ऑस्ट्रेलिया के कई शहरों में रविवार, 31 अगस्त को 'मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया' नाम से बड़ी रैली हुई, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया. यह रैली प्रवासियों के खिलाफ निकली, लेकिन इसमें सीधा निशाना भारतीयों को बनाया गया. रैली के पोस्टरों में कहा गया कि पिछले 5 सालों में भारत से ऑस्ट्रेलिया आने वालों लोगों की संख्या 100 सालों में ग्रीस और इटली से आने वालों से ज्यादा है.
'100 साल में ग्रीक-इटैलियन से ज्यादा 5 साल में इंडियन आ गए,' ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों के खिलाफ प्रदर्शन
March For Australia: जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार, 2013 से 2023 के बीच ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों की संख्या दोगुनी होकर करीब 8.45 लाख हो गई है. प्रवासियों के खिलाफ निकली रैलियों की ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कड़ी निंदा की है.


रैली करने वालों का कहना है कि वे 'जनसंख्या विस्फोट और सांस्कृतिक बदलाव' के खिलाफ हैं. हालांकि, सरकार और कई संगठनों ने इसे साफ तौर पर नफरत फैलाने वाली मुहिम बताया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, रैली के पोस्टरों और सोशल मीडिया पोस्ट्स में भारतीय प्रवासियों को खासतौर पर निशाना बनाया गया. एक पोस्टर में लिखा है,
"5 सालों में भारतीयों की संख्या, 100 सालों में ग्रीक और इटैलियन से ज्यादा है... और यह सिर्फ एक देश से है... हम जानते हैं कि प्रवास करने का सांस्कृतिक असर होता है. यह कोई मामूली सांस्कृतिक बदलाव नहीं है, बल्कि बिल्कुल साफ बदलाव है."

जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार, 2013 से 2023 के बीच ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों की संख्या दोगुनी होकर करीब 8.45 लाख हो गई है. इन रैलियों की ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कड़ी निंदा की है. इन रैलियों के होने से पहले 28 अगस्त को गृह मंत्री टोनी बर्क ने एक साझा बयान में कहा था,
"हमारे देश में ऐसे लोगों के लिए कोई जगह नहीं है जो समाज को बांटते हैं और सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाते हैं. हम मॉडर्न ऑस्ट्रेलिया के साथ खड़े हैं."

उसी में बयान में बहुसंस्कृति मामलों की मंत्री ऐनी अली ने कहा था,
विरोध प्रदर्शन और गिरफ्तारी“हम हर ऑस्ट्रेलियाई के साथ खड़े हैं, चाहे वो कहीं भी पैदा हुआ हो. जो लोग प्रवासी समुदायों को डराना और बांटना चाहते हैं, उनके लिए हमारे समाज में कोई जगह नहीं है. नस्लवाद और खुद को सबसे अच्छा मानने की सोच पर आधारित इस तरह के अति-दक्षिणपंथी बरताव की मॉडर्न ऑस्ट्रेलिया में कोई जगह नहीं है.”
सिडनी, मेलबर्न और कैनबरा जैसे शहरों में बड़ी संख्या में लोग इन रैलियों में शामिल हुए. मेलबर्न में एक रैली में पुलिस और विरोध प्रदर्शन करने वालों के बीच झड़प हुई, जिसमें छह लोगों को गिरफ्तार किया गया और दो पुलिसकर्मी घायल हुए. वहीं, रिफ्यूजी एक्शन कोएलिशन जैसे संगठनों ने इन रैलियों के खिलाफ काउंटर रैली की. उन्होंने 'मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया' को नस्लवाद और घृणा से भरा बताया.
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