जेएनयू का एक प्रोटेस्ट याद आ गया. गंगा ढाबा पर छात्र-छात्राओं का एक समूह नारे लगा रहा था. 'यूनिवर्सिटी प्रशासन होश में आओ. होश में आओ.' वे लंबी लाल शॉलें गले में लपेटे हुए थे, आंखें गांजे के असर से मुंदी जा रही थीं. बीच-बीच में जुबान भरभरा जाती थी, तो नारे से एकाध शब्द लुप्त भी हो जाता था. कंधे झुके हुए थे पर मुट्ठियां बंधी थीं. उन्हें बिस्तर मिल जाता तो वे मिनटों में लंबी नींद सो जाते. पर उस वक्त, गंगा ढाबा के सामने वे एक स्वर में कहे जा रहे थे, 'होस में आओ, होस में आओ. यूविस्टी पसासन होस में आओ.' प्रतिरोध को जरूरी सम्मान है, लेकिन ये किस्सा सुबह एक खबर पढ़कर याद हो आया. खबर 'बदलते' लेफ्ट के बारे में है. लोग कब से कह रहे थे कि लेफ्ट बहुत सैद्धांतिक होकर रह गया है, उसे खुद को बदलना चाहिए. तो वह बदल गया है. बहुत सारे लोगों को गुस्सा आएगा, बहुत सारे प्रसन्न होंगे. कुछ कहेंगे कि जबरदस्ती की व्याख्या है. पर लगता तो यही है कि केरल की वामपंथी सरकार ने अपने पांव अंधविश्वास के डस्टबिन में धर लिए हैं. केरल में लेफ्ट सरकार के टॉप लीडरों को जो कारें दी गई हैं, उनके नंबर 1, 2, 3 की गिनती से शुरू होते हैं, लेकिन इसमें 13 नंबर की कार नहीं है.
1 नंबर की कार मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को मिली है. 12 नंबर की निर्दलीय विधायक केटी जलील को. 14 नंबर की कार CPI के मंत्री पी तिलोतमन के पास है. लेकिन 13 नंबर कोई कार नहीं है.
'द इंडियन एक्सप्रेस' ने जब तिलोतमन से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, 'मुझे कार नंबर 14 अलॉट की गई है, जो अभी मेरे पास आनी है. मैंने नहीं कहा था कि मुझे 13 नंबर की कार न दी जाए.'
केरल में लेफ्ट कई बार वैज्ञानिकता से विचलित हो जाता है. दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री विजयन की तस्वीर के साथ केरल सरकार ने देश भर के अखबारों में फुल पेज ऐड छपवाए थे. वादा किया था कि केरल को 'भगवान का अपना देश' बनाया जाएगा. अंग्रेजी में लिखा था, 'God's own country.' जन्माष्टमी के जुलूस निकालने में भी केरल के कम्युनिस्ट हर्जा नहीं मानते.
कार नंबर 13 पिछली केरल सरकार के काफिलों से भी गायब रही है. लेकिन इस बार आरोप है कि लेफ्ट के मंत्रियों ने जान-बूझकर 13 नंबर की कार नहीं ली, क्योंकि इसे 'अनलकी' माना जाता है. मंत्रियों को कार कौन अलॉट करता है? टूरिज्म डिपार्टमेंट. टूरिज्म डिप्टी डायरेक्टर रघु दास से पूछा गया तो रचनात्मकता को नए स्तर पर ले गए. बोले, 'अगर ऑर्डर में 13 नंबर नहीं है तो इसका मतलब है कि इस नंबर की कोई कार नहीं होगी.' लेकिन काम की बात स्टेट एडिशनल प्रोटोकॉल अफसर एके मुस्तफा ने बताई. कि कारों के नंबर मंत्री खुद चुनते हैं. 13 नंबर किसी ने नहीं लिया था. लेकिन बीजेपी जो ज्यादा पुरातनपंथी कही जाती है, इससे खफा हो गई है. पक्ष और विपक्ष की राजनीति इसे ही कहते हैं. बीजेपी के प्रदेश महासतिव के सुरेंद्रन ने इस पर फेसबुक पोस्ट लिख दी है. पूछा है, 'लोगों को जानने का हक है कि CPM और CPI के मंत्रियों ने 13 नंबर वाली कार क्यों नहीं ली? वे द्वंद्वात्मक भौतिकवाद और समाजवाद के सिद्धांतों से चलते हैं. सीताराम येचुरी और प्रकाश करात को जवाब देना चाहिए. क्या वे मानेंगे कि 13 एक अनलकी नंबर है?'