सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने अपनी कप्तानी के पुराने दिनों को याद किया है. सचिन ने खुलकर बताया कि बतौर कप्तान उनका कार्यकाल क्यों सफल नहीं रहा. उन्होंने माना कि 90 के दशक में जब वो टीम इंडिया की कमान संभाल रहे थे, तब टीम चुनने में उनकी पूरी नहीं चलती थी. यानी उनके हाथ बंधे हुए थे.
सचिन क्यों बतौर कप्तान नहीं हुए सफल? अब खुद बड़े राज खोल दिए
Sachin Tendulkar on Captaincy : दिग्गज क्रिकेटर Sachin Tendulkar ने रेडिट आस्क मी एनिथिंग सेशन में अपनी कप्तानी के दिनों पर बड़ा खुलासा किया. सचिन ने बताया कि 1990 के दशक में बतौर कप्तान वो क्यों सफल नहीं रहे थे. साथ ही उन्होंने अपने फेवरिट इंडियन कप्तान को लेकर भी बात की.

सचिन ने अपने 24 साल लंबे इंटरनेशनल करियर में भारत के लिए हर फॉर्मेट खेला. 3 नवंबर को उन्होंने रेडिट पर 'आस्क मी एनीथिंग' सेशन किया. यानी फैंस से सीधे सवाल-जवाब किए. इसी बातचीत में उन्होंने अपनी कप्तानी का दर्द बयां किया. साथ ही अपने फेवरेट भारतीय कप्तानों के नाम भी बताए. साथ ही साउथ अफ्रीका के कप्तान तेंबा बावुमा की जमकर तारीफ भी की.
सचिन ने क्या बताया?सचिन ने 15 नवंबर 1989 को इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा था. 16 नवंबर 2013 को क्रिकेट को अलविदा कहा. इस महान बल्लेबाज ने कहा कि टीम इंडिया की कप्तानी करना उनके लिए बहुत बड़े गर्व की बात थी. लेकिन इसके साथ कई बंदिशें भी थीं. खासतौर पर तब, जब बात प्लेइंग XI चुनने की आती थी. तेंदुलकर ने साफ शब्दों में कहा,
कप्तान के तौर पर टीम की अगुवाई करना बहुत बड़े सम्मान की बात थी. लेकिन मुझे हमेशा अपनी पसंद की टीम चुनने की पूरी आजादी नहीं मिली. 1990 के दशक की तुलना में आज का BCCI कहीं ज्यादा प्रोफेशनल है. उस जमाने में भारतीय क्रिकेट बहुत बुरे दौर से भी गुजरा था.
सचिन क्रिकेट इतिहास के सबसे महान बल्लेबाजों में गिने जाते हैं. लेकिन 90 के दशक में जब वो दो बार भारत के कप्तान बने, तो नतीजे उनके मन मुताबिक नहीं रहे.

जब सचिन से उनके पसंदीदा कप्तानों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दो नाम लिए. सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी. इन दोनों ही दिग्गजों ने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदलने में बड़ा रोल निभाया है. सचिन ने कहा,
अगर मेरे फेवरेट कप्तानों की बात करूं, तो सौरव गांगुली और एमएस धोनी का नाम मेरी लिस्ट में सबसे ऊपर होगा.
इन दोनों ही कप्तानों के साथ सचिन की वर्ल्ड कप की शानदार यादें जुड़ी हैं. दादा यानी गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया ने 2003 के ODI वर्ल्ड कप में गजब का खेल दिखाया था. साउथ अफ्रीका में हुए उस टूर्नामेंट में भारत फाइनल तक पहुंचा था. हालांकि, वहां टीम रनर-अप रही. वहीं, धोनी की कप्तानी में भारत ने 2011 में अपने घर में ODI वर्ल्ड कप जीता. इसी जीत के साथ सचिन का वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाने का सालों पुराना सपना पूरा हुआ था.
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बावुमा की कप्तानी के फैन हुए सचिनसचिन ने साउथ अफ्रीका के कप्तान तेंबा बावुमा की भी खूब सराहना की. उन्होंने दाएं हाथ के इस बैटर की तारीफ करते हुए कहा कि बावुमा ने आगे बढ़कर टीम को लीड किया है और शानदार रिजल्ट्स भी दिए हैं. सचिन ने लिखा,
मैं तेंबा बावुमा के जज्बे की वाकई दाद देता हूं. उन्होंने फ्रंट से टीम की कमान संभाली है. साउथ अफ्रीकी क्रिकेट को बेहतरीन रिजल्ट्स दिए हैं. साउथ अफ्रीका का ICC खिताब जीतना वर्ल्ड क्रिकेट के लिए बहुत अच्छी खबर है.
बावुमा की कप्तानी में प्रोटियाज टीम ने मैदान पर तगड़ा खेल दिखाया है. इसमें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-1 से मिली शानदार जीत भी शामिल है. इस सीरीज में टीम की वापसी कराने में खुद कप्तान बावुमा ने बड़ा रोल निभाया. उन्होंने दूसरे टेस्ट में अपने करियर की सबसे बड़ी पारी खेली और 179 रन ठोक दिए.
इसके बाद सीरीज का फैसला न्यूलैंड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट में हुआ. वहां ऑफ-स्पिनर साइमन हार्मर ने गेंद से कमाल कर दिया. उन्होंने अकेले दम पर मैच जिताऊ प्रदर्शन किया. हार्मर ने पूरे मैच में 10 विकेट चटकाए.
दूसरी पारी में तो उन्होंने महज 16 रन देकर 6 बैटर्स को पवेलियन का रास्ता दिखाया. हार्मर की इसी घातक बॉलिंग के दम पर साउथ अफ्रीका ने आखिरी दिन ऑस्ट्रेलिया को सिर्फ 111 रन पर समेट दिया. साथ ही सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली.
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