सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. समय पर ये जुर्माना उनके शो में विकलांगों पर विवादित कॉमेंट करने के मामले में लगाया गया है. इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने की.
समय रैना के लिए सुप्रीम कोर्ट बोला, 'हम लगा अच्छे घर का लड़का है, लेकिन...'
मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना को सुप्रीम कोर्ट ने जमकर फटकार लगाई है. इसके साथ ही कोर्ट ने विकलांगों का मजाक उड़ाने के आरोप में समय रैना पर 3 लाख का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने कहा कि समय रैना ने उनको गुमराह किया है और उनके आदेशों का उल्लंघन किया है.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, समय रैना के अलावा यूट्यूबर रणवीर अलाहाबादिया, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर पर भी 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. कोर्ट ने कहा,
हमें लगता है कि समय रैना ने कोर्ट को गुमराह किया और हमारे आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया. हम उन पर जुर्माना लगाते हैं, जिसे 2 हफ्ते में जमा करना होगा.
सुप्रीम कोर्ट क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई कर रहा था. याचिका में रैना के शो पर ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ के इलाज के खर्च पर असंवेदनशील कॉमेंट करने और विकलांगों का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया गया है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना को उनके शो में किसी विकलांग को बुलाने का निर्देश दिया था. फाउंडेशन की वकील अपराजिता सिंह ने कहा,
रैना ने अपने किसी भी शो में शामिल होने के लिए उनसे या किसी दूसरे विकलांग व्यक्ति से संपर्क नहीं किया.
सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और उनके साथियों पर जुर्माना लगाते हुए कहा,
एक कलाकार के तौर पर आप सार्वजनिक जीवन में होते हैं. यहां आप जितना ज्यादा दूसरों का सम्मान करते हैं, उतना ही आपका इन्वेस्टमेंट होता है. हमने लंबे समय तक इन्हें आजादी दी. हमें लगा कि ये अच्छे घर के लड़के हैं, सुधार लाएंगे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. हम इन पर जुर्माना लगाते हैं, अगर इसे नहीं भरा तो बढ़ाकर 30 लाख कर देंगे.
कोर्ट ने सभी पैनलिस्ट को ये चेतावनी भी दी कि अगर आप अपने तौर तरीकों को सुधारना या समाज के सदस्यों की भावनाओं का सम्मान करना नहीं जानते हैं तो आपको इसके नतीजे भुगतने होंगे.
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‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ क्या है?
‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ एक गंभीर और दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है. यह नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों को टारगेट करती है. इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी (spinal cord) में मौजूद नसें, जिनको मोटर न्यूरॉन्स (Motor Neurons) कहा जाता है, धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं. जब ये नसें काम करना बंद कर देती हैं तो दिमाग से मांसपेशियों तक सिग्नल्स नहीं पहुंच पाते. इसके चलते मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और सिकुड़ने लगती हैं.
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