सेनेगल, कायदे से अफ्रीका के चैंपियंस. ऑफिशियली अफ्रीका (AFCON) के रनर्स अप. फीफा वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 32 में बेल्जियम से हारकर बाहर हो गए. लेकिन, ये हार इतनी सिंपल नहीं थी! सेनेगल के लिए ये साल फुटबॉल में भुलाने वाला रहा है. पहले अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (AFCON) के फाइनल्स में मोरक्को के खिलाफ रेफरी के टफ डिसिजन का शिकार हुए. अब 6 महीने के भीतर दूसरी बार उन्हें फुटबॉल के सबसे बड़े मंच से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. कारण एक बार फिर रेफरी का टफ डिसिजन ही रहा.
पहले AFCON फाइनल, अब FIFA वर्ल्ड कप! सेनेगल के साथ ही ऐसा क्यों होता है?
FIFA वर्ल्ड कप 2026 : राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में बेल्जियम ने 2-0 से पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी की. एक्स्ट्रा टाइम में उन्होंने ये मुकाबला 3-2 से जीत लिया. हालांकि, अंतिम समय में रेफरी के एक फैसले को लेकर विवाद शुरू हो गया है.


दरअसल, सेनेगल की टीम सिएटल में बेल्जियम के खिलाफ राउंउ ऑफ 32 के मुकाबले में 3-2 से हार गई. मैच में वो 85 मिनट तक 2-0 से आगे चल रहे थे. लेकिन, अचानक कंसन्ट्रेशन ऐसा भंग हुआ, 3 मिनट के भीतर दो गोल खा बैठे. पहले रोमेलू लुकाकु ने 86वें मिनट में गोलकर मैच का मोमेंटम शिफ्ट किया. फिर 89वें मिनट में कप्तान यूरी टीलेमन्स ने इक्वालाइजर मार दिया. यहां तक सब ठीक था. मैच स्टॉपेज टाइम में भी 2-2 से बराबरी पर रहा.
अब मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में पहुंच गया. इससे पहले, पिछले 3 वर्ल्ड कप में 12 नॉकआउट मुकाबले एक्स्ट्रा टाइम में पहुंचे थे. इनमें से 11 बार मैच पेनल्टी शूटआउट में ही गया. यहां भी ऐसा ही लग रहा था कि मैच शूटआउट में ही जाने वाला है. लेकिन, 117वें मिनट में पेनल्टी एरिया में कुछ ऐसा हुआ, जिस पर सेनेगल के प्लेयर्स भरोसा नहीं कर पा रहे थे. दरअसल, पेनल्टी एरिया में बेल्जियम के कप्तान टीलेमन्स पर सेनेगल के डिफेंडर लमीन कमारा ने टैकल अटैंप्ट किया. वो वहीं गिर गए. लेकिन, असली विवाद इसके बाद शुरू हुआ. बेल्जियम पेनल्टी मांग रही थी. वहीं, सेनेगल इसका विरोध कर रही थी.
7 मिनट ये फैसला करने में लग गया कि ये पेनल्टी है या नहीं. अंत में जो फैसला आया, ऐसा लगा समय ने 6 महीने पहले करवट ले ली है. सेनेगल के खिलाफ एक्स्ट्रा टाइम में रेफरी सैद मार्टिनेज ने पेनल्टी किक दे दी. टीलेमन्स ने खुद स्पॉट किक ली. गेंद को राइट कॉर्नर में प्लेस किया और अपनी टीम को 120+5वें मिनट में लीड दिला दी.
VAR में देखने के बावजूद अगर किसी फैसले को लेने में 7 मिनट लग जाएं. ये बताने के लिए काफी होता है कि कॉल लेना आसान नहीं रहा होगा. लेकिन, इसके बावजूद रेफरी सैद मार्टिनेज ने फैसला सेनेगल के खिलाफ ही लिया. इसे लेकर तब से ही बहस चल रही है कि क्या सच में पेनल्टी किक बनती थी? कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिल्कुल भी नहीं. इसका मतलब सेनेगल के साथ फिर गलत हुआ?
