भारतीय टीम के लिए श्रीलंका दौरा करो या मरो का दौरा है. यहां अगर टेस्ट सीरीज में भारत हारा तो उसके लिए एक बार फिर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल खेलने की सारी उम्मीदें खत्म हो जाएंगी. ऐसे में टीम हर मुमकिन कोशिश कर रही है. दो टेस्ट मैचों के लिए स्क्वाड में चार नेट बॉलर्स को शामिल किया गया है. ये चारों ही स्पिनर्स हैं.
श्रीलंका दौरे के लिए टीम इंडिया के नेट बॉलर्स में सिर्फ स्पिनर्स क्यों? वजह डराने वाली है
BCCI ने विदर्भ के हर्ष दुबे, बिहार के शिवांग कुमार, मुंबई के तनुष कोटियान और उत्तर प्रदेश के विप्रज निगम को बतौर नेटल बॉलर मौका दिया है.

BCCI ने विदर्भ के हर्ष दुबे, बिहार के शिवांग कुमार, मुंबई के तनुष कोटियान और उत्तर प्रदेश के विप्रज निगम को बतौर नेटल बॉलर मौका दिया है. श्रीलंका की स्पिन फ्रेंडली पिच को देखते हुए किसी भी पेसर को मौका नहीं मिला है. स्पिनर्स में भी कोशिश की गई है कि हर तरह के स्पिनर्स के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों को ट्रेनिंग का मौका मिले. इनमें हर्ष दुबे और शिवांग लेफ्ट आर्म स्पिनर हैं, तनुष कोटियान ऑफ स्पिनर वहीं विप्रज निगम लेग स्पिनर हैं.
श्रीलंका की पिच पर स्पिनर्स को मदद मिलती है. पिछले कुछ समय में जिस तरह भारतीय बल्लेबाज स्पिनर्स के खिलाफ संघर्ष करते दिखे हैं वह टीम के लिए चिंता का कारण था. टीम इंडिया की हार में भी स्पिनर्स का योगदान काफी ज्यादा रहा. एक समय पर भारतीय बल्लेबाजों को स्पिन स्पेशलिस्ट कहा जाता था. लेकिन अब स्थिति बदल गई है. भारत के स्टार बल्लेबाज अपने घर पर भी स्पिनर्स की फिरकी में फंस रहे हैं. आपको आंकड़ों के लिहाज से समझाते हैं.
टीम इंडिया ने जो पिछले 9 मैच खेले हैं, उनमें से पांच वह उन पिच पर हारा हैं जहां स्पिनर्स को मदद मिल रही थी. भारत यह मैच सिर्फ हारा नहीं बल्कि बुरी तरह हारा. टीम को हाल के सालों में घर पर न्यूज़ीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट में क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा. इसमें भी स्पिनर्स का रोल अहम था. न्यूजीलैंड की ओर से तीन मैचों की सीरीज में स्पिनर्स ने 70 प्रतिशत विकेट लिए. जबकि भारतीय स्पिनर्स रन लुटाते नजर आए. न्यूज़ीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विपक्षी स्पिनरों का गेंदबाजी औसत 15.5–18.8 रहा. वहीं भारतीय गेंदबाजों ने 24.3–26.5 के औसत से गेंदबाजी की.
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भारत के लिए क्यों अहम है सीरीजअब यह भी समझ लेते हैं कि BCCI इस टेस्ट के लिए इतनी प्लानिंग क्यों कर रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसी सीरीज पर यह निर्भर है कि भारत WTC 2025-27 का फाइनल खेलेगा या नहीं. अगर भारत यहां सीरीज हारता है या ड्रॉ कराता है, तो फाइनल की राह मुश्किल हो सकती है.
भारत को इस सीरीज के बाद घर पर वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है. फिर साउथ अफ्रीका में तीन टेस्ट खेलने हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी खेलनी है. साउथ अफ्रीका दौरा और बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी आसान नहीं होने वाली हैं. ऐसे में भारत के पास मौका है कि वह श्रीलंका के खिलाफ सीरीज जीतकर मजबूत स्थिति में पहुंच जाए और रेस में बना रहे.
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