही गेंद पर छक्का मार दिया. रणजी ट्रॉफी करियर की शुरुआत के कुछ ही दिन बाद काम्बली इंडियन टीम का हिस्सा बन गए.

अहमदाबाद की गलियों में स्कर्ट पहन कर घूमे थे कांबली

अहमदाबाद.  सचिन और कांबली वहां मैच खेलने गए हुए थे.  रेस्ट वाले एक दिन सचिन और कांबली किसी बात पर चर्चा शुरू हुई और फिर बात इतनी बढ़ी कि सचिन ने चैलेंज कर दिया कि काम्बली लड़कियों की स्कर्ट पहन कर अहमदाबाद नहीं घूम सकते. कांबली ने इस चैलेन्ज को बहुत सीरियसली लिया. तुरत ही उस चैलेन्ज को एक्सेप्ट कर लिया. बिना देर लगाए. और पूछा कि शर्त जीतने पर उन्हें मिलेगा क्या? “मैं जिंदगी भर तुम्हारा गुलाम रहूंगा”, सचिन ने जवाब दिया. कांबली ने पहनी स्कर्ट और सुबह से शाम क्या, रात तक स्कर्ट नहीं उतारी. रात को कमरे में आने पर ड्रेस बदली.

"खुद को बर्बाद कर देने वाले मेरे रवैये से सचिन मुझे बचा सकते थे"

टीवी पर बड़ा भारी प्रोग्राम आता था. सच का सामना. लाई डिटेक्टिंग टेस्ट होता था. सच बोला तो ठीक, झूठ बोला तो पकड़े जायेंगे और खेल खतम. इस शो में विनोद काम्बली भी आये थे. उनसे एंकर राजीव खंडेलवाल ने पूछा "क्या आप मानते हैं कि खुद को बर्बाद कर देने वाले आपके रवैये से सचिन आपको बचा सकते थे?" इस सवाल पर कांबली ने जवाब दिया "मुझे लगता है. हां." इसके साथ कांबली ने शोले फ़िल्म का इग्ज़ाम्पल दिया और कहा कि जय और वीरू में से जय को हर वक्त त्याग करना पड़ा. उसे मरना पड़ा. उनके जवाब के बाद बहुत दिनों तक इस बारे में बातें की जाती रहीं. कांबली सचिन से उस वक्त भी दुखी हुए थे जब सचिन ने अपने फेयरवेल में उनको नहीं बुलाया और ना ही उस वर्ल्ड रिकॉर्ड पार्टनरशिप के बारे में कुछ कहा. https://www.youtube.com/watch?v=kr939vLKEAE

जब कपिल ने कहा 'शायद कांबली, सचिन से बेहतर खिलाड़ी थे'

1993 में अपना धमाकेदार करियर शुरू करने वाले कांबली ने पहले सात टेस्ट मैच में ही दो डबल सेंचुरी ठोक दी. लेकिन दो साल के अंदर ही उनका टेस्ट करियर खत्म हो गया. सचिन और कांबली दोनों ने एक साथ करियर की शुरुआत की और दोनों शानदार खिलाड़ी थे पर आगे हमें पता है कि सचिन देश के लिए 24 साल खेले और कांबली कुछ ही दिनों में गायब हो गए. क्योंकि कांबली अपनी शुरूआती सफलता को जारी न रख सके. उनके ऊपर डिसिप्लिन में न रहने का भी इल्ज़ाम लगता रहा. सचिन ने 2015 में इन्स्टाग्राम पर कांबली के साथ एक फ़ोटो पोस्ट की. साथ में लिखा ‘डाउन टू मेमोरी लेन’. इस फोटो को पोस्ट करने के बाद यह माना जाने लगा कि दोनों के बीच अब चीज़ें ठीक हो रही हैं. CCt6NbUVEAA5Uip

1996 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल

1996 में श्रीलंका के खिलाफ खेला गया वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल मैच. जिस मैच की एक तस्वीर क्रिकेट के इतिहास में अमर हो चुका है. विनोद काम्बली रो रहे थे. इंडिया मैच हार चुका था. लगभग. स्टेडियम में दंगा हो रहा था. एक बात का ज़िक्र कांबली ने बहुत दिनों बाद किया. उन्होंने कहा कि वो मैच फ़िक्स था. भारत ने पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया था जिसे बदल दिया गया और कप्तान अज़हरुद्दीन ने श्रीलंका को बैटिंग के लिए बुलाया. इस मैच में कप्तान अजहरुद्दीन और जडेजा दोनों खाता भी न खोल सके, दोनों पर मैच फिक्सिंग के आरोप भी लगे. काम्बली हमेशा कहते रहे कि उनका करियर उस मैच के बाद खतम कर दिया गया. साज़िशन. हालांकि उन्होंने उस मैच के बाद 35 मैच और खेले. काम्बली ने अपना आखिरी वन-डे मैच 29 अक्टूबर 2000 को खेला. https://www.youtube.com/watch?v=-UO3V_19DZ0 2013 में कांबली को दिल का दौरा पड़ा. लीलावती हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे. अभी दनदना रहे हैं. क्रिकेट विशेषज्ञ के रूप में. नवजोत सिंह सिद्धू को इन्होंने ट्विटर पर भला-बुरा कहा. नौकरानी सोनी ने जब कांबली पर मारपीट का आरोप लगाया तो मीडिया में कांबली फिर छाये रहे. कुछ समय के लिए ही सही.  

 ये स्टोरी दी लल्लनटॉप के साथ इन्टर्नशिप कर रहे आदित्य झा ने की है.

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