मैं इन्हीं 18 गेंदों के दौरान हुई एक घटना के बारे में बात करूंगा. असल में आख़िरी ओवर की दूसरी गेंद के बारे में. इससे पहले पंजाब के कप्तान रविचंद्रन अश्विन ने एक छक्का जड़ा था. अपनी पहली गेंद पर. पंजाब को जीतने के लिए आख़िरी ओवर में 27 रन चाहिए थे. जो कि अब 21 हो चुके थे. पिछले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स सामने थी और उन्हें जीतने के लिए 26 रन चाहिए थे. चेन्नई 2 रन से मैच हारी थी. उमेश यादव उस दिन भी बॉल फ़ेंक रहे थे, इस मैच में भी वही थे. पहली गेंद पर छक्का खा चुके थे. अगली गेंद पर अश्विन ने फिर से बल्ला हौंका. गेंद सीधे खड़ी हो गई और बाउंड्री पार जाती दिख रही थी. लेकिन बाउंड्री से पहले ही उसे कैच कर लिया गया. कैच करने वाला प्लेयर था विराट कोहली. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कप्तान. उन्होंने कैच लिया.

अश्विन का कैच लेते हुए कोहली (स्क्रीनशॉट: आईपीएल टी20)
कैच लेने के बाद उन्होंने अश्विन की ओर देखा और हाथों से इशारे किये. मानो पूछ रहे हों कि अब क्या करोगे? इसके बाद उन्होंने हाथों से इशारा करते हुए उन्हें उस रन आउट की याद दिलाई जिसने अश्विन को पूरे टूर्नामेंट में खबर में रखा हुआ है. जॉस बटलर का रन आउट. कोहली ने जब ये इशारे किये तो साथ ही वो कुछ बड़बड़ा भी रहे थे. ये बताने की ज़रुरत नहीं है कि वो क्या बड़बड़ा रहे थे.
इसकी तीन गेंदों बाद ही कोहली से एक बेहद आसान कैच छूट गया. वो काफ़ी देर तक उसका अफ़सोस मनाते दिख रहे थे. उन्हें शुक्रगुजार होना चाहिए कि वहां उन्हें गाली बकने के लिए और हाथों से इशारे करते हुए किसी ने ये नहीं पूछा कि अब क्या करोगे?
विराट कोहली ने रेगुलर इंटरवल पर कुछ न कुछ ऐसा किया है कि अप उनकी दिमागी हालत पर शक करने लगें. इस बात पर विश्वास होने लेग कि नसीरुद्दीन शाह ने उनके बारे में सही ही कहा था. कोहली के बारे में नसीरुद्दीन शाह ने कहा था कि वो कोहली के खेल को पसंद करते हैं लेकिन उन्हें मैदान पर सही तरीके से पेश आने की ज़रुरत है.
विराट कोहली इस वक़्त यकीनन दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज़ हैं लेकिन हदों को लांघना उनकी आदत में है. बैटिंग करते वक़्त जब वो लिमिट्स क्रॉस करते हुए शानदार शॉट्स लगाते हैं तो तालियां पीटने का मन करता है. लेकिन अपने घटिया बिहेवियर से जब वो ऐसा करते हैं तो खुद के माथा पीटने को जी चाहता है. समझ में नहीं आता है कि किस लिहाज़ से इस तरह की अनुशासनहीनता और बहुत हद तक अपने अहंकार में चूर खिलाड़ी को दुनिया का सबसे अच्छा बैट्समैन कहा जाए. क्यूंकि उस ओहदे पर सचिन, लारा, स्टीव वॉ, गावस्कर, सोबर्स, क्लाइव लॉइड जैसे खिलाड़ी रह चुके हैं. कोहली को कुछ नहीं तो अपने बैंगलोर के टीम-मेट डिविलियर्स से सीखना चाहिए. अपने पूरे करियर में कभी भी उन्होंने इस घटिया तरह से बिहेव नहीं किया है. जबकि बैटिंग के मामले में वो कोहली जितने ही अग्रेसिव हैं और फ़ील्डिंग में तो उनसे भी कई गुना अग्रेसिव रहे हैं.

अग्रेसिव कोहली (स्क्रीनशॉट: आईपीएल टी20)
कोहली को अश्विन की ओर ऐसे इशारे करने और गालियां बकने से पहले इतना ही लिहाज़ कर लेना चाहिए था कि सामने जो कप्तान है उसने उनसे ज़्यादा मैच जीते हुए थे. लेकिन ऐसा अब तक तो कभी भी नहीं लगा है कि कोहली मैदान पर अपने बिहेवियर में इतना दिमाग लगाते हैं. वो एक ऐसे इंसान की तरह से पेश आते हैं जो कि एवोल्यूशन के टाइम पानी पीने चला गया था. और पर्सनली बोलूं तो ऐसा लगता भी नहीं है कि वो अब इसे बेहतर कर सकेंगे. क्यूंकि वो काफ़ी सीनियर प्लेयर हो चुके हैं और अब ये उनकी आदत में शुमार है. इसलिए कम से कम मैं तो उनसे कोई ख़ास अपेक्षा नहीं ही रखता हूं. वो कितने भी शानदार खिलाड़ी होंगे, उनकी ये हरकतें उन्हें महान खिलाड़ी बनने से रोकती रहेंगी. टिम पेन ने ऑस्ट्रेलिया के टूर पर विकेट्स के पीछे से कहा था- कोहली शानदार बैट्समैन हो सकते हैं लेकिन एक इंसान के तौर पर वो काफ़ी दोयम इंसान हैं. वैसे कोहली को दिल्ली का काम्बली भी कहा जा सकता है जो काम्बली जितना बदकिस्मत नहीं निकला.
वाकये का वीडियो देखिए.
वीडियो- IPL 2019 में अभी तक चार बार हो गया कि गेंद स्टंप्स पर लगी मगर बेल्स नहीं गिरीं














