नुसरत फतेह अली खान (Nusrat Fateh Ali Khan). एक ऐसा नाम है जिन्हें लोग सूफी संगीत और एक बेहतरीन कव्वाल के तौर पर जानते हैं. लेकिन कई लोग इस बात को नहीं जानते कि नुसरत ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम को अपना पहला और इकलौता विश्वकप जीतने में मदद की थी.
नुसरत की कव्वाली ने पाकिस्तान को 1992 क्रिकेट विश्व कप जिताया था!
नुसरन ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम को अपना पहला और इकलौता विश्वकप जीतने में मदद की थी.


इंडिनय एक्सप्रेस में नुसरत और पाकिस्तान की विश्वकप की जीत से जुड़ा एक किस्सा साझा किया गया है. जिसमें संदीप द्विवेदी ने इस जीत से जुड़ी ढेर सारी बातें बताई हैं. पाकिस्तानी कप्तान इमरान खान ही वो खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपनी टीम को नुसरत से इतना जोड़ा कि नुसरत की कव्वाली पाकिस्तान की ऐतिहासिक वर्ल्ड कप जीत के लिए प्रेरणा बन गई.
1992 क्रिकेट विश्वकप के दौरान पाकिस्तानी ड्रेसिंग रूम में सूफी माहौल होता था. जिसमें नुसरत का 'अल्लाह हू, अल्लाह हू' लूप पर चलता था. पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर आमिर सोहेल तो इसे अपने कैसेट प्लेयर पर लगा ट्रेनिंग एरिया और टीम बस में भी लगातार सुनते थे. सालों बाद पाकिस्तानी दिग्गज जावेद मियांदाद ने भी कहा था कि नुसरत ने उन्हें खेल के दौरान 'जज्बा' दिया था.
वहीं दूसरे पाकिस्तानी दिग्गज रमीज ने बताया कि नुसरत के गाने उन्हें सीधे खुदा से जोड़ते थे. वर्ल्ड कप के दौरान इमरान की टीम जब पस्त होकर वर्ल्ड कप से बाहर होने की कगार पर थी. तब पाकिस्तानी जनता को पता था कि नुसरत का संगीत टीम के ड्रेसिंग रूम का अहम हिस्सा है. इस वजह से नुसरत को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. इन आलोचनाओं के चलते घबराहट में नुसरत ने उस वक्त अपने दोस्त और फैन इमरान से बात भी की थी. बाद में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि
‘मैंने इमरान को फोन किया और उनसे कहा 'कौम तो आपके साथ हमें भी बुरा कह रही है, की ये सब खिलाड़ी कव्वालियां सुनने लगे और मैच हारने लगे. देश मुझे भी टीम की हार के लिए दोषी ठहरा रहा है.’
लेकिन 1992 के उस दौर में इमरान खान एक अलग ही ज़ोन में थे. उन्हें अपनी टीम पर बहुत विश्वास था. इसीलिए इमरान ने नुसरत को कहा की आप चिंता न करें क्यूंकि उनकी टीम वर्ल्ड कप जीतने जा रही है. साथ ही इमरान ने नुसरत से ये भी कहा,
‘हम हर दिन आपकी कव्वाली सुन रहे हैं.’
बाद में पाकिस्तान ने 1992 में इमरान खान की कप्तानी में पहली बार क्रिकेट वर्ल्ड कप जीत इतिहास रच दिया. इमरान ने इस जीत के लिए नुसरत के संगीत को पूरे ड्रेसिंग रूम के लिए प्रेरणा के स्रोत के रूप में बताया. पूरे दिन नुसरत का संगीत कानों में पड़े रहने से पाकिस्तानी टीम के लिए हार को झेलने में मदद मिलती और अगले मैच में बेहतर करने का जज्बा भी मिलता था.
ये एक शानदार उदाहरण है कि कैसे संगीत का खेल जगत से जुड़ाव अटूट है. जब नुसरत या और भी कई महान संगीतकार अपना लेखन, रचना या गायन कर रहे होंगे, तो शायद ही उन्हें पता होगा कि उनका संगीत कैसे प्रतिष्ठित टीम्स को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है या कैसे उनका संगीत खेल के सुपरस्टार्स को ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने में मदद करता है.
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