भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टी20 में हार गई. एक बार फिर कप्तान श्रेयस अय्यर माइक पर आए. और एक बार फिर वही शब्द सुनाई दिया जो कि पिछली कई हार के बाद सुनाई देता रहा. 'ट्रांजिशन फेज'. टीम इंडिया का यह ट्रांजिशन फेज खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. हालात ऐसे हो गए हैं कि जो टीम इंडिया बीते दो साल में कोई सीरीज नहीं हारी वह अब लगातार दूसरी सीरीज में क्लीन स्वीप के करीब पहुंच गई है.
गंभीर के बाद कप्तान श्रेयस ने भी दिया ट्रांजिशन फेज का 'बहाना'
अय्यर और गंभीर भले ही ट्रांजिशन फेज का दुहाई दें लेकिन सच यह है कि टीम इंडिया इससे पहले भी कई बार और इससे भी बड़े ट्रांजिशन फेज से गुजरी है. लेकिन टीम का ऐसा हाल कभी नहीं हुआ.


इंग्लैंड के खिलाफ पहला मैच बारिश की भेंट चढ़ गया. इसके बाद, भारत ने अगले तीनों मैच गंवा दिए. जब भी लगातार हार को लेकर सवाल किया गया तो हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर इसी ट्रांजिशन फेज का हवाला देते हुए दिखाई दिए. अय्यर ने ब्रिस्टल टी20 में हार के बाद कहा कि यह हार भी काफी दुर्भाग्यपूर्ण थी. 158 का स्कोर काफी नहीं था. इंग्लैंड ने 14 ओवर में उसे चेज करके यह साबित भी कर दिया. इसके बाद अय्यर ने कहा,
यह टीम के लिए ट्रांजिशन फेज है और यहां गलतियां होंगी. हमें समझना होगा कि कंडीशंस के हिसाब से एडैप्ट करना कितना जरूरी है. लेकिन हमारी टीम में जल्दी सीखने वाले लोग हैं. हम खुद का आकलन करेंगे.
अय्यर और गंभीर भले ही ट्रांजिशन फेज का दुहाई दें, लेकिन सच यह है कि टीम इंडिया इससे पहले भी कई बार और इससे भी बड़े ट्रांजिशन फेज से गुजरी है. लेकिन, टीम का ऐसा हाल कभी नहीं हुआ.
टेस्ट में स्मूथ ट्रांजिशनभारत टेस्ट में भी ट्रांजिशन फेज देख चुका है. साल 2025 में विराट कोहली और रोहित शर्मा ने टेस्ट फॉर्मेट को अलविदा कहा. युवा कप्तान शुभमन गिल को एक युवा टीम लीड करने को मिली. उनकी पहली परीक्षा थी, इंग्लैंड दौरा. जब टीम का ऐलान हुआ तो लोग यह माने बैठे थे कि इस सीरीज में भारत को हार मिलेगी. लेकिन गिलकी कप्तानी वाली 'ट्रांजिशन फेज' वाली टीम 2-2 से सीरीज ड्रॉ कराकर लौटी. इस ड्रॉ को जीत से बड़ा माना गया.
सूर्यकुमार यादव को भी मिली थी ट्रांजिशन वाली टीमअब बात कर लेते हैं टी20 की. पहले साल 2024 की. टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद उनके टीम के तीन सबसे बड़े और अनुभवी सुपरस्टार्स ने इस फॉर्मेट को अलविदा कह दिया. विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविंद्र जडेजा एक दशक से भी ज्यादा समय तक इस फॉर्मेट का हिस्सा रहे. इसके बाद, सूर्यकुमार यादव को कप्तानी दी गई और उन्होंने नए सिरे से टीम तैयार की. तीन सुपरस्टार्स की जगह भरना आसान नहीं था, लेकिन भारत ने वह कर दिया. भारत की मजबूत बेंच स्ट्रेंथ वहां नजर आई. भारत दो साल तक कोई टी20 सीरीज नहीं हारा और आखिरकार इस साल एक बार फिर टी20 वर्ल्ड कप जीता.
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इस वर्ल्ड चैंपियन टीम में ज्यादा बदलाव नहीं हुए. सूर्यकुमार यादव को कप्तानी से हटाया गया, वह भी बोर्ड का ही फैसला था. टीम में वैभव सूर्यवंशी की एंट्री हुई, जिन्हें 15 साल की टीम में मौका देना भी बोर्ड का ही फैसला था. इसके अलावा, बाकी सब वही खिलाड़ी थे जो कि लगातार टीम का हिस्सा बने रहे. लेकिन इन बदलावों के साथ इस बार टीम इंडिया सीरीज क्या मैच भी जीतने को तरस गई. तो क्या वाकई में ट्रांजिशन की वजह से हुआ है या भारत के अतिआत्मविश्वास की वजह से. या फिर कोई वजह जो अब गौतम गंभीर को टटोलनी है.
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