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'अनसोल्ड' से धोनी-रोहित वाले एलीट क्लब तक, रजत पाटीदार RCB का 'खरा सोना' हैं

साल 2022 में IPL ऑक्शन में अनसोल्ड रहने वाले रजत पाटीदार ने संघर्ष, चोट और वापसी की कहानी लिखते हुए RCB को लगातार दो बार चैंपियन बनाया. लगातार दो IPL खिताब जीतने वाले कप्तानों की खास सूची में अब उनका नाम महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा के साथ शामिल हो गया है.

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रजत पाटीदार ने दूसरी बार आरसीबी को चैंपियन बनाया है. (फोटो- India Today)

साल था 2022. यानी तकरीबन साढ़े चार साल पहले. IPL की ऑक्शन टेबल लगी थी. खिलाड़ी खरीदे और बेचे जा रहे थे. खरीदने वाली 10 टीमें थीं. सैकड़ों खिलाड़ी बिके. सैकड़ों रह गए. जो रह गए उनमें से एक खिलाड़ी एक साल पहले ही आईपीएल के बाजार में उतरा था. मध्य प्रदेश के इंदौर के इस खिलाड़ी पर बेंगलुरु रॉयल चैलेंजर्स ने उसके बेस प्राइस यानी 20 लाख रुपये में दांव लगाया था लेकिन अपने पहले सीजन में वह सिर्फ चार मैच खेला. 71 रन बनाए. इस प्रदर्शन पर टीम ने भी जवाब दे दिया. अगले ऑक्शन में रिलीज कर दिया. इंदौर का ये नया लड़का इस साल ‘अनसोल्ड’ रह गया. यानी किसी ने नहीं खरीदा.  

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अब 2026 में आ जाइए. उसी ‘अनबिके’ खिलाड़ी की कप्तानी में आरसीबी के पास अब आईपीएल की दो-दो ट्रॉफियां है. वो भी लगातार जीती हुई. ये कारनामा कर दिखाने वाले खिलाड़ी का नाम है- रजत पाटीदार. 17 साल से सिर्फ एक ट्रॉफी के लिए तरसती अपनी टीम को उन्होंने एक बार नहीं. लगातार दो बार जीत का स्वाद चखाया और आईपीएल की दुनिया के उस ‘एलीट क्लब’ में शामिल हो गए, जिसमें अब तक सिर्फ महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा थे. यानी अपनी टीम को लगातार दो बार IPL का खिताब जिताने वाले कप्तानों की तीन लोगों की लिस्ट में रजत पाटीदार भी शामिल हो गए.

हालांकि, पाटीदार का ये सफर आसान नहीं था. 

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मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले रजत पाटीदार में सबसे पहली बार क्रिकेटर उनके दादाजी ने देखा. पाटीदार के पिता जहां उन्हें फैमिली बिजनेस में लगाना चाहते थे. वहीं रजत के दादा ने उनका खेल देखकर फैसला कर लिया कि उनका पोता तो क्रिकेट ही खेलेगा. नतीजा ये हुआ कि उन्हें अकादमी भेज दिया गया. युवा पाटीदार बाहें भांजते फास्ट बॉलर बनने की इच्छा लिए अपनी क्रिकेट को मांजने लगे. लेकिन मामला जम नहीं रहा था. ट्रैक चेंज किया. फास्ट बॉलिंग विधा को विदा किया. स्पिन बॉलर की ट्रेनिंग चलने लगी लेकिन अभी भी सफलता आसपास भी नहीं थी. 18 साल तक उन्हें कोई बड़ा-छोटा मौका नहीं मिला. वो अपना अंदाज बदलते रहे. ऑफ स्पिन सीखने लगे. उन्हें लगने लगा कि एक स्पिनर के तौर पर ही वो टीम में पहुंचेंगे.

