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गरीबी-नस्लवाद झेला, कोलंबिया से मेक्सिको आए, जूलियन क्विनोनेस देश के हीरो कैसे बने?

Julian Quiñones का जन्म कोलंबिया में हुआ था. 2023 में जूलियन क्विनोनेस ने मेक्सिकन नागरिकता ले ली. उन्होंने कोलंबिया की बजाय मेक्सिको के लिए खेलने का फैसला किया. इस वर्ल्ड कप मेक्सिको के 8 गोल्स में से 4 क्विनोनेस की वजह से हुए हैं.

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क्विनोनेस के बचपन के कोच सेसर वालेंसिया कहते हैं कि नंगे पैर खेलने से उनके टखनों की मजबूती बहुत बढ़ गई. इससे उन्हें बैलेंस और पावर मिला. (फोटो- FIFA)

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  • जून 2026 में मेक्सिको के FIFA World Cup मैच में जूलियन क्विनोनेस ने मेक्सिको के लिए पहला गोल किया और टीम ने 40 साल बाद नॉकआउट्स में प्रवेश किया।
  • क्विनोनेस को 2024 में मेक्सिको में नस्लीय गालियों और भेदभाव का सामना करना पड़ा, जबकि वे सऊदी अरब लीग में खेलने के बाद मेक्सिको लौटे थे।
  • क्विनोनेस के प्रभाव से मेक्सिको की फुटबॉल टीम ने विश्व कप में बेहतर प्रदर्शन किया और आने वाले मैचों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

मेक्सिको की कैपिटल मेक्सिको सिटी में बना एस्टेडियो एजटेका स्टेडियम. 1 जुलाई को यहां FIFA World Cup में मेक्सिको की फुटबॉल टीम 40 साल का सूखा खत्म करने उतरी थी. सूखा नॉकआउट्स में पहुंचने का. टीम ये करने में कामयाब भी हुई. मैच जीतने के बाद सभी प्लेयर्स एक खिलाड़ी को हवा में उछाल कर जश्न मना रहे थे. इस प्लेयर का नाम है जूलियन क्विनोनेस (Julian Quiñones). एक वक्त सऊदी लीग में होने के कारण इस बंदे पर संदेह किया गया और नजरअंदाज किया गया. जानेंगे कि क्विनोनेस की कहानी, जिन्हें एक वक्त नस्लीय गालियां दी गईं, और आज वो मेक्सिको के 8 गोल्स में से 4 में अपना योगदान दे चुके हैं.

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मार्च 2024. ग्वाडलाहारा में क्लब अमेरिका एल क्लासिको नेशनल मैच जीत रहा था. उनके स्टार खिलाड़ी जूलियन क्विनोनेस ने गोल किया. गोल करने के बाद वो साइडलाइन की तरफ बढ़े. तभी स्टैंड्स से उनको एक गंदी नस्लीय गाली दी गई. “पुतो नेग्रो!” (काला कमीना!). कुछ ही देर बाद, स्टैंड्स से बंदरों जैसी आवाजें आने लगीं.

ये दृश्य मेक्सिकन फुटबॉल में नया नहीं था. मोबाइल फोन से वीडियो बन गए. अगले दिन कमेंटेटर्स ने इस पर चर्चा की. अधिकारियों ने निंदा की. जांच की बात हुई. कुछ दिनों तक मेक्सिकन फुटबॉल में शॉक और आक्रोश रहा.

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लेकिन कुछ दिन बाद मामला जस का तस हो गया, जैसे कुछ हुआ ही नहीं. सीजन चलता रहा. अगला मैच आया. ट्रांसफर की खबरें फैली. रेफरी विवाद सामने आया. उसी साल जून में क्विनोनेस सऊदी अरब की टीम अल-कादसिया में चले गए, जहां वो लीग के टॉप स्कोरर बन गए. लेकिन ये घटना फुटबॉल की रोजमर्रा की खबरों में कहीं खो गई.

पर क्विनोनेस की कहानी यहां खत्म नहीं हुई. ये तो कहानी की शुरुआत थी. इस खिलाड़ी ने लीग में 33 गोल मारे. सभी को इम्प्रेस कर दिया. मेक्सिको की टीम में वापस आया.

