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प्लास्टिक के पैकेट में पान मसाला-गुटखा बहुत खतरनाक, बदले गए पैकेजिंग के नियम

FSSAI on Pan Masala: FSSAI ने सुझाया कि पान मसाला की पैकेजिंग के लिए पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोस या अन्य नेचुरल मटेरियल का इस्तेमाल किया जाए. प्लास्टिक के इस्तेमाल के लिए सख्त मना किया और कहा कि पैकेजिंग में एल्युमीनियम फाइल का भी इस्तेमाल न हो.

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FSSAI ने पान मसाला की पैकेजिंग पर बड़ा कदम उठाया है. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने 10 अगस्त को पान मसाला और गुटखे की पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक की जगह पेपर, पेपरबोर्ड या अन्य प्राकृतिक सामग्री के उपयोग का निर्देश दिया।
  • पान मसाला-गुटखे की प्लास्टिक पाउच पैकेजिंग में माइक्रोप्लास्टिक कणों के शामिल होने और पर्यावरणीय प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य व पर्यावरण को खतरा था, जिस कारण यह बदलाव आवश्यक समझा गया।
  • नए नियमों के तहत प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध के साथ कुछ छूट दी गई हैं, और अब पैकेजिंग में टिन, ग्लास व प्राकृतिक सामग्री के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

पान मसाला-गुटखा अब प्लास्टिक के पाउच में नहीं मिलेगा. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग को प्लास्टिक फ्री रखने को कहा है. अभी तक ये प्लास्टिक के छोटे-छोटे पैकेट में बिकता था. खाने वाले तो जानते ही हैं. लेकिन अब FSSAI चाहती है कि इन्हें प्लास्टिक की जगह पेपर या पेपरबोर्ड में पैक किया जाए. 

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प्लास्टिक-फ्री पान मसाला के नियम

इंडिया टुडे के मुताबिक, 10 अगस्त को FSSAI ने एक नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि अमेंडमेंट के तहत पान मसाला-गुटखा की पैकेजिंग बदली जाएगी. अमेंडमेंट के तहत FSSAI ने पान मसाला को लिस्ट में शामिल किया और कुछ नए पैकेजिंग मटेरियल भी सुझाए. 

FSSAI हेल्थ और वेलफेयर मंत्रालय के अंतर्गत आता है. उसने सुझाया कि पान मसाला की पैकेजिंग के लिए पेपर, पेपरबोर्ड, सेलुलोस या अन्य नेचुरल मटेरियल का इस्तेमाल किया जाए. साफ-साफ ये बताया कि पैकेजिंग मटेरियल में polyethylene, polypropylene, polyester, polyvinyl chloride (PVC) या अन्य कोई polymer का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. 

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FSSAI ने कहां दी छूट?

नए नियमों में जहां एक तरफ प्लास्टिक न इस्तेमाल करने पर सख्ती दिखाई गई है, वहीं कुछ छूट भी दी गई है. FSSAI ने पैकेजिंग के लिए टिन और ग्लास के इस्तेमाल की छूट दी है. साथ ही बताया कि पैकेजिंग के दौरान प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 के कुछ नियमों का पालन भी करना होगा. 

रिपोर्ट के मुताबिक, पैकेजिंग के दौरान एल्युमीनियम फाइल और मेटलाइज़्ड लेयर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. FSSAI ने बताया कि ये अमेंडमेंट रेगुलेशन का एक ड्राफ्ट तैयार करने के बाद लोगों से फीडबैक लिया गया. 60 दिन के अंदर कई सुझाव और आपत्ति दर्ज की गई. इसके बाद ही ये नियम लाया गया है. ये नियम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड (पैकेजिंग), रेगुलेशन 2018 में बदलाव के बाद जोड़ा गया है. 

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पान मसाला के प्लास्टिक पाउच इंसान की सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक हैं. छोटे-छोटे पैकेट को डिस्पोज़ करना मुश्किल होता है. वहीं कोई भी फूड आइटम जब लंबे समय तक प्लास्टिक में स्टोर होता है उसमें माइक्रोप्लास्टिक जैसे कण शामिल होने का डर होता है. ऐसे में ये स्वास्थ्य के लिए और ज्यादा हानिकारक हो जाता है. कैंसर की बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है.

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