लेकिन, करियर शुरू होता कि एक हादसा हो गया. रजत को फुटबॉल खेलना भी काफी पसंद था. 2014 में फुटबॉल के मैदान पर उन्हें घुटने में चोट लग गई. इसके बाद उनकी सर्जरी हुई. 8 महीने तक वो खेल से दूर रहे. घर वाले भी पीछे लग गए कि अभ फैमिली बिजनेस संभाल लो. डिग्री पूरी करो. लेकिन पाटीदार के दिमाग में तो क्रिकेट का जुनून था और जुनून अपना मोटिवेशन खोज लेता है. पाटीदार को चेतेश्वर पुजारा के रूप में ये मोटिवेशन मिला. पुजारा की भी घुटनों की सर्जरी हुई थी. फिर भी उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में अपना नाम बनाया. पाटीदार ने सोचा कि अगर पुजारा ये कर सकते हैं तो वो क्यों नहीं?

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आरसीबी ने 2025 में पहली बार आईपीएल ट्रॉफी जीती.

फिर क्या था? कुंवर नारायण की कविता की तरह पाटीदार ‘अबकी बार वृहत्तर’ होकर लौटे. उन्हें साथ मिला पूर्व भारतीय बल्लेबाज अमय खुरासिया का. खुरासिया ने उनकी लगन और ऊर्जा को नई दिशा दी. उन्हें सपोर्ट किया. फास्ट बॉलर बनने आए पाटीदार को एक मजबूत बल्लेबाज के तौर पर तैयार किया. सर्जरी के 18 महीने के बाद पाटीदार ने एमपी की रणजी टीम में सलामी बल्लेबाज के तौर पर डेब्यू किया. पहले ही मैच की दूसरी पारी में उन्होंने शतक ठोक दिया.

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घरेलू मैचों में निरंतरता बनाए रखने का फायदा मिला, जिसके बाद पाटीदार को IPL ट्रायल्स के लिए बुलाया गया. सबसे पहले KKR ने मुंबई में अपने कैम्प में पाटीदार का टेस्ट लिया लेकिन ट्रायल्स के बाद उन्हें KKR की जगह RCB की टीम ने बेस प्राइज पर खरीद लिया. ये साल 2021 की बात थी. इस सीजन के आईपीएल में उनके कप्तान विराट कोहली ने उन्हें चार मैचों में उतारा. पाटीदार ने कुल 71 रन बनाए लेकिन साल 2022 की कहानी एकदम अलग रही. 

आरसीबी ने पाटीदार को रिलीज कर दिया. उस साल मेगा ऑक्शन में 10 में से किसी भी टीम ने उन्हें नहीं खरीदा. लेकिन तभी एक ऐसी घटना हुई, जिसने पाटीदार की जिंदगी बदल दी.

दूसरा मौका सबको मिलता है…

एक शेर है.‘दूसरा मौका सबको मिलता है ताबिश. पहली बाजी सबने हारी होती है.’ पाटीदार पर ये शेर फिट बैठता है. साल 2022 उनके लिए हार्टब्रेकिंग साल होता लेकिन बन गया जिंदगी का टर्निंग पॉइंट. हुआ ये कि RCB टीम के मिडिल ऑर्डर बैटर लवनीत सिसोदिया चोटिल हो गए. टीम संकट में आ गई. इसी वक्त उन्हें अपने छोड़े गए प्लेयर रजत पाटीदार की याद आई. उनको टीम ने रिप्लेसमेंट ऑफर की. पाटीदार श्योर नहीं थे लेकिन फैमिली ने पुश किया तो ऑफर एक्सेप्ट कर लिया. बस यहीं से जिंदगी बदल गई.

2022 के आईपीएल में पाटीदार को 8 मैचों में खेलने का मौका मिला. इन मैचों में उन्होंने 55.50 के औसत, 152.75 के स्ट्राइक रेट से 275 रन बनाए. रजत टीम के नए हीरो बन गए लेकिन असली कमाल IPL 2022 के एलिमिनेटर मुकाबले में दिखा. लखनऊ सुपर जायंट्स के ख‍िलाफ रजत ने महज 49 गेंदों में सेंचुरी ठोक दी. उन्होंने नाबाद 112 रन बनाए. टीम ने मैच जीता. रजत ने फ्रेंचाइजी का भरोसा. 

लेकिन जीवन में दिन है तो रात भी आती है. 

साल 2023 रजत के लिए फिर रात साबित हुई. ये पूरा साल उनके लिए इंजरी का रहा. वो पूरे सीजन बाहर रहे. टीम ने भी काफी खराब प्रदर्शन किया.

