रोहित शर्मा. टीम इंडिया के पार्टटाइम कप्तान. फुलटाइम इसलिए नहीं, क्योंकि जबसे ये कप्तान बने हैं, भारत के लिए कम से कम आधा दर्जन लोग टॉस कर चुके हैं. यानी कप्तान बनने के बाद रोहित सबसे ज्यादा कंसिस्टेंट रेस्ट लेने में रहे हैं. और ये हमारे रेस्टिंग कप्तान अभी श्रीलंका के खिलाफ़ इंडियन क्रिकेट टीम की कप्तानी कर रहे हैं.
शमी को बीच मैदान नीचा दिखाकर क्या पा गए रोहित शर्मा?
रोहित ने ऐसा क्यों किया?
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वनडे सीरीज़ का पहला मैच खत्म हो चुका है. विराट कोहली की सेंचुरी के साथ रोहित और शुभमन के पचासों के दम पर भारत ने ये मैच 67 रन से जीता. इस जीत के बाद लगभग सारी हेडलाइंस विराट कोहली ने बटोर ली. और शायद इसी चक्कर में कप्तान रोहित की सहृदयता की उतनी चर्चा नहीं हुई, जितनी होनी चाहिए थी. और इसलिए अब हम रोहित के इसी बड़े दिल पर बात करेंगे.
दरअसल हुआ कुछ यूं, कि श्रीलंका अपनी पारी का आखिरी ओवर खेल रही थी. जीत के लिए उन्हें बहुत से रन चाहिए थे. क्रीज़ पर दसुन शनाका और कसुन रजिता थे. शनाका 95 रन बना चुके थे. यानी उन्हें सेंचुरी के लिए सिर्फ पांच रन चाहिए थे. ओवर की पहली गेंद पर उन्होंने दो रन ले लिए. अगली गेंद पर LBW की जोरदार अपील हुई. लेकिन शनाका बच गए. अगली गेंद पर सिंगल आया. और अब रजिता स्ट्राइक पर थे.
मोहम्मद शमी गेंद के साथ दौड़े. और गेंद फेंकने से पहले ही क्रीज़ से बाहर जा रहे शनाका को नॉन-स्ट्राइकर एंड पर रनआउट कर दिया. हां, ये वही वाला रनआउट था जिस पर सालों से बहस चल रही है. तो, शमी ने शनाका को रनआउट किया और फिर की विकेट की अपील. लेकिन तभी सीन में आए कैप्टन रोहित शर्मा और उन्होंने अपील वापस ले ली. बाद में इस मसले पर रोहित ने कहा,
'मुझे पता नहीं था कि शमी ऐसा कर जाएगा. वह 98 पर बल्लेबाजी कर रहे थे. वह शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे. हम नहीं चाहते थे कि वह इस तरह से आउट होकर पविलियन लौटें.'
यानी रोहित की नजर में ये आउट होने का सही तरीका नहीं है. अब यूं तो अभी आप कमेंट करेंगे कि वो इंडिया का कैप्टन है, उसे नियम ना बताओ. और आपकी ये आधी बात सही भी है. वो इंडिया के कैप्टन तो हैं ही. लेकिन नियम तो सबके लिए सेम हैं ना. और नियम यही कहते हैं कि शनाका आउट थे. आउट होने का यह तरीका सर्वमान्य है.
और अगर शमी ने ऐसा किया, तो बीच मैदान उन्हें नीचा दिखाने की क्या जरूरत थी? अगर आपको नॉन-स्ट्राइकर एंड पर रनआउट करना नहीं पसंद, तो ठीक है. आप ये बात अपनी टीम को बताकर रखिए. पहले से उन्हें बोल दीजिए कि नॉन-स्ट्राइकर भले ही गेंद फेंकने से पहले भागकर स्ट्राइक पर आ जाए, लेकिन उसे आउट नहीं करना है.
और सिर्फ इतना ही क्यों? आप इस बात को भी साफ करा देवें कि 90 के पार जा चुके बल्लेबाज को किस विधि से आउट किया जा सकता है. क्योंकि रनआउट वाला तरीका तो आपने रिजेक्ट कर ही दिया. क्या उसका कैच उठे तो लेना है? क्या उसे स्टंप पर गेंद फेंकनी है? अगर हां, तो कैसे फेंके कि वो बोल्ड या LBW ना हो? प्रोफेशनल क्रिकेट में भी यारी-दोस्ती के लिए हम इतना तो कर ही सकते हैं ना.
जब ये नियम लागू हो चुका है, तो इसके हिसाब से विकेट लेने में क्या बुराई है? ऐसा भी नहीं है कि शनाका पहली बार क्रीज़ से निकले थे. क्रिकेट जर्नलिस्ट पीटर डेला पेना के मुताबिक इस तरह आउट होने से पहले वह आठ बार नॉन-स्ट्राइकर एंड पर क्रीज़ छोड़ चुके थे. पीटर ने ही इस बात के सबूत भी साझा किए कि यह जानबूझकर, शतक की बेताबी में किया गया था.
क्योंकि अपनी पारी के ज्यादातर वक्त शनाका क्रीज़ के अंदर ही रहे थे. और इसके बाद रोहित 'इस तरह' विकेट नहीं लेना कहकर इस पूरे तरीके को ही खराब बता रहे हैं. ऐसा क्यों भई? कानूनी तौर पर वैध तरीके से विकेट लेने में क्या बुराई है? विकेट लेने का कौन सा तरीका सही है, ये नियम बनाने वाले तय करेंगे या रोहित जी?
और इन सबके बाद, क्या रोहित को नहीं पता कि क्रिकेट एक कंपटिटिव गेम है. इसमें सामने वाले प्लेयर को किसी तरह की छूट नहीं दी जाती. फिर ये भाईचारा क्यों?
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