मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक महिला के 'लड्डू गोपाल' पांच महीने से लापता हैं. वो उन्हें ढूंढने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. व्यक्तिगत आस्था का मामला इतना बढ़ गया है कि पुलिस ने मूर्ति की तलाश के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कर दिया है.
महिला के लापता लड्डू गोपाल को ढूंढने के लिए पुलिस ने SIT बना दी, 3 थानों की पुलिस शामिल
Gwalior missing Laddu Gopal: ग्वालियर में एक महिला अपने लड्डू गोपाल को ढूंढ़ने के लिए पांच महीनों से लगातार कोशिश कर रही हैं. मामला इतना आगे बढ़ गया कि अब पुलिस ने उनकी तलाश के लिए एसआईटी यानी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम तक बना दी है.


महिला का नाम है विजया शर्मा. वो अलकापुरी इलाके की रहने वाली हैं. 29 जनवरी को अपनी बहन के साथ कुछ खरीदारी करने बाजार गई थीं. साथ में लड्डू गोपाल भी थे. कई भक्तजन अपने आराध्य की मूर्ति साथ लेकर जाते हैं. अकेला घर पर नहीं छोड़ते. विजया भी ऐसी ही भक्त हैं. जहां जाती हैं लड्डू गोपाल को साथ लेकर ही जाती हैं.
बाजार में रह गए लड्डू गोपाललेकिन इस बार विजया तो घर लौटीं, लेकिन लड्डू गोपाल कहीं छूट गए. महिला का कहना है कि बाजार में खरीदारी के दौरान किसी ठेले पर. जब उन्हें ये अहसास हुआ, तो वो दोबारा बाजार गईं. मगर उन्हें मूर्ति कहीं मिली नहीं. कई दिनों तक उनकी तलाश करती रहीं. इधर-उधर ढूंढती रहीं. लेकिन जब कुछ नहीं हुआ, तो मदद के लिए पुलिस के पास गईं. बताया कि मूर्ति को थोड़ी चोट लगी है.
इंडिया टुडे से जुड़े हेमंत शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस थाने में विजया ने एक और गुजारिश की. वो ये कि मामले में औपचारिक FIR दर्ज ना की जाए. अगर कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई, तो उनके भगवान को पुलिस थाने या अदालत में पेश करना पड़ सकता है.
विजया शर्मा का कहना है कि वो अपने भगवान को ऐसी परेशानी में नहीं डालना चाहतीं. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि किसी तरह उनके लड्डू गोपाल उन्हें वापस मिल जाएं. महिला ने ये भी ऐलान किया कि जो भी उनके लड्डू गोपाल को ढूंढ़कर वापस लाएगा, उसे 5 हजार रुपये कैश बतौर इनाम दिया जाएगा. उनका कहना है कि उन्हें पैसे की चिंता नहीं है, बस उनके लड्डू गोपाल वापस मिल जाएं.
मां ने 30 साल पहले दिए थे लड्डू गोपालविजया शर्मा बताती हैं कि इस मूर्ति से उनका इमोशनल अटैचमेंट काफी ज्यादा था. क्योंकि करीब 30 साल पहले उनकी मां ने उन्हें ये लड्डू गोपाल दिए थे. और पांच साल पहले उनकी मां का निधन हो गया. मां के जाने के बाद यही मूर्ति उनकी सबसे कीमती याद बन गई. इसलिए उनके लिए ये एक भगवान की मूर्ति के साथ साथ उनकी मां की आखिरी निशानी भी है. यही वजह है कि पांच महीने बीत जाने के बाद भी उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है.
शुरुआत में स्थानीय पुलिस भी इस मामले में जानकारी जुटाती रही. लेकिन इतने लंबे समय तक मूर्ति नहीं मिलने के बाद मामला ग्वालियर के पुलिस इन्स्पेक्टर जनरल यानी आईजी अरविंद सक्सेना तक पहुंचा.
आईजी ने इस मामले को ‘सेंसिटिव’ मानते हुए एक SIT बनाने का फैसला किया. इस टीम में तीन अलग-अलग थानों की पुलिस को शामिल किया गया है. अब ये टीम बाजार के आसपास लगे सीसीटीवी खंगाल रही है. लोगों से पूछताछ कर रही है.
ये भी पढ़ें: UGC-NET का पेपर देखकर NTA पर भड़के छात्र, गलतियों की झड़ी लगा दी
आमतौर पर एसआईटी का गठन हत्या, बड़े अपराध, आर्थिक घोटाले या बेहद ट्विस्टेड मामलों में किया जाता है. लेकिन इस मामले में पुलिस का कहना है कि यहां महिला की गहरी धार्मिक आस्था और भावनाओं का सवाल जुड़ा हुआ है. इसी वजह से पुलिस इसे गंभीरता से ले रही है.
वीडियो: 12 हजार करोड़ के दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की ऐसी हालत, सियासत शुरू

















