सालों तक भारतीय हॉकी अपने गोल्डन एरा को तरतसी रही. बीते कुछ सालों में ऐसे कुछ मौके आए, जहां भारतीय हॉकी उस दौर की ओर फिर से कदम उठाती नजर आई. टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष टीम ने 41 साल बाद ब्रॉन्ज मेडल जीता. वहीं, महिला टीम चौथे स्थान पर रही. लेकिन एक ऐसा टूर्नामेंट है जहां भारत अब भी भारतीय टीम वापसी की राह पर है. वह टूर्नामेंट है वर्ल्ड कप. यह टूर्नामेंट भारत के लिए ऐसी काली रात बन गया, जिसका सवेरा 50 साल बाद भी नया आया है. इस साल नीदरलैंड्स और बेल्जियम में वर्ल्ड कप का आयोजन होगा. पुरुष टीमें करोड़ों लोगों की उम्मीदें लेकर वहां पहुंच चुकी है. लेकिन क्या वाकई में टीम इस बार एक बड़ी दावेदार है? इस बार कौन सी टीमें होंगी सबसे बड़ी चुनौती? क्या कहता है टीम का हालिया फॉर्म?
51 साल बाद खत्म होगा भारतीय हॉकी टीम का इंतजार? वर्ल्ड कप में कितनी मजबूत है दावेदारी
हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में इस बार 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं. इन 16 टीमों को 4 अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया है. भारत के ग्रुप में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स शामिल हैं.

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हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय इतिहाससबसे पहले बात इस टूर्नामेंट में भारत के इतिहास की. पिछली सदी में भारत हॉकी के मैदान पर राज किया करता था. भारत के नाम 8 ओलंपिक गोल्ड मेडल है. इसमें से छह गोल्ड तो उन्होंने लगातार जीते. लेकिन, जब बात वर्ल्ड कप की आती है तो वहां भारत का ऐसा दबदबा नहीं दिखता है. भारत ने अब तक एक ही बार वर्ल्ड कप जीता. साल 1975 में टीम इंडिया पहली और इकलौती बार वर्ल्ड चैंपियन बनी थी. लेकिन, इसके बाद से टीम सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंच पाई है. वह केवल दो ही बार टॉप 5 में फिनिश कर पाई है. 1982 में मुंबई में हुए वर्ल्ड कप में और 1994 में सिडनी में हुए वर्ल्ड कप में. साल 2018 में जब भारत ने दूसरी बार वर्ल्ड कप की मेजबानी की तो वह क्वार्टर फाइनल में पहुंची थी. यही इस सदी में भारत का बेस्ट प्रदर्शन है.
हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में इस बार 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं. इन 16 टीमों को 4 अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया है. भारत के ग्रुप में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स शामिल हैं. भारत के ग्रुप राउंड से आगे जाना ज्यादा मुश्किल नहीं है. लेकिन भारत के लिए जरूरी है कि वह इस राउंड में बड़े अंतर से मैच जीते. क्योंकि इस चरण के अंक आगे भी गिने जाएंगे. भारत के लिए क्वार्टर फाइनल तक का सफर आसान हो सकता है. लेकिन, उससे आगे जाने के लिए टीम को नीदरलैंड्स और बेल्जियम जैसी टीमों का सामना होगा.
भारत की ताकतभारत इस समय रैंकिंग में 8वें स्थान पर हैं. उससे ऊपर नीदरलैंड्स, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, अर्जेंटीना, जर्मनी और स्पेन हैं. यह सभी टीमें ओलंपिक और वर्ल्ड कप में लगातार अच्छा करती आ रही हैं. टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं उनके कप्तान हरमनप्रीत सिंह. डिफेंडर होने के साथ-साथ हरमनप्रीत टीम के टॉप ड्रैग फ्लिकर हैं. पेनल्टी कॉर्नर एक्सपर्ट पर अधिक जिम्मेदारी होगी. टीम इंडिया के पास फॉर्रवर्ड लाइन में सुजीत सिंह, दिलप्रीत, मनदीप सिंह, शिलानंद लाकरा जैसे नाम हैं. भारत की अटैकिंग लाइन को ही उनकी सबसे बड़ी मजबूती माना जाता है.
टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी मनप्रीत सिंह , हार्दिक सिंह , विवेक सागर प्रसाद और निलकांता शर्मा का कॉम्बिनेशन मिडफील्ड को मजबूत बनाता है. गोलकीपर के तौर पर इस बार टीम के पास पीआर श्रीजेश जैसा अनुभवी नाम नहीं होगा. ऐसे में सुरज करकेरा पर ज्यादा जिम्मेदारी होगी. वहीं, युवा खिलाड़ी मोहित एचएस को भी मौका मिल सकता है.
इस वर्ल्ड कप को लेकर काफी चर्चा हुई. लेकिन यह चर्चा टीम के खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि उनकी जर्सी को लेकर हुई. टूर्नामेंट से ठीक पहले हॉकी इंडिया ने भारतीय जर्सी का रंग बदलने का फैसला किया. इसे नीले से केसारिया कर दिया. कई पूर्व खिलाड़ियों और फैंस ने इस फैसले की आलोचना की. लोग टीम को हमेशा की तरह नीले रंग की जर्सी में देखना चाहते थे. इस पूरे मामले में हॉकी इंडिया के अंदर भी तालमेल की कमी दिखी. फेडरेशन के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा कि उन्हें इस फैसले की जानकारी नहीं थी. उन्होंने इसे लेकर जवाब मांगा लेकिन उसपर भी कुछ नहीं कहा गया. खिलाड़ियों ने फैसले का समर्थन किया. कोच क्रेग फुल्टन ने कहा कि उनकी टीम इन विवादों का खुद पर असर नहीं होने देगी. उनका फोकस पूरी तरह अपने प्रदर्शन पर होगा. लेकिन, आमतौर पर टूर्नामेंट से ठीक पहले इस तरह के विवाद से टीम के फोकस कई बार हिल जाता है.
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