The Lallantop

9 साल की उम्र में पिता को खोया, अब एशियन चैंपियन बनकर ओलंपिक का सपना सजा रहा ये पहलवान

पहलवान Abhimanyu Mandwal ने हाल ही में किर्गि‍स्तान में हुए Asian Wrestling Championship में गोल्ड मेडल जीता. हालांकि, उनकी जर्नी इतनी आसान नहीं रही है. महज 9 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया था.

Advertisement
post-main-image
अभ‍िमन्यु मंडवाल ने एशि‍यन रेसलिंग चैंपियनश‍िप में गोल्ड मेडल जीता है. (फोटो-PTI)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • अभिमन्यु मंडवाल ने 2026 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में 70 किलो वेट कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीतकर अपने पहलवानी करियर में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
  • अभिमन्यु का परिवार पहलवानी में सक्रिय रहा है लेकिन पिता के करंट लगने से निधन और संसाधनों की कमी ने उनके शुरुआती संघर्ष को बढ़ाया।
  • अब अभिमन्यु 74 किलो कैटेगरी में उतरने की तैयारी कर रहे हैं ताकि वे एशियन गेम्स और ओलंपिक में हिस्सा ले सकें और उनके परिवार का ओलंपिक मेडल का सपना पूरा हो सके।

डबल ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार (Sushil Kumar) का नाम तो आपने सुना ही होगा. योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt), रवि दहिया (Ravi Dahiya) के नाम भी सुने होंगे. इन सभी दिग्गज पहलवानों में एक चीज कॉमन है. दिल्ली का छत्रसाल अखाड़ा. अब इसी अखाड़े से एक और ऐसा नाम निकल कर आया है, जो आने वाले समय में ओलंपिक के मंच पर हिंदुस्तान का झंडा गाड़ने की तैयारी कर रहा है. नाम है अभिमन्यु मंडवाल (Abhimanyu Mandwal). उम्र 24 साल. हाल ही में एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इस पहलवान ने बता दिया है कि वो लंबी रेस का घोड़ा है.

Advertisement
वर्ल्ड नंबर-1 को दी पटखनी

अभिमन्यु ने 70 किलो वेट कैटेगरी में ऐसा दांव मारा कि बड़े-बड़े पहलवान चित्त हो गए. अपने इस गोल्ड मेडल के सफर में उन्होंने किर्गिस्तान के वर्ल्ड नंबर-1 एर्नाजार अकमातालिव और मंगोलिया के वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट तुल्गा तुमुर ओचिर को धूल चटाई. लेकिन, इस सोने के तमगे की चमक के पीछे पसीने के साथ-साथ आंसुओं और संघर्ष की भी एक लंबी कहानी है.

वो हादसा, जिसने बचपन छीन लिया

कहानी शुरू होती है एक रेसलिंग फैमिली से. दादा का सपना था कि घर से कोई ओलंपिक खेले. पिता महेंद्र सिंह और चाचा राजेश कुमार पहलवान तो बने, लेकिन संसाधनों की कमी के चलते स्टेट लेवल से आगे नहीं जा पाए. जब अभिमन्यु 6 साल के थे, तभी पिता और चाचा ने उन्हें पहलवानी के गुर सिखाने शुरू कर दिए.

Advertisement

सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन 2011 में एक मनहूस दिन आया. घर में करंट लगने से पिता महेंद्र सिंह का देहांत हो गया. एक झटके में 9 साल के बच्चे के सिर से बाप और गुरु, दोनों का साया उठ गया.

चाचा राजेश ने भतीजे का हौसला नहीं टूटने दिया. 2012 में 10 साल के अभिमन्यु को दिल्ली के मशहूर छत्रसाल अखाड़े भेज दिया गया. ये वो दौर था जब सुशील और योगेश्वर लंदन ओलंपिक से मेडल जीतकर लौटे थे और अखाड़े में जश्न का माहौल था.

ये भी पढ़ें : चोट कंधे में तो कन्कशन सब्स्टीट्यूट कैसे? MI के कोच को देनी पड़ गई सफाई

Advertisement

अभिमन्यु ने द इंडियन एक्सप्रेस के साथ हुई बातचीत में बताया,

शुरू में तो घर की बहुत याद आती थी. नियम इतने सख्त थे कि मुझे तो अखाड़ा एक छोटी सी जेल लगता था. लेकिन घर से सख्त हिदायत थी- सिर्फ ट्रेनिंग पर फोकस करो, घर के बारे में मत सोचो.

जब रूममेट बने रवि दहिया

छत्रसाल की इसी जेल में अभिमन्यु के रूममेट बने एक ऐसे सीनियर, जिन्हें दुनिया आज टोक्यो ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट रवि दहिया के नाम से जानती है. दोनों अक्सर ओलंपिक के सपने साझा किया करते थे. अभिमन्यु कहते हैं,

रवि भाई के फेमस होने से बहुत पहले से मैं उन्हें जानता हूं. उन्होंने शुरुआती दिनों में एक बड़े भाई की तरह मेरी मदद की. मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है. खास तौर पर हारने के बाद वापसी करने का हुनर.

चोट के बाद कैसे की वापसी?

ये पहली बार नहीं है जब अभिमन्यु एशियन चैंपियनशिप के पोडियम पर खड़े हुए हैं. 2024 में उन्होंने इसी टूर्नामेंट में ब्रॉन्ज जीता था. ये उनका पहला सीनियर मेडल था. लेकिन, फिर एंकल में चोट लग गई. चोट इतनी गंभीर थी कि 2025 का पूरा सीजन इसी को ठीक करने में निकल गया.

वापसी में प्रो रेसलिंग लीग (PWL) ने बड़ा रोल निभाया. यूपी डोमिनेटर्स की तरफ से 74 किलो में खेलकर अभिमन्यु का कॉन्फिडेंस वापस लौटा और अब 2026 में उन्होंने सीधा गोल्ड पर कब्जा जमाया है.

ओलंपिक मेडल ही है परिवार का सपना

अब अभिमन्यु की नजरें एशियन गेम्स और ओलंपिक पर हैं. चूंकि 70 किलो ओलंपिक कैटेगरी नहीं है. इसलिए वो अब अपना वजन बढ़ाकर 74 किलो कैटेगरी में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. वो बताते हैं कि ये उनका नेचुरल बॉडी वेट भी है.

खैर, घर में एशियन चैंपियनशिप का सोना तो आ गया है, लेकिन चाचा राजेश कुमार के पैर अभी भी जमीन पर हैं. जब उनसे पूछा गया कि भतीजे के इस प्रदर्शन से वो कितने खुश हैं? तो उनका जवाब एकदम सॉलिड था. उन्होंने कहा कि मेडल आया है अच्छी बात है. लेकिन, असली खुशी ओलंपिक्स मेडल की ही होगी. 

वीडियो: आईपीएल 2026 में अभी तक रियान पराग का बल्ला नहीं चला, टीम क्या गणित लगा रही?

Advertisement