सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी (Satwiksairaj Rankireddy) और चिराग शेट्टी (Chirag Shetty) की भारतीय जोड़ी शनिवार को पेरिस में जारी बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप (Badminton World Championship) का सेमीफाइनल मुकाबला हार गई. इस हार के बावजूद ये जोड़ी ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम करने में कामयाब रही. सात्विक और चिराग ने 2022 में इस टूर्नामेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था और इस तरह से उनका वर्ल्ड चैंपियनशिप में यह दूसरा मेडल है. इससे 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद से भारत का हर वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीतना भी जारी रहा.
वर्ल्ड चैंपियनशिप सेमीफाइनल में हारे सात्विक-चिराग, मिला ब्रॉन्ज मेडल
बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 में ये भारत का इकलौता मेडल रहा. इससे पहले पीवी सिंधु के पास भी मेडल पक्का करने का मौका था. हालांकि वो इंडोनेशियाई खिलाड़ी वरदानी से क्वार्टरफाइनल मैच हार गई थीं.


भारतीय जोड़ी को सेमीफाइनल के कड़े मुकाबले में चेन बो यांग और लीयू ये की जोड़ी से 62 मिनट तक चले कड़े मुकाबले में हार मिली. अगर भारतीय जोड़ी ये मुकाबला जीत जाती तो वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली डबल्स जोड़ी होती. हालांकि चीनी जोड़ी ने 21-19, 18-21, 21-12 से जीत हासिल करके उनका ये सपना तोड़ दिया.
पेरिस में पूरा किया अपना बदलाइस हार के बावजूद ये वर्ल्ड चैंपियनशिप सात्विक और चिराग के लिए सुखद यादें दे कर गई है. पेरिस में ही वो ओलंपिक क्वार्टर फाइनल हारे थे. अब यहां फिर से आकर वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल जीतकर उनका दर्द शायद कुछ कम हुआ हो. भारतीय जोड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल पक्का करने के लिए उसी जोड़ी को मात दी थी जिसने उसे ओलंपिक से बाहर किया था. भारतीय जोड़ी पिछले साल पेरिस ओलंपिक में मलेशिया की आरोन चिया और सोह वूई यिक की जोड़ी से हार गई थी. 29 अगस्त को देर रात खेले गए मैच में उन्होंने इस हार का बदला ले लिया था. सात्विक और चिराग की विश्व की तीसरे नंबर की जोड़ी ने 43 मिनट में 21-12, 21-19 से शानदार जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था.
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दोहराया टोक्यो वाला कमालक्वार्टर फाइनल जीत के साथ ही उनका ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो गया था. आपका बता दें कि वर्ल्ड बैडमिंडन चैंपियनशिप में सेमीफाइनल हारने वाले खिलाड़ियों को ब्रॉन्ज मेडल दिया जाता है. इसके लिए अलग से मुकाबले नहीं होते. सात्विक चिराग ने अपना पिछला वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल भी इसी अंदाज में जीता था. टोक्यो ओलंपिक के दौरान भी ये जोड़ी ओलंपिक मेडल हासिल नहीं कर पाई थी लेकिन इसके बाद टोक्यो में ही हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था.
भारत की दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट पीवी सिंधु के पास छठा वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप मेडल जीतने का मौका था लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाईं. क्वार्टरफाइनल मुकाबले में सिंधु को इंडोनेशिया की पुत्री कुसुमा वर्दानी के खिलाफ कड़े मुकाबले में हार का मुंह देखना पड़ा.
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