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Gen Z का गोल्ड लव पुरानी जनरेशन की आंखें खोल देगा!

युवाओं की जीवनशैली में बदलाव, उनकी कमाई में इजाफा होने और वित्तीय जागरूकता बढ़ने से सोने की खरीद और निवेश के तरीके में बड़ा बदलाव आ सकता है.

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भारत दुनिया का इकलौता देश है जहां लोगों के घरों में सबसे ज्यादा सोना पड़ा है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने 'स्वर्णिम उड़ान 2047' रिपोर्ट में भारतीय युवाओं की सोने में निवेश की भूमिका और डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ जैसे नए वित्तीय विकल्पों की बढ़ती लोकप्रियता का ऐलान किया है।
  • भारत में सोने की परंपरा और घरों में जमा सोने का विशाल भंडार वित्तीय जागरूकता और युवाओं की जीवनशैली में बदलाव के चलते नए निवेश विकल्पों के लिए प्रेरित कर रहा है।
  • आने वाले वर्षों में भारत की सोने की मांग में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे घरेलू सोने को वित्तीय प्रणाली में लाने का प्रयास बढ़ेगा, लेकिन विदेशी आयात पर निर्भरता बनी रहेगी।

भारत में सोना दशकों से परंपरा और वित्तीय सुरक्षा का प्रतीक रहा है. लेकिन नई पीढ़ी के लिए अब सोना सिर्फ पारिवार की विरासत या शादी की खरीदारी से कहीं ज्यादा मायने रखता है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में सोना नई पीढ़ी के लिए एक निवेश का नया जरिया बन रहा है.

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वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने अपनी 'स्वर्णिम उड़ान 2047'  (Swarnim Udaan 2047) नाम से नई रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि आने वाले सालों में भारत के गोल्ड मार्केट को दिशा देने में नई पीढ़ी (जेनरेशन Z) की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है. 

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि युवाओं की जीवनशैली में बदलाव, उनकी कमाई में इजाफा होने और वित्तीय जागरूकता बढ़ने से सोने की खरीद और निवेश के तरीके में बड़ा बदलाव आ सकता है.

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भारतीय घरों में रखा है हजारों टन सोना 

भारत दुनिया का इकलौता देश है जहां लोगों के घरों में सबसे ज्यादा सोना पड़ा है. इस सोने का ज्यादातर हिस्सा घरों और लॉकरों में सुरक्षित रखा हुआ है. हालांकि, यह सोना देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में किसी तरह की मदद नहीं करता है.

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WGC की रिपोर्ट बताती है कि नई पीढ़ी सोने में निवेश के मामले में काफी खुली सोच रखती है. वह पुरानी पीढ़ी की तरह सिर्फ शादी-विवाह की जरूरत के लिए गहने नहीं खरीदती बल्कि वह डिजिटल गोल्ड (ऑनलाइन सोना), गोल्ड ईटीएफ जैसे वित्तीय उत्पाद और गोल्ड मोनेटाइजेशन जैसे निवेश के विकल्पों में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित कर सकती है. इसका फायदा ये हो सकता है कि भविष्य में घरों में निष्क्रिय पड़े सोने का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा.

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रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है अगर घरों में पड़े सोने को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाया जाए तो इससे लगभग 315 लाख करोड़ रुपये अर्थव्यवस्था में आ सकते हैं. रिपोर्ट में आगे ये भी कहा गया है कि भारत में सोने की मांग आने वाले वर्षों में ज्यादा बने रहने की उम्मीद है. हालांकि, इस मांग को पूरा करने के लिए भारत तब भी विदेशों से इसके आयात पर ही निर्भर रहेगा.

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