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IPL का यही हाल रहा तो बुमराह-शमी के बाद टीम इंडिया को बॉलर्स नहीं मिलेंगे

265 रनों का टारगेट आसान नहीं होता है. लेकिन IPL में जिस तरह का गेम देखने को मिल रहा है, यहां कुछ भी पॉसिबल है. किसी भी मैच में 20-22 की इकोनॉमी से रन खाने पर बॉलर की साइकोलॉजी पर जो असर पड़ता है, उसके बारे में शायद कोई सोच नहीं सकता.

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20 ओवर के गेम में अगर 265 का स्कोर 7 बॉल रहते चेज हो जा रहा है, तो इसमें शायद बॉलर्स की कम ही गलती है. (फोटो- PTI)

2008 में जब IPL लॉन्च हुआ था, तो ब्रॉडकास्टर्स ने फैन्स को चौकों और छक्कों की बरसात दिखाने का सपना दिखाया था. और ऐसा हुआ भी. पहले ही मैच में KKR के ब्रैंडन मैकुलम ने 158 रनों की पारी खेलकर टीज़र भी दे दिया. 19वां सीजन आते-आते छक्के-चौके इतने पड़ने लगे कि ये टूर्नामेंट बैटर्स डॉमिनेटेड हो गया. यहां बॉलर्स के लिए ज्यादा कुछ बचा नहीं है. अब तो फैन्स भी IPL को बोरिंग बताने लगे हैं. 25 अप्रैल को पंजाब और दिल्ली के बीच खेला गया मैच देखने के बाद तो ये बात साफ भी हो गई है.

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265 भी चेज हुए

मैच में पहले बैटिंग करते हुए दिल्ली कैपिटल्स (DC) की टीम ने 2 विकेट खोकर 264 रन बोर्ड पर लगा दिए. केएल राहुल ने नॉट आउट 152 रनों की पारी खेली. 226 से भी ज्यादा के स्ट्राइक रेट से बैटिंग की. 16 चौके और 9 छक्के लगाए. नीतीश राणा ने भी 44 बॉल्स में 91 रन बनाए.

पंजाब का कोई भी बॉलर 11 की इकोनॉमी के नीचे से बॉलिंग नहीं कर पाया. जेवियर बार्टलेट ने तो 4 ओवर में 69 रन लुटा दिए. विजयकुमार वैशाक ने तो तीन ओवरों में 48 रन दे दिए.

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265 रनों का टारगेट आसान नहीं होता है. लेकिन IPL में जिस तरह का गेम देखने को मिल रहा है, यहां कुछ भी पॉसिबल है. पंजाब के ओपनर्स प्रियांश आर्या और प्रभसिमरन सिंह ने पहले 6 ओवरों में 116 रन बना डाले.

आकिब नबी का क्या होगा?

रणजी ट्रॉफी में पिछले दो सीजन से लगातार शानदार बॉलिंग करने वाले आकिब नबी तक का हाल बेहाल हो गया. इस सीजन से पहले आकिब का काफी बज़ था. पर वो सीजन से पहले तक ही था. इस टूर्नामेंट में आकर वो खुद सोच रहे होंगे कि उन्हें खेलने नहीं आना चाहिए था. उनके पहले दो ओवरों की पहली ही बॉल पर प्रियांश और प्रभसिमरन ने छक्के से उनका स्वागत किया. 2 ओवरों में आकिब को 41 रन पड़े. और वो विकेटलेस रहे.

पहले ओवर में आकिब को दो छक्के पड़े. दूसरे ओवर में वो 4 सिक्स खा गए. डोमेस्टिक क्रिकेट में शायद ही उनके साथ कभी ऐसा हुआ होगा.

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कुछ ऐसा ही हाल मुकेश कुमार का भी रहा. इंडियन डोमेस्टिक में मुकेश ने भी लगातार परफॉर्म किया है. मैच में पहले दो ओवरों में उन्हें 45 रन पड़े. दूसरे ओवर में उन्होंने 24 रन्स कंसीड किए.

बॉलर के कॉन्फिडेंस की बैंड बजी

किसी भी मैच में 20-22 की इकोनॉमी से रन खाने पर बॉलर की साइकोलॉजी पर जो असर पड़ता है, उसके बारे में शायद कोई सोच नहीं सकता. बॉलर का कॉन्फिडेंस जाता है. लाइन-लेंथ पकड़ना मुश्किल हो सकता है. और तो और, टीम मैनेजमेंट भी उनकी पोजीशन पर सवाल उठाने लगता है.

इस मैच के बाद आकिब नबी अगर आपको दिल्ली कैपिटल्स की टीम में इस सीजन खेलते न दिखें, तो इसमें उनकी कम ही गलती होगी. इस बारे में BCCI और IPL कराने वालों को सोचना होगा. 20 ओवर के गेम में अगर 265 का स्कोर 7 बॉल रहते चेज हो जा रहा है, तो इसमें शायद बॉलर्स की कम ही गलती है. लगातार बैटर्स पैराडाइज पर मैच कराने को लेकर विचार करना होगा. वरना इस देश में बुमराह और शमी के बाद कोई बॉलर नहीं बनना चाहेगा.

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