शिखर घवन ने चौथे वनडे में मारी सेंचुरी.
महेंद्र सिंह धोनी गए और उनकी जगह आये हैं विराट कोहली. धोनी अब सिर्फ एक विकेट कीपर बैट्समैन के रूप में खेलेंगे. और ये टीम इंडिया में हुई सबसे बड़ी तब्दीली है. इंडियन टीम अनाउंस हुई है. इंग्लैंड के ख़िलाफ़. वन-डे और टी-20 मैचों के लिए. 3 वन-डे और 3 टी-20. 17 जनवरी को पहला वन-डे खेला जाएगा. वन-डे मैचों के लिए जो टीम चुनी गयी है वो है:

टीम में युवराज सिंह की वापसी हुई है. जबकि शिखर धवन को जगह दी गयी है. शिखर धवन अब शिशुपाल की राह पर चल निकले हैं. आंकड़ा 100 के बेहद नज़दीक है. कभी भी कोप का शिकार बन सकते हैं. मौके पर मौके मिलते जा रहे हैं और वो उसमें फ़ेल होते जा रहे हैं. पिछली बार उन्होंने जब 50 का स्कोर पार किया था तब टीम इंडिया आधे ग्लोब को लांघकर दूसरे छोर पर खाड़ी खेल रही थी. और महीना था वो जिसमें स्वेटर नहीं छाते दिखते हैं. जुलाई. रणजी ट्रॉफी में धवन का सबसे बड़ा स्कोर है 49 रन का. धवन के लिए ये सीरीज़ बहुत बड़ी हो सकती है. ये सीरीज़ उन्हें बिगाड़ और बना सकती है. ये वो आखिरी घंटे हैं जिसमें धवन को ज़्यादा से ज़्यादा लिख कर पास होने लायक नंबर ले आने हैं. क्यूंकि ढाई घंटे निकल चुके हैं. वहीं युवराज सिंह का आना अच्छा इंडिकेशन है. योगराज सिंह चाहें तो धोनी को और कोसते हुए कोहली को अपने घर चाय पर बुला सकते हैं. क्यूंकि धोनी का राज जाते ही युवराज की टीम में वापसी हुई है. मज़ाक को किनारे रखें तो युवराज को उनकी रणजी ट्रॉफी में दी गयी परफॉरमेंस का फल मिला है. बड़ौदा के खिलाफ़ 260 रन की इनिंग्स तो बेहतरीन ही थी. उसके बाद अगली इनिंग्स 85 रन की थी. मध्य प्रदेश के खिलाफ़ भी युवराज ने 177 और 76 रन की इनिंग्स खेलीं. और इसीलिए उन्हें टीम में वापस लिया गया है. भले ही टेस्ट टीम में अभी भी उनके लिए जगह न बन पायी हो लेकिन वन-डे में वो बाकायदा दावा ठोंक रहे थे. हो ये भी सकता है कि युवराज के लिए भी बुरी परफॉरमेंस आने पर ये आखिरी सीरीज़ साबित हो. क्यूंकि इस सीरीज़ के साथ ही चैम्पियंस ट्रॉफी की तैयारी शुरू हो जाएगी. बुमराह और पंड्या, धोनी की उंगली पकड़ अब टीम का परमानेंट हिस्सा बन चुके हैं. भुवनेश्वर का तैयार होना भी अच्छी खबर है. इंग्लैंड के खिलाफ़ टी-20 मैचों के लिए टीम इस तरह है:

टीम में युवराज सिंह हैं मगर धवन नहीं. ये पचाना कुछ आसान नहीं है कि एक प्लेयर न टेस्ट में है न टी-20 में. सिर्फ वन-डे में है. अभी तक टेस्ट और टी-20 स्पेशलिस्ट होते थे. धवन के साथ उल्टा है. खैर, आशीष नेहरा टी में हैं. और ये नेहरा के स्ट्रगल के बाद मिली सफ़लता की कंसिस्टेंसी दिखाता है. नेहरा जो एक वक़्त पर पूरी तरह से गायब हो चुके थे, चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से बेहतरीन खेलकर लगातार टी-20 में जमे हुए हैं. बढ़िया बात ये है कि टीम में ऋषभ पन्त को लाया गया है. नवंबर में ऋषभ ने रणजी ट्रॉफी के इतिहास की सबसे तेज़ सेंचुरी मारी है. झारखंड के खिलाफ़. फरवरी में अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलते हुए भी पन्त ने अंडर-19 क्रिकेट की सबसे तेज़ फ़िफ्टी बनाई थी. ऋषभ विकेट कीपर बैट्समैन हैं और रिद्धिमान साहा ने उन्हें एक बेहतरीन कीपर बताया है. मनीष पांडे वन-डे और टी-20 दोनों ही टीमों में हैं. यजुवेंद्र चहल को कोहली के साथ आईपीएल में खेलने का फल मिला है. कोहली ने चहल के साथ यकीनन समय बिताया होगा. लिहाज़ा वो उनके खेल को बखूबी जानते हंगे. पंजाब से खेलने वाले सीधे हाथ के तेज़ बल्लेबाज मंदीप सिंह को भी टीम में रखा गया है. मंदीप ने ऑस्ट्रेलिया-ए में तगड़ी स्कोरिंग की है और साथ ही रणजी में भी रन बनाने में कोई कोताही नहीं बरती है. इसके अलावा, धोनी की जगह आये कप्तान कोहली के ऊपर थोड़ा सा ऐडेड प्रेशर ज़रूर होगा लेकिन कोहली प्रेशर में भव्य क्रिकेट खेलने वालों में है. और इसलिए प्रेशर में होना कोई खास खतरे का संकेत नहीं है.