आज नए साल के पहले दिन एक कविता रोज़ में भगवत रावत की कविता
इस वर्ष भी रहें आप सदा की तरह निर्लिप्त-निर्विकार
नए साल में पढ़िए 'नया साल'.
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फोटो - thelallantop
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'नया साल'
कितना अच्छा रहा कि पिछले पूरे एक वर्ष में आपको कभी किसी बात पर क्रोध नहीं आया कितना अच्छा हुआ कि किसी भी घटना से आया नहीं आपके रक्त में रत्ती भर उबाल कितना अच्छा रहा कि आप समयानुकूल बुरी से बुरी खबर पर भी उत्तेजित नहीं हुए कितना अच्छा रहा कि इस वर्ष भी आपके मन में उठा नहीं कोई उल्टा-सीधा सवाल कितना अच्छा रहा कि सरकारी खर्चे पर आप भी हो आए विदेश वेतन के अलावा भी निरंतर बढ़ी आपकी आय पिछले वर्ष की ही तरह आप फले-फूलें इस बरस भी इसी तरह आपको मुबारक हो यह नया साल रहें सदा आप झंझटों, झगड़ों-टंटों से दूर दूर से ही भांपते रहें करीब आने वाले की चाल समझदारी से कायदे-कानूनों के भीतर सब काम करें आने नहीं दें अपने ऊपर आंच, उठने नहीं दें कोई बवाल सरकारें आएं-जाएं, बवंडर उठें, आते रहें भूचाल आप खड़े रहें वहीं धैर्य से अविचलित इस वर्ष भी रहें आप सदा की तरह निर्लिप्त-निर्विकार पिछले वर्ष से भी अधिक मंगलमय हो आपका यह वर्ष ***Advertisement










