जसप्रीत बुमराह, टीम इंडिया का वह गेंदबाज जिसके रहते हुए सामने वाली टीम कभी भी राहत की सांस नहीं ले सकती. इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में एक बार टीम इंडिया को बुमराह की कमी महसूस हुई. घुटने में चोट के कारण बुमराह लॉर्ड्स वनडे में नहीं उतरे. उसी समय यह अंदाजा हो गया था कि इस मैच में भारतीय गेंदबाजी को इंग्लैंड को रोकने के लिए कुछ खास करना होगा. और ऐसा नहीं हुआ. नतीजा इंग्लैंड ने 387 रन ठोक दिए.
बुमराह के बिना टीम इंडिया की बॉलिंग हुई एक्सपोज!
घुटने में चोट के कारण जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स वनडे में नहीं उतरे. उसी समय यह अंदाजा हो गया था कि इस मैच में भारतीय गेंदबाज संघर्ष करते नजर आ सकते हैं और ऐसा ही हुआ.


लॉर्ड्स वनडे में जैकब बेथेल और बेन डकेट ने पहले विकेट के लिए 192 रन की साझेदारी की. बीते दो वनडे में बुमराह ने इन दोनों को खुलकर खेलने का मौका ही नहीं दिया था. उन्होंने बेन डकेट को ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद से परेशान किया. वहीं, बेथेल उनकी सीम का अंदाजा नहीं लगा सके. बुमराह की गेंदबाजी पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों को हर रन कमाना पड़ रहा था. उन पर दबाव दिख रहा था. यही दबाव लॉर्ड्स में तीसरे ODI में नजर नहीं आया.
अर्शदीप-प्रसिद्ध नहीं कर पाए इंप्रेसअर्शदीप सिंह ने यहां गेंदबाजी की शुरुआत की. नई गेंद से उन्हें मूवमेंट तो मिली, लेकिन वह लाइन और लेंथ ढूंढने में संघर्ष करते रहे. दोनों ओपनर्स ने उनकी गेंद पर काफी बाउंड्री लगाई. पहले तीन ओवर में 19 रन लुटा दिए थे. प्रसिद्ध कृष्णा का स्पेल भी कुछ ऐसा ही रहा. उन्होंने भी अपने पहले ही ओवर में 12 रन दे दिए. पहले पावरप्ले के खत्म होने से पहले प्रिंस यादव को भी ओवर दिया गया. वह भी लेंथ खोजने में संर्घष करते नजर आए. उन्होंने अपने इस पहले ओवर में वाइड गेंद भी डाली. पहले 10 ओवर में इंग्लैंड ने बिना कोई विकेट खोए 58 रन बना लिए थे. उन्हें बिना दबाव पर अच्छा बेस तैयार करने का मौका मिला, जिसे उन्होंने बाद में कैपटलाइज किया.
यही बुमराह का असर है. उनका काम सिर्फ विकेट लेना नहीं है, उनका काम बल्लेबाजों पर दबाव बनाना भी है. कई बार इसी दबाव में बल्लेबाज गलती करता है और बुमराह को विकेट दे बैठता है. ऐसा न भी हो तो बुमराह के खिलाफ बचकर खेलने के बाद बाकी गेंदबाजों के खिलाफ खेलने का उनपर दबाव आता है और विकेट गंवा बैठते हैं.
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बुमराह के ऊपर एक अहम जिम्मेदारी होती है. टीम के गेंदबाजों की अगुवाई करना. बुमराह बाकी गेंदबाजों को सलाह देते हैं. उनका हौसला बढ़ाते हैं. मैदान पर उनके रहने से युवा खिलाड़ियों को एक मेंटॉर मिला हुआ होता है. इससे वह किसी भी स्थिति में जाकर बात कर सकते हैं. लॉर्ड्स वनडे शायद 97 रन देने वाले गुरनूर बरार और प्रिंस यादव इसी मेंटॉर को मिल कर रहे थे. उनके पास कोई ऐसा गेंदबाज नहीं था जिससे जाकर वह मदद मांग सके. नतीजा यह रहा कि इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 387 रन बना दिए. भारत यह मैच 27 रन से हारा.
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