-पत्थर-
तुम अपने साथ लिए फिरते हो हज़ारों वर्षों का इतिहास तुम्हारी झुर्रियों में दफ़न हैं सैकड़ों कथाएँ लेकिन इन दिनों मेरी मेज़ पर अपनी लम्बी यात्रा के बीच कुछ समय के लिए विश्राम करते हुए तुम कितने शान्त लगते हो कभी-कभी मुझे महसूस होता है तुम्हें हल्के से टकोरूं तो तुमसे संगीत का एक सोता फूट निकलेगा
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