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52 साल से सेमीफाइनल तक भी नहीं पहुंचे, इस वर्ल्ड कप में महिला हॉकी टीम कितनी मजबूत?

इस बार महिला वर्ल्ड कप में 16 टीम में हिस्सा ले रही हैं. इन 16 टीमों को चार-चार देशों के ग्रुप में बांटा गया है. भारत के ग्रुप की बात करें तो इस वर्ल्ड कप का सबसे मुश्किल ग्रुप कहा जा रहा है.

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भारतीय हॉकी टीम ने वर्ल्ड कप क्वालिफायर खेलकर क्वालिफाई किया. (फोटो- PTI)

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  • भारत में वर्ष 2023 में पहली बार महिला और पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप एक साथ आयोजित हो रहे हैं, जिसमें भारतीय महिला हॉकी टीम भी भाग ले रही है और चुनौतीपूर्ण ग्रुप में प्रतिस्पर्धा कर रही है।
  • भारतीय महिला हॉकी टीम का पिछले वर्ल्ड कप में प्रदर्शन सीमित रहा है, जिसमें टीम सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच पाई और कई बार क्वालीफाई भी नहीं कर सकी, जिससे सुधार की जरूरत बनी।
  • भारत ने हाल ही में नेशंस कप में सभी मैच जीतकर अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और विश्व कप में बेहतर परिणाम की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत में जब भी हॉकी की या उसके इतिहास की बात होती है तो चर्चा अक्सर सिर्फ पुरुष टीम की होती है. अब जबकि वर्ल्ड कप का टाइम आया है तब भी पुरुष टीम के इर्द-गिर्द ही हॉकी की सारी बहस घूम रही है. लेकिन पुरुष वर्ल्ड कप के साथ-साथ महिला वर्ल्ड कप भी हो रहा है. साल 1998 के बाद यह पहला मौका है जब महिला और पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप एक साथ आयोजित हो रहे हैं. ऐसे में ये जानना भी जरूरी है कि भारतीय महिला हॉकी टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी ताकतवर है. यह टीम इस वर्ल्ड कप में कितनी बड़ी दावेदार है?

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टीम का वर्ल्ड कप इतिहास

सबसे पहले बात कर लेते हैं महिला हॉकी वर्ल्ड कप के इतिहास की. इसकी शुरुआत 1974 से होती है. इस साल भारतीय महिला टीम ने अपना अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन किया और चौथा स्थान हासिल किया. हालांकि, ये गौरवशाली क्षण यहीं तक था. इस टूर्नामेंट के बाद से अब तक भारतीय महिला हॉकी टीम वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंच पाई है. पांच बार तो हालत ये रही कि महिला टीम वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई ही नहीं कर सकी. 

पिछले दो वर्ल्ड कप की बात करें तो भारत 2018 में 8वें और 2022 में 9वें स्थान पर रहा था. भारत का इस टूर्नामेंट में इतिहास बहुत अच्छा नहीं है लेकिन हर वर्ल्ड कप ‘जीरो से शुरू कर हीरो बनने’ का मौका होता है.

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भारत के लिए कौन होगा चुनौती?

इस बार महिला हॉकी वर्ल्ड कप में 16 टीम में हिस्सा ले रही हैं. इन 16 टीमों को चार-चार देशों के ग्रुप में बांटा गया है. भारत के ग्रुप की बात करें तो इसे इस वर्ल्ड कप का सबसे मुश्किल ग्रुप कहा जा रहा है. भारत के अलावा इस ग्रुप में वर्ल्ड नंबर-2 चीन, वर्ल्ड नंबर-6 इंग्लैंड और वर्ल्ड नंबर-18 साउथ अफ्रीका है. भारत के लिए इस ग्रुप में सबसे बड़ी चुनौती चीन की होगी. हाल के सालों में चीन ने जिस तरीके से अपनी हॉकी टीम को तैयार किया है, वह यूरोपियन हॉकी टीमों को भी लगातार टक्कर देती नजर आ रही है.

चीन के खिलाफ भारत की कोशिश होगी कि अगर वह किसी तरह से मैच नहीं जीत पाता है तो कम से कम ड्रॉ हासिल करे. तभी उसे अगले चरण में एंट्री मिलेगी. यहां उसके सामने एक अहम चुनौती इंग्लैंड की होगी. यह मैच कहीं न कहीं यह तय करेगा कि भारत अगले राउंड में पहुंच पाएगा या नहीं. इंग्लैंड रैंकिंग में भले भारत से ऊपर हो लेकिन जब हम खेल की बात करते हैं तो दोनों का स्तर लगभग एक जैसा ही है. इससे आगे बढ़ने पर भारत को साउथ अफ्रीका से भिड़ना होगा. भारत को हर हाल में ये मैच जीतना होगा. साथ ही कोशिश करनी होगी कि मैच बड़े अंतर से जीते.

भारत का हालिया फॉर्म

भारत के हालिया फॉर्म की बात करें तो वह अभी ठीक है. भारत ने नेशंस कप में अपने सभी मुकाबले जीते थे. यहां उन्होंने जापान, उरुग्वे, चिली और न्यूजीलैंड जैसी टीमों को हराया. सविता पूनिया ने भी यह बात मानी थी कि नेशंस कप की जीत के बाद टीम का माहौल पॉजीटिव हुआ है. उनका आत्मविश्वास बढ़ा है. उनकी कोशिश है कि यही आत्मविश्वास वर्ल्ड कप में भी जारी रहे. 

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भारत इस टूर्नामेंट में जिन खिलाड़ियों से सबसे ज्यादा उम्मीदें करेगा उनमें सबसे प्रमुख नाम है- दीपिका. यह युवा खिलाड़ी भारत की गोल मशीन है. नेशंस कप की बात करें तो यहां दीपिका ने छह गोल किए थे और वह टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने के मामले में टॉप पर रही थी. उन्होंने पिछले साल जूनियर एशिया कप में भी  6 मैंचो में 12 गोल किए थे.

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इस लिस्ट में दूसरा नाम कप्तान सलीमा टेटे का है. महज 24 साल की सलीमा भारतीय हॉकी टीम की कप्तान हैं. लेकिन उनका मुख्य काम होता है भारतीय मिडफील्ड को कंट्रोल करना. उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी पेस और डिफेंस से अटैक में ट्रांजिशन करना है. तीसरा नाम है- भारतीय टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया. वह अपना तीसरा वर्ल्ड कप खेल रही हैं. वह टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं. इस तरह के बड़े टूर्नामेंट में गोलकीपिंग का बहुत ज्यादा महत्व होता है. भारत के लिए इस वर्ल्ड कप को जितना रियलिस्टिक तो है लेकिन भारत ‘फेवरेट’ नहीं माना जा रहा है. क्या पता ‘चक दे इंडिया’ फिल्म की तरह शायद यही चीज भारत के लिए काम कर जाए.

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