टीम इंडिया इन दिनों श्रीलंका में है. 15 अगस्त से टीम को 2 मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है. टीम 9 साल बाद श्रीलंका का रेड बॉल क्रिकेट दौरा कर रही है. पिछली बार जब भारतीय टीम श्रीलंका रेड बॉल क्रिकेट में खेलने गई थी, तब क्लीन स्वीप करके आई थी. इस बार भी टीम को ऐसे ही प्रदर्शन की जरूरत है. लेकिन, ये इस यंग ब्रिगेड के लिए पहाड़ चढ़ने वाला काम होने वाला है.
श्रीलंका में स्पिन का ‘मायाजाल’, टीम इंडिया तोड़ पाएगी जयसूर्या का चक्रव्यूह?
Ind vs SL : टीम इंडिया को 15 अगस्त से 2 मैचों की टेस्ट सीरीज श्रीलंका में खेलनी है. Shubman Gill की अगुवाई वाली टीम पिछले कुछ समय से स्पिन के खिलाफ स्ट्रगल करती नज़र आई है. गॉल और कोलंबो में स्पिनर्स को मदद मिलेगी. साथ ही Prabhat Jayasuriya का घरेलू रिकॉर्ड, ये सीरीज इतनी आसान नहीं होने वाली है.

टीम इंडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती है श्रीलंका की घुमावदार पिचें. यहां गेंद कब टर्न होकर गिल्लियां उड़ा देगी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल होता है. गॉल और कोलंबो के स्पिन फ्रेंडली ट्रैक पर इंडियन बैटर्स का असली इम्तिहान होना है. इस यंग ब्रिगेड का सबकॉन्टिनेंट में स्पिन खेलने का पुराना दबदबा नहीं रहा. पिछले कुछ सालों के आंकड़े गवाही देते हैं कि टर्निंग ट्रैक्स पर टीम इंडिया ताश के पत्तों की तरह बिखरी है. ऐसे में श्रीलंका का यह दौरा किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है.
टर्निंग ट्रैक्स पर बेबस टीम इंडियाक्रिकेट के गलियारों में हमेशा कहा जाता था कि इंडियन बैटर्स स्पिन को सबसे बेहतर खेलते हैं. लेकिन, पिछले दो सालों में घर की टर्निंग पिचों पर भी टीम का प्रदर्शन चिंताजनक रहा है. पहले न्यूजीलैंड, फिर साउथ अफ्रीका के खिलाफ टीम इंडिया को क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा.
इसकी तीन प्रमुख वजह हैं. पहला इंडियन बैटर्स के फुटवर्क में कमी. दूसरी प्रॉब्लम है, स्वीप और रिवर्स स्वीप का कम यूज. एशियाई पिचों पर स्पिन को कंट्रोल करने के लिए ये सबसे कारगर होता है. लेकिन, मौजूदा टीम में बहुत कम प्लेयर्स इसका इस्तेमाल करते हैं. तीसरी समस्या है टर्न होती गेंदों पर फॉरवर्ड डिफेंस करते समय बैट का एज लगना. हाल के दिनों में इंडियन बैटर्स स्लिप कॉर्डन में इसी अंदाज में काफी बार आउट होते दिखे हैं.
गॉल और कोलंबो का स्पिन फ्रेंडली ट्रैकश्रीलंका के दो सबसे ऐतिहासिक मैदान गॉल और कोलंबो पूरी दुनिया में अपने स्पिन-फ्रेंडली मिजाज के लिए जाने जाते हैं. गॉल स्टेडियम समुद्र के किनारे स्थित है. इसके कारण इस मैदान पर पहले दिन से ही पिच दरकने लगती है. चौथे-पांचवें दिन रफ पैचेज से गेंद इतना टर्न लेती है कि खेलना बहुत मुश्किल हो जाता है. वहीं, कोलंबो की लाल-काली मिट्टी की पिच पर दूसरे-तीसरे दिन से अनइवन बाउंस होने लगता है. बॉल तेजी से स्पिन तो होती ही है. कभी-कभी काफी नीची भी रह जाती है. इन दोनों ही मैदानों पर इंडियन बैटर्स को सिर्फ स्पिन ही नहीं, बल्कि अनइवन बाउंस से भी निपटना होगा.
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श्रीलंकाई टीम का घर पर सक्सेस रेट उनके स्पिनर्स के कारण ज़्यादा होता है. पहले टीम में मुथैया मुरलीधरन और रंगना हेराथ जैसे बॉलर्स थे. अब उनके पास प्रभात जयसूर्या नाम का हथियार है. बाएं हाथ के इस स्पिनर का अपनी घरेलू पिचों पर रिकॉर्ड खौफनाक है. महज 14 मुकाबलों में प्रभात ने श्रीलंका में 96 विकेट चटकाए हैं. इस दौरान 8 बार उन्होंने 5 विकेट हॉल लिया है.
जयसूर्या की सटीक लाइन-लेंथ और फ्लाइट राइट हैंड बैटर्स के लिए LBW का सबसे बड़ा जाल बुनती है. गॉल और कोलंबो में उनकी गेंदें पिच से ग्रिप होकर निकलती हैं. खासकर उनकी आर्म बॉल टर्न होने के बजाय तेजी से अंदर आती है. ये टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकती है.
क्या कर सकती है टीम इंडिया?अगर टीम इंडिया को श्रीलंका में जीत का झंडा गाड़ना है, तो अपनी स्ट्रैटजी बदलनी होगी. उन्हें स्पिनर्स को सेट नहीं होने देना होगा. कदमों का इस्तेमाल और लगातार स्ट्राइक रोटेट करना इसमें सबसे कारगर साबित हो सकता है. इससे बॉलर्स का रिदम बिगड़ता है. दूसरी सबसे जरूरी चीज है टर्निंग बॉल को डिफेंड करते समय बॉल को बॉडी के करीब खेलना. ऐसी रैंक टर्नर पिचों पर सिर्फ टॉप ऑर्डर पर निर्भर रहना खतरनाक साबित हो सकता है. ऐेसे में ऑलराउंडर्स को जिम्मेदारी उठानी होगी.
टीम इंडिया के लिए श्रीलंका का यह दौरा सिर्फ एक सीरीज नहीं है. ये स्पिन के खिलाफ खोया हुआ दबदबा वापस पाने का मौका है. टीम ने इसके लिए 4 स्पिन नेट बॉलर्स भी काम पर लगा दिए हैं. साथ ही स्पिन कोच साईराज बहुतुले से भी मदद ले रहे हैं. ऐसे में अगर टीम इंडिया ने गॉल और कोलंबो में स्पिन के इस चक्रव्यूह को भेद लिया, तो न सिर्फ सीरीज उनकी होगी. स्पिनिंग ट्रैक्स पर लास्ट दो बार मिली असफलता को भी टीम पीछे छोड़ने में सफल होगी.
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