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पाक अगर ऑस्ट्रेलिया में नहीं खेल सकता तो हमें ऑस्ट्रेलिया को यहां नहीं बुलाना चाहिए

इयान चैपल का लॉजिक उन्हीं की टीम पर भारी पड़ जायेगा.

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फोटो - thelallantop
ऑस्ट्रेलिया वर्सेज़ पाकिस्तान सीरीज़ खतम हुई है. तीन मैचों की सीरीज़ को 3-0 से ऑस्ट्रेलिया ने ही जीता है. पाकिस्तान किसी भी इनिंग्स में ऑस्ट्रेलिया पर चढ़ाई करती नहीं दिखी. जब भी अच्छी पोज़ीशन में दिखी, टुकड़ों में दिखी. जब तक स्थिति अपने फेवर में करती, कोई ऑस्ट्रेलियन प्लेयर पिल पड़ता था. यूनिस खान की डबल सेंचुरी भी काम नहीं आईं. कुछ ही महीने पहले यही पाकिस्तान टेस्ट टीम में नंबर एक पोज़ीशन पर था. सीरीज़ खतम होने के ठीक बाद अब जब पाकिस्तान वन-डे मैचों की तैयारी कर रहा है, इयान चैपल ने कुछ कहा है. जो सुनना चाहिए. चैपल आखिर एक जाने पहचाने क्रिकेट के जानकार हैं. चैपल ने कहा है कि पाकिस्तान अगर अपना क्रिकेट नहीं सुधारता है तो उसे ऑस्ट्रेलिया में बुलाना बंद कर देना चाहिए. उनके हिसाब से ऑस्ट्रेलिया को अच्छा कम्पटीशन नहीं मिल पा रहा है और एक तरह से उसका टाइम वेस्ट हो रहा है. और वहीं पाकिस्तान अपने गेम में इम्प्रूवमेंट नहीं दिखा रहा है. shocked gif इयान चैपल की इस बात में दो  बातें हो सकती हैं. या तो ये सही हो सकती है या ग़लत. अगर ग़लत है तो कोई बात नहीं. पाकिस्तान आती रहे. अगर सही है तो मैं एक बात इयान चैपल से कहना चाहता हूं. अगर पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया में अपना रिकॉर्ड नहीं सुधार रही है और इसलिए उसे नहीं बुलाया जाना चाहिए तो ऑस्ट्रेलिया को भी इंडियन सब-कॉन्टिनेंट और यूएई की पिचों पर खेलने के लिए नहीं बुलाया जाना चाहिए. वजह? वजह है इन पिचों पर  उसकी परफॉरमेंस. साल 2011 के बाद से अब तक यानी पिछले 5 सालों में हुए टेस्ट मैचों की बात की जाए तो -

इंडिया में कुल 4 मैच हुए हैं. चारों मैच ऑस्ट्रेलिया हारी है. 

यूएई में कुल 2 मैच खेले हैं. दोनों मैच ऑस्ट्रेलिया हारी है.

श्री लंका में कुल 6 मैच हुए हैं. इनमें पहला मैच ऑस्ट्रेलिया हारी है. दूसरा और तीसरा ड्रॉ हुआ है. और बाकी बचे तीनों हारी है.

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यानी कुल मिलाके 12 मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने मात्र एक मैच जीता है. वो भी 31 अगस्त 2011 को. उसके बाद से 2 मैच ड्रॉ करवा पाई है. सितंबर 2011 में. और उसके बाद से एक भी मैच नहीं जीती है. उल्टा, 9 मैच हारी है. ऑस्ट्रेलिया का ट्रैक रिकॉर्ड कहीं इम्प्रूव होता हुआ नहीं दिख रहा है. उनकी टीम आने को तैयार है. इस बार इंडिया. क्या किया जाए, चैपल जी? वीज़ा पर मुहर न लगवाई जाए?

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