करीब दो साल बीते. जून 2026. मेक्सिको में FIFA World Cup का मैच. 40 साल बाद मेक्सिको की धरती पर वर्ल्ड हो रहा है. 11 जून को क्विनोनेस ने मेक्सिको की तरफ से पहला गोल किया. स्टेडियम में हजारों लोग खड़े हो गए. टीवी कमेंटेटर्स उनका नाम चिल्ला रहे थे. सोशल मीडिया पर मेक्सिकन झंडे में लिपटे क्विनोनेस की तस्वीरें वायरल होने लगीं.

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जिने लोगों ने कुछ साल पहले उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया था, वही अब उन्हें नेशनल हीरो बताने लगे. 19 जून को क्विनोनेस उसी ग्वाडलाहारा स्टेडियम वापस लौटे. टीम को साउथ कोरिया से ग्रुप मैच खेलना था. इसी स्टेडियम में 2024 में उन पर नस्लभेदी टिप्पणियां की गई थीं. मैच से पहले, टीम के होटल के बाहर हजारों फैन्स मेक्सिको की जर्सी और बड़े-बड़े सोंब्रेरो पहने इकट्ठा हुए. जैसे ही क्विनोनेस दिखे, पूरा क्राउड एक सुर में चिल्लाया, “क्विनोनेस, हर्मानो, या एरेस मेक्सिकानो!” माने, “क्विनोनेस भाई, अब तुम मेक्सिकन हो गए!”

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11 जून को क्विनोनेस ने मेक्सिको की तरफ से पहला गोल किया.

लेकिन क्विनोनेस के लिए मेक्सिकन होने का सफर इतना आसान नहीं था. उन्हें कोलंबिया से मैक्सिको तक का सफर तय करना पड़ा था.

बचपन की कहानी

जूलियन क्विनोनेस का जन्म कोलंबिया में हुआ था. उनके माता-पिता अफ्रो-कोलंबियन (अफ्रीकी मूल के कोलंबियाई) हैं. वो मागुई पायान नाम के छोटे से गांव में बड़े हुए, जो दक्षिण कोलंबिया के टेलेम्बी ट्रायंगल इलाके में है. ये इलाका हिंसा और संघर्ष के लिए बदनाम रहा है. जब जूलियन छोटे थे, उनके पिता परिवार छोड़कर चले गए. मां स्टोर में काम करती थीं, लेकिन घर चलाने के लिए पैसे कम पड़ते थे. फुटबॉल के जूते खरीदने की भी हैसियत नहीं थी. इसलिए जूलियन ज्यादातर नंगे पैर फुटबॉल खेलते थे.

उनके बचपन के कोच सेसर वालेंसिया कहते हैं कि नंगे पैर खेलने से उनके टखनों की मजबूती बहुत बढ़ गई. इससे उन्हें बैलेंस और पावर मिला.

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जूलियन क्विनोनेस का जन्म कोलंबिया में हुआ था.

एक बार एक सशस्त्र विद्रोही दल ने उन्हें जबरन अपने साथ शामिल होने के लिए मजबूर करने की कोशिश की. लेकिन फुटबॉल ने उन्हें इससे बचा लिया. फुटबॉल क्विनोनेस के लिए बचपन का सहारा था. 2014 में उन्होंने पाज़ एकेडमी के ट्रायल दिए और पास हो गए. 2016 में मेक्सिकन क्लब Tigres UANL ने उन्हें देखा और मेक्सिको ले आए. वहां उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया.

मेक्सिको कब आए?

2023 में जूलियन क्विनोनेस ने मेक्सिकन नागरिकता ले ली. उन्होंने कोलंबिया की बजाय मेक्सिको के लिए खेलने का फैसला किया. मेक्सिको में उन्होंने Tigres और Club América जैसी बड़ी टीमों में खेला. सऊदी लीग में Al Qadsiah के लिए खेलते हुए उन्होंने पिछले सीजन में 33 गोल किए. क्रिस्टियानो रोनाल्डो और इवान टोनी जैसे बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर गोल्डन बूट जीता. लेकिन सफेद रंग की त्वचा वाले देश में काली त्वचा के साथ रहना आसान नहीं था. उन्हें नस्लवाद का सामना करना पड़ा. कभी-कभी वो ये सब चुपचाप सह लेते. सोशल मीडिया बंद कर देते. लेकिन उन्होंने मेक्सिको के प्रति अपनी वफादारी कभी नहीं छोड़ी.

