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तारीख: कहानी साउथ एशिया के सबसे बड़े कव्वाल 'अज़ीज मियां' की जो जिया-उल-हक से भी नहीं डरा

ज़िया-उल-हक़ के शासनकाल में सत्ता के साथ अज़ीज मियां का टकराव बना रहा. उन्होंने सूफ़ी विचारों को आस्था और जीवन से जुड़े साहसी सवालों के साथ पिरोया था.

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'तारीख़' के इस एपिसोड में कहानी एक ऐसे क़व्वाल जिन्होंने अपनी बेबाक और दो-टूक शैली से इस विधा को पूरी तरह बदल दिया. 1970 के दशक में लाहौर की दरगाहों से उभरकर, उन्हें 'मैं शराबी' गीत से ज़बरदस्त शोहरत मिली; इस गीत में उन्होंने सूफ़ी विचारों को आस्था और जीवन से जुड़े साहसी सवालों के साथ पिरोया था. यह कहानी सबरी ब्रदर्स के साथ उनकी प्रतिद्वंद्विता, ज़िया-उल-हक़ के शासनकाल में सत्ता के साथ उनके टकराव, और नुसरत फ़तेह अली ख़ान के उदय के साथ क़व्वाली के बदलते स्वरूप को समेटे हुए है. यह महज़ संगीत की कहानी नहीं, बल्कि विद्रोह, समर्पण और आत्म-विनाश की एक गाथा है . एक ऐसे शख़्स की कहानी जिसने रूढ़ियों को चुनौती दी और अपनी कला के माध्यम से ईश्वर से भी तर्क-वितर्क किया. ये शख्स थे अज़ीज मियां. क्या है उनकी कहानी, जानने के लिए देखें वीडियो.

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