हॉकी फेडरेशन ने अगले महीने होने वाले हॉकी वर्ल्ड कप के लिए नई जर्सी लॉन्च की. नई जर्सी के लिए नीले रंग को बदलकर केसरी कर दिया गया. जर्सी के लॉन्च के बाद सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना की गई. कई लोगों ने इस फैसले को राजनीतिक तक बता दिया. आलोचना करने वालों में पूर्व भारतीय खिलाड़ी भी शामिल थे. मामला इतना बढ़ गया कि हॉकी इंडिया को सफाई देनी पड़ी. उन्होंने जर्सी के रंग बदलने के पीछे की वजह बताई है.
हॉकी टीम की भगवा जर्सी पर बवाल, सवाल उठे तो फेडरेशन ने क्या कहा?
हॉकी इंडिया ने टीम इंडिया के लिए नई जर्सी लॉन्च की है. इस जर्सी के केसारिया रंग को लेकर काफी आलोचना हुई. टीम इंडिया सालों तक नीली जर्सी में खेली है.

हॉकी इंडिया ने एक बयान में कहा कि नीली जर्सी नीले रंग की एस्ट्रो टर्फ (मैदान की सतह) के साथ घुल-मिल जाती थी. अंतरराष्ट्रीय हॉकी पिचों के लिए नीला रंग ही अब मानक है. इस एक जैसे रंग की वजह से खिलाड़ियों को मैदान पर साफ देखने में दिक्कत होती थी. फेडरेशन ने फिर इसे लेकर कोच और खिलाड़ियों से बात की.
जर्सी के रंग बदलने का कारणहॉकी इंडिया ने एक बयान में कहा कि नीली जर्सी नीले रंग की एस्ट्रो टर्फ (मैदान की सतह) के साथ घुल-मिल जाती थी. अंतरराष्ट्रीय हॉकी पिचों के लिए नीला रंग ही अब मानक है. इस एक जैसे रंग की वजह से खिलाड़ियों को मैदान पर साफ देखने में दिक्कत होती थी. फेडरेशन ने फिर इसे लेकर कोच और खिलाड़ियों से बात की.
कोचेज और खिलाड़ियों ने पीले या केसरिया जैसे दूसरे रंगों का सुझाव दिया. फेडरेशन ने बताया कि अच्छी तरह सोच विचार के बाद केसरिया रंग को चुना गया. बयान में आगे कहा गया कि तकनीकी जरूरत को पूरा करने के अलावा केसरिया रंग का गहरा महत्व भी है. यह नेशनल फ्लैग के रंगों में से एक है और साहस, त्याग और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है.
फेडरेशन ने कोचेज और खिलाड़ियों से तकनीकी फीडबैक मिलने और हमारे नेशनल फ्लैग का रंग होने से इस रंग के सांकेतिक महत्व को देखते हुए यह फैसला किया गया. भारतीय टीम के पास केसरिया के साथ इसी तरह की सफेद जर्सी भी होगी.
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जर्सी पर ‘मंडाला’ कला से प्रेरित पैटर्न हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत दर्शाते हैं. हॉकी इंडिया ने कहा कि इस पर गहरा नेवी ब्लू रंग अशोक चक्र से प्रेरित है जो प्रगति, शांति और फोकस का प्रतीक है. हॉकी इंडिया ने कहा कि छाती पर बना ग्राफिक सुदर्शन चक्र का एक आधुनिक रूप है, जो ‘ताकत, एकता और गति’ का प्रतीक है. कंधों और बाजुओं पर तिरंगे की पाइपिंग है, जो राष्ट्रीय गौरव को दिखाती है. जर्सी के आगे के हिस्से पर देवनागरी लिपि में ‘इंडिया’ लिखा है जो भारत की भाषा और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है .
पूर्व कप्तान रासकिन्हा ने हालांकि जर्सी का रंग बदलने के फैसले पर सवाल किया था. उन्होंने एक्स पर लिखा ,
हॉकी इंडिया ने खेल के लिए बहुत कुछ किया है लेकिन यह निराशाजनक है. भारतीय टीम की विरासत और पहचान नीला रंग रही है. मैने कई साल तक गर्व से नीली जर्सी पहनी है. फैंस हमारी टीम को नीले रंग में देखना चाहते हैं. यह केसरिया रंग का क्या तुक है? मेरा सरल और सीधा सवाल अपने गर्व, पहचान और विरासत से जुड़ा है.
आपको बता दें कि वर्ल्ड कप 15 से 30 अगस्त के बीच खेला जाएगा. भारतीय पुरुष टीम ने अब तक केवल एक ही बार वर्ल्ड कप जीता है. 1975 में भारत वर्ल्ड चैंपियन बना था. वहीं महिला टीम अब तक वर्ल्ड चैंपियन नहीं बनी है.
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