जेवियर एल वास्को एगुइरे जब मेक्सिको टीम के कोच बने, तो उन्होंने क्विनोनेस को टीम में बुलाया. जूलियन ने बिना सोचे समझे हां कह दी.

वर्ल्ड कप 2026 में कमाल

वर्ल्ड कप 2026 में क्विनोनेस ने मेक्सिको के लिए अब तक कमाल की फुटबॉल खेली है. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टूर्नामेंट का पहला गोल किया. फिर राउंड ऑफ 32 में 1 जुलाई को इक्वाडोर के खिलाफ शानदार गोल दागा.

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वर्ल्ड कप 2026 में क्विनोनेस ने मेक्सिको के लिए अब तक कमाल की फुटबॉल खेली है.

इसके बाद दूसरे गोल में भी शानदार असिस्ट किया. पहले गोल के दस मिनट बाद उन्होंने दूसरा गोल सेट किया. राउल हिमेनेज को पास दिया और हिमेनेज ने गोल कर दिया.

29 साल के कोलंबिया में जन्मे इस खिलाड़ी ने मेक्सिको के सपनों को नई उड़ान दी है. वो सिर्फ गोल नहीं करते, बल्कि टीम के लिए लड़ते हैं, एनर्जी देते हैं. दक्षिण अफ्रीका मैच के बाद उन्होंने कहा था,

“गोल तो सेकेंडरी हैं, बॉल जीतना सबसे जरूरी है.”

क्विनोनेस के बचपन के कोच सेसर वालेंसिया कहते हैं,

“जहां से वो आए हैं और जहां पहुंचे हैं, ये आसान नहीं था. बहुत सारी मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने हमेशा सिर ऊंचा रखा और 120% दिया.”

क्विनोनेस के साथी उन्हें “पैंथर” कहते हैं, क्योंकि वो मैदान पर तेज और शातिर हैं. कोच उन्हें “शेर” कहते हैं, क्योंकि वो गोल की तरफ हमला करते हैं. एजटेका में उन्होंने गोल करने के बाद सचमुच शेर की तरह दहाड़ मारी.

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क्विनोनेस के साथी उन्हें “पैंथर” कहते हैं, क्योंकि वो मैदान पर तेज और शातिर हैं. 

क्विनोनेस की कहानी इस वर्ल्ड कप की कई शानदारी कहानियों में से एक है. गरीबी, परिवार टूटना, नस्लवाद, Guerrilla का खतरा. सब कुछ झेलकर भी उन्होंने फुटबॉल को नहीं छोड़ा. मेक्सिको ने उन्हें नया घर दिया. उन्होंने मेक्सिको को अपना देश बना लिया. जब वो गोल करते हैं तो जर्सी का बैज चूमते हैं. वे कहते हैं,

“अपने देश का प्रतिनिधित्व करना सबसे महत्वपूर्ण है. मैं ट्रेनिंग में अपना 100 परसेंट देता हूं.”

मेक्सिको की टीम लंबे समय से वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए तरस रही थी. क्विनोनेस जैसे खिलाड़ी अब उस सपने को हकीकत बनाने में मदद कर रहे हैं. वो सिर्फ एक फुटबॉलर नहीं, बल्कि लाखों गरीब बच्चों के लिए इंस्पिरेशन हैं. जो बच्चा कभी नंगे पैर फुटबॉल खेलता था, आज वर्ल्ड कप के बड़े स्टेज पर मेक्सिको को जीत दिला रहा है. क्विनोनेस अब मेक्सिको के नए हीरो हैं.

वीडियो: कौन हैं राउल हिमेनेज, जिनके हेडर से साउथ अफ्रीका के खिलाफ मेक्सिको जीता?

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