FIFA World Cup 2026 का पहला सेमीफाइनल 15 जुलाई को खेला जाएगा. यह ब्लॉकबस्टर मुकाबला फ्रांस और स्पेन के बीच होगा. लेकिन, इस सेमीफाइनल मुकाबले से पहले FIFA ने बड़ा बदलाव किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, गवर्निंग बॉडी ने वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले पहले गेंद बदल दी है. अब FIFA World Cup 2026 के दोनों सेमीफाइनल्स और फाइनल, त्रिओंदा फाइनल बॉल (Trionda Final Ball) से खेले जाएंगे. इस नई Final Trionda बॉल को भी Adidas ने प्रोड्यूस किया है. पहले उस बॉल की बात कर लेते हैं, जो अब तक इस वर्ल्ड कप में यूज की गई.
FIFA वर्ल्ड कप सेमीफानइल से पहले बदली गई ऑफिशियल बॉल, पुराने बॉल से कैसे है अलग?
FIFA ने वर्ल्ड कप सेमीफाइनल और फाइनल में गेंद में गेंद बदल दी है. सेमीफाइनल और फाइनल में अब त्रिओंदा फाइनल बॉल (Trionda Final Ball) का इस्तेमाल किया जाएगा. FIFA World Cup 2026 का पहला सेमीफाइनल 15 जुलाई को फ्रांस और स्पेन के बीच होगा.


त्रिओंदा दो शब्दों से मिलकर बना है. Tri का मतलब होता है तीन. FIFA वर्ल्ड कप 2026 को तीन देश मिलकर होस्ट कर रहे हैं. US, कनाडा और मैक्सिको. ओंदा (Onda) का मतलब होता है Wave यानी लहर. इस तरह त्रिओंदा (Trionda) का स्पैनिश में अर्थ हुआ तीन लहरें.
गेंद की डिजाइन में हर को-होस्ट नेशन का नेशनल कलर शामिल है. त्रिओंदा पर ब्लू कलर US के लिए है. गेंद पर रेड कलर का यूज कनाडा के लिए है. वहीं, बॉल पर ग्रीन कलर मैक्सिको को रिप्रजेंट करता है. इसके अलावा, त्रिओंदा पर हर देश को दिखाने वाला ऑइकॉनिक सिंबल भी है. कनाडा के लिए मेपल लीफ. मेक्सिको के लिए चील और यूएस के लिए स्टार है. इस बॉल का यूज क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में भी किया गया था. लेकिन, इस बॉल को लेकर कई सवाल भी उठे.
द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड के गोलकीपर जॉर्डन पिकफर्ड को त्रिओंदा से काफी परेशानी हो रही है. नॉर्वे के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में उन्होंने एंड्रियास शेल्ड्रप (Andreas Schjelderup) के हवा में गए शॉट का उन्होंने गलत अनुमान लगाया था. कुछ ऐसा ही DR कांगो के खिलाफ मैच में हुआ था. तब एक शॉट उनकी उंगलियों से फिसलकर गोल पोस्ट में चला गया था.
FIFA वर्ल्ड कप शुरू होने के बाद से, कई गोलकीपर और एक्सपर्ट ने Trionda बॉल के हवा में रहते, और उसके मूवमेंट को लेकर समस्या बताई है. इस त्रिओंदा की तुलना, 2010 के वर्ल्ड कप में यूज की गई जबुलानी (Jabulani) बॉल से की जा रही है.
इंग्लैंड के पूर्व गोलकीपर पॉल रॉबिन्सन और जो हार्ट ने त्रिओंदा पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि लंबी दूरी के शॉट पर गोलकीपर अक्सर गलत टाइमिंग कर रहे हैं. इन शॉट को वो आसानी से बचा लेते थे. टूर्नामेंट में गलत टाइमिंग के चलते पिकफर्ड, एडुअर्ड मेंडी और सेने लैमेंस जैसे गोलकीपर्स ने गोल खाए हैं. इससे उनकी काफी आलोचना हुई है.
जो हार्ट के मुताबिक,
मुझे सच में लगता है कि गेंद गोलकीपर्स के पास बहुत तेजी से आ रही है. जितना वे सोचते हैं, गेंद कहीं उससे पहले उनके पास आ जाती है.
रॉबिन्सन ने कहा,
5 वर्ल्ड कप से बदली जा रही गेंदएक दो मौकों पर इस गेंद ने फुटबॉल जैसा व्यवहार नहीं किया. जैसे कि हम उम्मीद करते हैं. यह कुछ ऐसा है जिस पर नजर रखने की जरूरत है.
वैसे, FIFA ने यह बदलाव टूर्नामेंट की ट्रेडिशन के अनुसार किया है. पिछले 5 वर्ल्ड कप से गेंद बदली जा रही है. साल 2022 में कतर में हुए वर्ल्ड कप में ग्रुप स्टेज के मैचों में अल रिहला (Al Rihla) गेंद का इस्तेमाल किया गया था. लेकिन, सेमीफाइनल और फाइनल में बरगंडी गोल्ड अल हिल्म ( Al Hilm) बॉल यूज की गई थी.
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FIFA World cup 2026 में त्रिओंदा फाइनल बॉल की घोषणा 6 जुलाई को की गई. तब FIFA चीफ जियानी जियानी इन्फेंटिनो ने कहा था,
FIFA वर्ल्ड कप के आखिरी चार मैचों के लिए Trionda Final बॉल आ चुकी है. आइकॉनिक Trionda बॉल इस वर्ल्ड कप में हर बार जब गोल पोस्ट में गई है, तब उसने बहुत खुशी दी है.
सेमीफाइनल और फाइनल में यूज होने वाली फाइनल त्रिओंदा बॉल का कलर अलग है. इसका कलर गोल्ड व्हाइट और ब्लैक है. बॉल पर होस्ट नेशन का कलर नहीं है.
त्रिओंदा वाली नई टेक्नोलॉजी इस बॉल में भीत्रिओंदा में अपग्रेडेड कनेक्टेड बॉल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. इसमें 500 Hz की सेंसर चिप लगी है. एडिडास का बनाया यह सेंसर हर सेकेंड में 500 बार डेटा कैप्चर करता है. इसकी वजह से कॉन्टैक्ट का सही पॉइंट, बॉल की स्पीड, स्पिन रेट ट्रैजेक्टरी और मूवमेंट का डायरेक्शन जैसी जरूरी जानकारी इसमें रिकॉर्ड हो जाती है. माने प्लेयर बॉल को जैसे ही टच करेगा यह बता देगा. 14 ग्राम का यह सेंसर बॉल के बाहरी पैनल में लगा है.
FIFA World Cup में यूज होने वाली ऑफिशियल त्रिओंदा बॉल को हर मैच से पहले चार्ज करना होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, एक बार चार्ज करने पर बैटरी 6 घंटे तक चलती है. इससे वार्म-अप से लेकर मैच का टाइम आसानी से कवर हो जाता है.
त्रिओंदा के अंदर की सेंसर टेक्नोलॉजी ग्राउंड पर लगे एडवांस्ड हाई-स्पीड कैमरा सिस्टम के साथ काम करेगी. यह बेहतर सिस्टम हर प्लेयर और बॉल को हर सेकंड लगभग 50 बार ट्रैक करता है. इस टेक्नोलॉजी से वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) को तेजी से और ज्यादा सटीक फैसले लेने में हेल्प मिलती है.
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