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हिमाचल चुनाव: बड़ा अनोखा है इस कांग्रेसी बाप-बेटे की उम्र का गणित

बाप जहां सबसे बुजुर्ग उम्मीदवार है, वहीं बेटा है सबसे जवान कैंडिडेट.

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पिता वीरभद्र सिंह के साथ विक्रमादित्य सिंह.
चुनाव में कई रेकॉर्ड चर्चा में रहते हैं. सबसे ज्यादा वोट से कौन जीता. सबसे कम से कौन. ये दो बक्से हर बार भरे जाते हैं. मगर जीत-हार के लिए चुनाव नतीजों का इंतजार करना होगा. उससे पहले का रेकॉर्ड क्या होगा? ये ही कि चुनाव में सबसे उम्रदराज कैंडिडेट कौन है और सबसे यंग कौन. हिमाचल प्रदेश चुनाव में पर्चा वापसी की तारीख निकल चुकी है. और अब इस खांचे के नाम आ गए हैं. और इस बार जो नाम आए हैं, उन्होंने एक अनोखा रेकॉर्ड बनाया है. इस चुनाव में सबसे उम्रदराज कैंडिडेट जो हैं, उनके बेटे राज्य के सबसे यंग कैंडिडेट हैं. उम्रदराज कैंडिडेट हैं छह बार सूबे के सीएम रहे वीरभद्र सिंह. और उनके बेटे हैं विक्रमादित्य सिंह. दोनों कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं.
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विक्रमादित्य और उनकी मां प्रतिभा सिंह पर वीरभद्र सिंह की राजनीति को प्रभावित करने के आरोप भी लगते हैं (फोटो: ट्विटर)

पिता वीरभद्र हैं 83 साल के, बेटा विक्रमादित्य 28 का वीरभद्र की उम्र है 83 साल. दो बार से पांच-पांच साल की बारी उनके साथ बदल रहे भाजपा के प्रेम कुमार धूमल भी 73 के हैं. मगर वीरभद्र इस कतार में सबसे आगे खड़े हैं. और सबसे यंग की लिस्ट में सबसे आगे हैं उनके बेटे विक्रमादित्य. विक्रमादित्य वीरभद्र की दूसरी पत्नी प्रतिभा कुमारी के बेटे हैं. वे यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं और अपने पापा की सीट शिमला रूरल से चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी उम्र है 28 साल. जब वीरभद्र पहली बार शिमला से सांसद बने थे, तब उनकी उम्र भी 28 साल ही थी. साल था 1962. 1962 से 1983 तक वीरभद्र ने दिल्ली की राजनीति की. पहले महासु (शिमला) से सांसद रहे, फिर लगातार मंडी से. उसके बाद ठाकुर रामलाल की जगह सीएम बनकर शिमला लौटे. विधायकी के लिए भी शिमला की जुब्बल कोटखाई सीट चुनी. ये सीट रामलाल के इस्तीफे से खाली हुई थी. कांग्रेस ने उन्हें गवर्नर बनाकर आंध्र प्रदेश भेज दिया था.
जब विक्रमादित्य के चुनाव लड़ने का ऐलान हुआ, तब न केवल वीरभद्र सिंह, बल्कि कांग्रेस की भी आलोचना हुई. इसे कांग्रेस के अंदर पैठ बना चुके परिवारवाद का एक और अध्याय बताया गया.
जब विक्रमादित्य के चुनाव लड़ने का ऐलान हुआ, तब न केवल वीरभद्र सिंह, बल्कि कांग्रेस की भी आलोचना हुई. इसे कांग्रेस के अंदर पैठ बना चुके परिवारवाद का एक और अध्याय बताया गया.

बेटे की जीत में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते वीरभद्र अब वीरभद्र अपने बेटे को सेफ सीट दे रहे हैं. अपनी शिमला रूरल सीट, जहां से वो पिछली मर्तबा 20 हजार से ज्यादा के अंतर से जीते थे. पहाड़ में इलेक्टोरल कॉलेज का साइज देखें, तो यह बड़ी जीत है. अपनी जीत के लिए वीरभद्र ने शिमला के पड़ोसी जिले, सोलन की अर्की सीट का रुख किया है. यहां पिछली बार बीजेपी जीती थी. इस बार पार्टी ने सिटिंग विधायक की जगह एक नए चेहरे रत्नपाल सिंह पर दांव लगाया है.
सबसे बुजुर्ग और सबसे जवान, दोनों उम्मीदवार एक ही परिवार से ये पूरे देश में इकलौता ऐसा मामला होगा, जब सबसे बुजुर्ग और सबसे युवा कैंडिडेट एक ही परिवार का हो और वो भी बाप बेटा. कुछ लोग पूछते हैं कि उम्र में इतना अंतर कैसे. उनकी जानकारी के लिए ये बात. वीरभद्र की पहली शादी जुब्बल की राजकुमारी रतन कुमारी संग हुई थी. दोनों की चार बेटियां हुईं. साल 1983 में रतन कुमार का निधन हो गया.
चुनाव की कवरेज के लिए हिमाचल प्रदेश गए लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी लोगों से बात करते हुए.
चुनावी कवरेज पर हिमाचल प्रदेश गए लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी जनता के मिजाज का जायजा लेते हुए.

वीरभद्र की दूसरी शादी से हुए विक्रमादित्य इसके दो साल बाद वीरभद्र ने क्योंथल (जुंगा) रियासत की राजकुमारी प्रतिभा सिंह से शादी की. दोनों की उम्र में 23 साल का फर्क है. वीरभद्र और प्रतिभा के दो बच्चे हुए. बेटी अपराजिता और बेटा विक्रमादित्य. अपराजिता की शादी पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पोते अंगद सिंह से हुई. इन दिनों वो विक्रमादित्य का प्रचार देख रही हैं .उधर प्रतिभा अर्की में वीरभद्र के लिए वोट मांग रही हैं. अब पब्लिक को तय करना है हिमाचल की. क्या नए बक्से में भी ये दोनों नाम होंगे? बक्सा, राज्य के सबसे उम्रदराज और सबसे युवा विधायक का. पता चलेगा 18 दिसंबर को.


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