फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 के मुकाबले पूरे हो चुके हैं. 4 जुलाई से अब राउंड ऑफ 16 के मुकाबले शुरू होंगे. इसमें इंग्लैंड का सामना मेजबान मेक्सिको से होना है. ये मुकाबला खूब चर्चा में है. लेकिन, कारण फुटबॉल नहीं, बल्कि एक खास चीज है. दरअसल, इंग्लैंड के खिलाड़ियों को इस मैच से पहले जरूरत पड़ने पर वियाग्रा यानी सिल्डेनाफिल (Sildenafil) लेने की अनुमति दी गई है. यह फैसला हैरान करने वाला लग सकता है. लेकिन, इसके पीछे की वजह साइंटिफिक है.
'वियाग्रा' लेकर उतरेगी इंग्लैंड की टीम? मेक्सिको के खिलाफ मैच के लिए चौंकाने वाली रणनीति!
FIFA World Cup 2026 : कप्तान Harry Kane की अगुवाई वाली इंग्लैंड की टीम को अब राउंड ऑफ 16 में मेजबान मेक्सिको से भिड़ना है. इस अहम मुकाबले से पहले कहा जा रहा है कि टीम ने नई रणनीति बनाई है. टीम के खिलाड़ी मैच में 'वियाग्रा' लेकर उतरने वाले हैं.


कोच थॉमस ट्यूशेल की अगुवाई वाली इंग्लिश टीम 6 जुलाई को मेक्सिको सिटी में मेजबान के खिलाफ उतरेगी. मेक्सिको का एस्टाडियो एज़्टेका स्टेडियम समुद्र तल से लगभग 7350 फीट की ऊंचाई पर है. इतनी ऊंचाई पर अमूमन ऑक्सीजन लेवल कम होता है. ऐसे में प्लेयर्स जल्दी थक सकते हैं. उन्हें सांस लेने में दिक्कत भी हो सकती है. इसी कारण इंग्लिश टीम को ये ऑप्शन दिया गया है. द सन की रिपोर्ट की मुताबिक, अगर उन्हें जरूरत लगे तो वो वियाग्रा का इस्तेमाल कर सकते हैं.
इस दवा का नाम सुनते ही मन में ये विचार आएगा कि इसका टीम को क्या लाभ होगा? ये बात ठीक है कि इसका इस्तेमाल अमूमन इरेक्टाइल डिसफंक्शन के इलाज के लिए ही किया जाता है. लेकिन, क्योंकि इसके प्रयोग से शरीर में ब्लड फ्लो बेहतर हो जाता है. खिलाड़ियों की थकान दूर करने में ये काम आ सकता है. ये दवा वैसोडाइलेशन यानी ब्ल्ड वेसल्स को फैलाने में मदद करती है. ऐसे में ऊंचे इलाकों में इससे बॉडी को ऑक्सीजन पहुंचाने में आसानी हो सकती है.
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वियाग्रा को वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी ने प्रतिबंधित दवाओं की लिस्ट में शामिल नहीं किया है. यानी खिलाड़ी इवेंट के दौरान और उसके बाहर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. WADA ने इस दवा पर कई अध्ययन किए हैं. रिसर्च में ये पाया गया है कि सामान्य ऊंचाई पर इससे प्रदर्शन में कोई अनुचित फायदा नहीं मिलता. इसी वजह से यह एंटी-डोपिंग नियमों के तहत पूरी तरह वैध दवा मानी जाती है. हालांकि, इसके यूज को लेकर इंग्लैंड की तरफ से कोई ऑफिशियल कन्फर्मेशन नहीं आया है. लेकिन, इतिहास में ऐसे कुछ उदाहरण मिलते हैं.
मेेेेेेेक्सिको का घर पर रिकॉर्ड खतरनाकहालांकि, अगर मैच की बात करें, तो एज्टेका स्टेडियम में मेजबान टीम को हराना इतना आसान नहीं है. ये मेक्सिको के लिए 2013 से ही अभेद किला रहा है. टीम यहां 2013 के बाद से एक भी मुकाबला नहीं हारी है. मौजूदा वर्ल्ड कप में भी टीम अब तक अजेय है. ऐसे में इंग्लैंड के लिए ये चुनौती आसान नहीं होने वाली है. इस स्टेडियम के रिकॉर्ड की बात करें, तो यहां खेले गए 89 मुकाबलों में घरेलू टीम ने सिर्फ दो हार झेली हैं. ऐसे में कोच थॉमस ट्यूशल कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे. वो नहीं चाहेंगे कि टीम हायर एल्टीट्यूड की समस्याओं के कारण राउंड ऑफ 16 में ही बाहर हो जाए.
इंग्लिश टीम का प्रदर्शन इस वर्ल्ड कप में मिला जुला ही रहा है. ग्रुप स्टेज में टीम ने क्रोएशिया और पनामा के खिलाफ जीत दर्ज की थी. वहीं, घाना के खिलाफ उन्होंने गोल रहित ड्रॉ खेला था. इसके बाद, राउंड ऑफ 32 में टीम का सामना डीआर कांगो से हुआ था. इस मुकाबले में भी 75 मिनट तक इंग्लिश टीम पीछे ही चल रही थी. लेकिन, इसके बाद कप्तान हैरी केन के दो गोल के दम पर टीम ने मैच को 2-1 से अपने नाम कर लिया था. टीम के लिए ये जीत इतनी आसान नहीं रही थी. ऐसे में अगर उन्हें मेक्सिको को उनके घर पर हराना है तो अपना बेस्ट गेम खेलना ही होगा.
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