साल 2024 से रजत पाटीदार का सूरज उदित होना शुरू होता है. हालांकि, उनकी टीम सीजन की शुरुआत के 7 में से 6 मैच हार गई लेकिन अगले 7 के 7 मुकाबले जीत लिए. टीम प्लेऑफ में भी पहुंच गई. इस सीजन में रजत ने 30.38 के औसत से 395 रन बनाए. उनकी बैटिंग में एक बात खास दिखी. उनका स्ट्राइक रेट. रजत ने 177.13 के स्ट्राइक रेट से बॉलर्स की धुनाई की. 

अब आता है 2025. रजत के जीवन का सबसे यादगार साल. जिस आरसीबी की टीम को 17 साल में राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले, डेनियल विटोरी, शेन वाट्सन, फाफ डुप्लेसिस और विराट कोहली जैसे दिग्गज कप्तान आईपीएल की ट्रॉफी नहीं जिता पाए, उस टीम को पाटीदार ने पहली बार IPL चैंपियन इसी साल बनाया. 

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जो काम द्रविड़ से लेकर कोहली तक न कर पाए वो पाटीदार ने कर दिया.
अब मौजूदा सीजन पर आते हैं. 

साल है 2026. आरसीबी में ‘वटवृक्ष’ विराट कोहली की छांव में रजत और ज्यादा निखर गए. ये निखार बतौर कप्तान उनके दूसरे सीजन में नजर आने लगा. उनका माइंडसेट उनके स्ट्राइक रेट में दिखा. 15 मुकाबलों में इस सीजन रजत पाटीदार ने 501 रन बनाए. वो भी 192.96 के स्ट्राइक रेट से. भले ही पूरी टीम दबाव में बिखर रही हो. उनका कप्तान हाथ में बल्ला लिए एक छोर पर डटा होता था. यही वजह रही कि पाटीदार ने वो कमाल कर दिखाया, जो आईपीएल की हिस्ट्री में बहुत कम लोग कर पाए. पाटीदार ने आरसीबी को लगातार दूसरी बार चैंपियन बना दिया.  

इसकी पटकथा भी खुद रजत ने पहले क्वालिफायर में अपने बल्ले से लिखी. महज 33 गेंदों में रजत ने नाबाद 93 रन ठोक दिए. गेंदें बची होतीं तो रजत प्लेऑफ में एक और सेंचुरी से सिर्फ दो बाउंड्री ही दूर थे. धर्मशाला में पाटीदार नाम का जो तूफान उठा वो टाइटंस को हवा में उड़ा ले गया. एक पौधा जो पिछले सीजन ‘वटवृक्ष’ की छांव में था. अब खुद एक पेड़ बन चुका है.

रजत पाटीदार ने RCB के लिए जो किया है वो बड़े-बड़े दिग्गज कप्तान नहीं कर सके. IPL इतिहास में बतौर कप्तान पहले साल में ही ट्रॉफी की लिस्ट बहुत बड़ी नहीं है. अब तक सिर्फ 4 कप्तान हुए, जिन्होंने ये कारनामा किया है. साल 2008 में शेन वॉर्न. 2013 में रोहित शर्मा. 2022 में हार्दिक पंड्या और 2025 में रजत पाटीदार. वैसे तो इस लिस्ट में श्रेयस अय्यर भी हैं, क्योंकि 2024 में वो पहली बार ही कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान थे. लेकिन, इससे पहले वो दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी कर चुके थे. 

रजत टीम का असली ‘सोना’

इससे भी एक्सक्लूसिव उन कप्तानों की लिस्ट है, जिन्होंने लगातार दो सीजन अपनी टीम को चैंपियन बनाया हो. इस लिस्ट में अब तक सिर्फ दो ही नाम थे. महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा. धोनी ने 2010, 2011 में चेन्नई सुपरकिंग्स को चैंपियन बनाया था. रोहित ने 2019, 2020 में मुंबई इंडियंस के साथ ये इतिहास दर्ज किया था. इस लिस्ट में अब तीसरे नाम का भी स्वागत कीजिए. रजत पाटीदार, जिनके नाम में भले सिल्वर के अर्थ वाला रजत हो लेकिन वह अपनी टीम के लिए खरा सोना बनकर उभरे हैं. 

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