सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) और प्रवेश वर्मा (Parvesh Verma) के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी. यह मामला 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से जुड़ा हुआ है. कोर्ट ने कहा कि इन भाषणों से कोई संज्ञेय अपराध (Cognisable Offence) नहीं बनता है.
'देश के गद्दारों को, गोली मारो... ', अनुराग ठाकुर के बयान पर SC ने कहा किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बोला
बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) और प्रवेश वर्मा (Parvesh Verma) के बयानों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी. Supreme Court ने कहा कि ये भाषण भले ही विवादित थे, लेकिन किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं थे. इसलिए इन भाषणों से कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है.


यह याचिका माकपा (CPI-M) की नेता वृंदा करात ने दायर की थी. इससे पहले, ट्रायल कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने भी FIR दर्ज करने वाली मांग को खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि बयान किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं थे और न ही उन्होंने हिंसा भड़काने का काम किया. इसके बाद वृंदा करात ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, 29 अप्रैल को जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि भाषणों के दौरान कही गई बातें, जैसे ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को’ कॉग्निजेबल अपराध (वह अपराध जिसमें पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है) नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि ये भाषण भले ही विवादित थे, लेकिन किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं थे.
कोर्ट ने कहा कि भाषण से हिंसा भड़काने या सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाने का ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता, जिसके आधार पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सके.
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क्या है मामला?यह मामला जनवरी 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान दिए गए भाषणों से जुड़ा है. तब सीएए के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे. शिकायतकर्ता वृंदा करात के मुताबिक, पहली घटना 27 जनवरी 2020 को हुई थी, जब सांसद अनुराग ठाकुर (जो उस समय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री थे) ने रिठाला में एक चुनावी रैली को संबोधित किया था. रैली के दौरान उन्होंने एक नारा लगवाया,
“देश के गद्दारों को… गोली मारों *लों को.”
दूसरी घटना 28 जनवरी 2020 को दिए गए प्रवेश वर्मा के बयान से जुड़ी हुई है. प्रवेश उस समय पश्चिमी दिल्ली से सांसद थे और अब दिल्ली सरकार में मंत्री हैं. कैंपेन के बयानों और इंटरव्यू में उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को नहीं रोका गया, तो वे आखिरकार “घरों में घुसकर लोगों का रेप और हत्या करेंगे.” करात ने आरोप लगाया कि अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के बयान भड़काऊ थे और सांप्रदायिक दुश्मनी भड़काने वाले थे.
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