भारतीय टीम का श्रीलंका दौरा जल्द ही शुरू होने वाला है. इस दौरे से पहले टीम ने स्पिन को लेकर अच्छी तैयारी की है. भारतीय टीम यहां अलग-अलग वैराइटी के स्पिनर्स को बतौर नेट बॉलर्स अपने साथ लाई थी. प्रैक्टिस मैच से पहले काफी अभ्यास किया लेकिन इस प्रैक्टिस मैच के बाद टीम की हालत बदली हुई नजर आई. टीम को शायद अंदाजा हो गया कि श्रीलंका में केवल स्पिन ही नहीं बल्कि रिवर्स स्विंग भी चुनौती दे सकती है. खासतौर पर भारतीय कप्तान शुभमन गिल को.
सिर्फ स्पिन नहीं, श्रीलंका में ये होगी टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती
भारतीय टीम नहीं सीरीज से पहले कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. टीम के लिए यह सीरीज काफी अहम है. अगर उन्हें वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनानी है तो यह सीरीज हर हाल में जीतनी होगी.

Revzsportz की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रैक्टिस मैच के अगले दिन ऑप्शनल ट्रेनिंग सेशन रखा गया था. मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार के अलावा सभी खिलाड़ियों ने इस सेशन में हिस्सा लिया. इस सेशन से पहले भारतीय मैनेजमेंट ने ‘नॉनडेस्ट्रिप्ट क्रिकेट क्लब’ को खास हिदायत थी कि प्रैक्टिस मैच की पिच में कोई बदलाव न हो. टीम देखना चाहती थी कि मैच के चौथे दिन पिच का मिजाज कैसा होगा? क्या गेंद यहां रिवर्स स्वीप होगी? ऐसी पिच पर खिलाड़ियों के डिफेंस को बेहतर करने की कोशिश की गई. इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण थे शुभमन गिल. बता दें कि गिल इम्पैक्ट इंजरी के कारण प्रैक्टिस मैच के पहले दो दिन एक्शन में नहीं थे. तीसरे दिन उन्होंने बल्लेबाजी करते हुए 44 रन बनाए थे.
गिल का खास अभ्यासगिल वॉर्मअप के बाद सीधे नेट्स के लिए आए. उन्होंने यहां तीनों थ्रो डाउन स्पेशलिस्ट नुवा सेनेविरत्ने, राघवेद्र द्विवेदी और दयानंद गरानी का सामना किया. इन स्पेशलिस्ट ने अलग-अलग तरह की कूकाबुरा गेंदों से अभ्यास किया. इसमें नई गेंद, सेमी-ओल्ड और एकदम पुरानी गेंद यूज की गई. सेमी-ओल्ड गेंदों से रिवर्स स्विंग ज्यादा होती है. इस कारण गिल ने उस गेंद से ज्यादा अभ्यास किया. इसके बाद उन्होंने पेसर आकिब नबी से भी उसी तरह गेंदबाजी करने को कहा.
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श्रीलंका की पिच होती है ड्रायश्रीलंका में पिच बहुत जल्दी ड्राय होती है. इससे गेंद की शाइन जल्दी खत्म हो जाती है. ऐसे गेंदों से रिवर्स स्विंग होने की संभावना ज्यादा होती है. भारतीय टीम सीरीज से पहले तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. टीम के लिए यह सीरीज काफी अहम है. अगर इंडिया को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनानी है तो यह सीरीज हर हाल में जीतनी होगी. तभी उनकी आगे की राह आसान हो पाएगी. भारत पिछली बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल नहीं खेल पाया था. भारतीय कोच गौतम गंभीर पर भी रेड फॉर्मेट प्रदर्शन को लेकर बहुत सवाल उठ रहे हैं. वह भी इस बार कोई कमी नहीं छोड़ना चाहेंगे.
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