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ये सवाल इसलिए भी क्योंकि इस मुकाबले से ठीक पहले इंग्लैंड और कांगो के बीच भी एक मुकाबला खेला गया. यहां इंग्लिश टीम पिछड़ रही थी. लेकिन, 43वें मिनट में उन पर हुए पेनल्टी एरिया में गोलकीपर के सेव अटैंप्ट को फाउल नहीं करार दिया गया. इसे लेकर भी बहस हुई. लेकिन, खुद इंग्लैंड के पूर्व फुटबॉलर वायन रूनी ने इस बहस को खारिज कर दिया. इधर, सेनेगल वाले मैच को लेकर पूर्व फुटबॉलर्स एकमत थे. सबका यही मानना था कि टच बहुत सॉफ्ट था. रेफरी को पेनल्टी नहीं देना चाहिए था. वो टीलमेन्स के चंगुल में फंस गए.
स्वीडन के पूर्व फुटबॉलर ज़्लाटन इब्राहिमोविच ने तो ये तक कह दिया कि अफ्रीकी देश को लूट लिया गया. कनेडियन कॉमेंटेटर क्रेग फॉरेस्ट का भी यही मानना था. उनके मुताबिक, सेनेगल के खिलाफ ये फैसला काफी कठोर था. उन्होंने अफ्रीका कप ऑफ नेशंस का भी उदाहरण दिया. वहां भी सेनेगल के खिलाफ कठोर फैसले दिए गए थे. ऐसा ही यहां भी किया गया. इब्राहिमोविच ने भी सवाल उठाया कि हर बार ऐसा फैसला सेनेगल के खिलाफ ही क्यों लिया जाता है?
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अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (AFCON) में क्या हुआ था?दरअसल, 18 जनवरी को अफ्रीका कप ऑफ नेशंस में भी सेनेगल के साथ फाइनल में ऐसा ही हुआ था. मोरक्को और सेनेगल के बीच ये मुकाबला स्टॉपेज टाइम के 8वें मिनट तक 0-0 से बराबरी पर था. तभी रेफरी जीन जैक्स न्डाला ने मोरक्को को पेनल्टी दे दी थी. ब्राहिम डियाज पर अल हद्जी मलीक के चैलेंज के लिए रेफरी ने ये फैसला किया था.
इससे ठीक पहले, न्डाला ने सेनेगल के एक गोल को भी खारिज कर दिया था. लेकिन, जब रेफरी ने पेनल्टी दी तो सेनेगल के कोच पेप थिऑव ने टीम को विरोध में बाहर आने के लिए कह दिया था. सब बाहर चले गए. सिर्फ सादियो माने ग्राउंड पर रहे. इसके कारण 17 मिनट तक मैच रुका रहा.
लेकिन, माने की रिक्वेस्ट पर टीम ग्राउंड पर लौटी. डियाज ने पेनल्टी ली लेकिन सेनेगल के गोलकीपर एडुअर्ड मेंडी ने इसे बचा लिया. मैच एक्सट्रा टाइम में गया और पेप गुइए के गोल से सेनेगल 1-0 से अफ्रीकी चैंपियन बन गई. लेकिन, दो महीने बाद अफ्रीकन फेडरेशन CAF ने इस मैच में सेनेगल के बाहर जाने को उनका मैदान छोड़ना माना.
नतीजा, मोरक्को के पक्ष में 3-0 से जीत दर्ज हो गई. चैंपियन बनकर भी सेनेगल ऑफिशियली अफ्रीकी रनर्स अप ही रह गई. उन्होंने इसके खिलाफ खेल पंचाट में अर्जी भी दी है. लेकिन, इसका फैसला अब तक नहीं आया है.
ऐसे में जब बेल्जियम के खिलाफ इतिहास दोहराया गया, सेनेगल के प्लेयर्स भरोसा नहीं कर पा रहे थे. उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि महज 6 महीने के भीतर वो दूसरी बार कैसे रेफरी के कठोर फैसलों का शिकार हो सकते हैं.
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