बहुत से लोगों को लगा कि 5-6-7 पर बैटिंग करके धोनी अपनी काबिलियत के साथ इंसाफ नहीं कर रहे हैं. इतने अच्छे बैट्समैन का नंबर 6 पर आकर खेलने का क्या तुक जब सिर्फ 30-40 गेंदे बाकी हों. कुछ लोगों को तो ये भी लगता है कि धोनी वर्ल्ड कप 2015 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में कोहली के आउट होते ही आ जाते तो वो मैच भारत जीत सकता था. धोनी ने नंबर 6 आकर उस मैच में 65 गेंदों में 65 रन बनाए. 376 रन का पीछा करते हुए तब तक काफी देर हो चुकी थी. धोनी उस दिन वही कर सकते थे जो उन्होंने 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में किया. अगर किसी एक बैट्समैन के ऊपर नीचे आने से सबसे ज्यादा असर पड़ता है तो वो धोनी हैं.

बांग्लादेश 3 गेंद 2 रन और फिर धोनी..
आंकड़े झूठ बोल लेते हैं पर क्या खोया-क्या पाया इसके टोटल-जमा आंकड़े सच ही बोलते हैं. धोनी के उस दोस्त और लोगों की सलाह गलत नहीं थी. धोनी ने नंबर 4 पर आकर 24 मैच खेले हैं जिनमें 17 में भारत को जीत मिली है और इनमें 12 बार धोनी ने 50 से ज्यादा रन बनाए हैं. तो फिर धोनी इतने दिनों तक लॉअर ऑर्डर में बैटिंग क्यों करते थे. 244 में 143 पारियों में धोनी ने 5-6-7-8 पर बैटिंग की है. इसका पहला कारण तो ये था कि कप्तान सबको मौका देना चाहता था. नए-नए खिलाड़ियों को आते ही फिनिशिंग का जोखिम भरा काम देकर, 'दे घूमा के' करने वाली पॉजीशन में नहीं डालना चाहता था. दूसरा ये कि कीपिंग का काम इतना आसान नहीं होता. धोनी शुरूआत में जैसी कीपिंग करते थे उससे कई गुणा बेहतर कीपर हैं आज.
तो फिर धोनी के लिए सबसे बेहतर पोजिशन कौनसी थी. ओपनिंग में 49 की औसत है. लेकिन सबसे शानदार औसत है नंबर तीन पर. उसी नंबर 3 पर जहां धोनी ने पाकिस्तान के खिलाफ 148 रन बनाकर पहली बार बताया था कि हम कौन हैं. नंबर 3 पर धोनी 83 की औसत से खेलते हैं. यहां से विराट कोहली का हटना मुमकिन नहीं है. तो बचा नंबर 4. यहां धोनी की औसत है 62 रन प्रति पारी. अपने बाकी कैरियर में धोनी इसी नंबर पर खेलेंगे. बाकी कैरियर कितना लंबा होगा. इसका जवाब दो हिस्सों में है. पहला धोनी कितने फिट रहते हैं. फिटनेस की बात ऐसी है कि धोनी सबसे फिट खिलाड़ियों में से एक हैं. सबसे तेज़ रनर, सबसे तेज़ कीपर. फिलहाल 35 साल के हैं और 2019 का वर्ल्ड कप अब ज्यादा दूर नहीं है बस कोई अढ़ाई साल जमा कुछ हफ्ते बाकी हैं. धोनी कब तक खेलेंगे इसका सबसे बड़ा इशारा मिलेगा 2017 में. धोनी 2017 चैंपियंस ट्रॉफी में कैसा खेलते हैं, इससे तय होगा कि वो कितना लंबा खेलेंगे.
अगर यहां तक बात ठीक निकल आई तो तैयार हो जाइए धोनी को वर्ल्ड कप 2019 में देखने के लिए. शायद धोनी जिस तूफान के साथ आए थे उसी तूफान के साथ क्रिकेट से विदा हों. वैसे धोनी की बैटिंग के बारे में लाख बातें कह लीजिए पर क्या आप बता सकते हैं वो कब आउट फॉर्म गए थे. शायद कभी नहीं. वर्ल्ड 2011 में रंग में नहीं थे लेकिन फिर फाइनल में ऐसा तीर मारा की सारे गुनाह माफ. इन 10-12 सालों में एक भी ऐसा शॉट नहीं है जो धोनी ने पहले लगाया हो और अब न लगा पा रहे हों.

आज भी धोनी में वो बात और फिटनेस है जो 5-6 साल पहले थी. अपने नए और निश्चित बैटिंग ऑर्डर में धोनी के पुराने शॉट तो दिखेंगे ही बल्कि कुछ लंबी पारियां भी दिखेंगी. आप कह सकते हैं कि धोनी अफरीदी का 321 छक्कों का रिकॉर्ड तो तोड़ने से रहे. पर अफरीदी ने छक्के मारने के अलावा क्या किया है. जबकि धोनी न केवल अपनी पारी बल्कि पूरी बैटिंग को पेस करते हैं. तो इस बात के पूरे-पूरे चांस हैं कि कोई एक दिन फिर ऐसा आए कि धोनी फिर से 183 या 148 बना दें. धोनी कितनी ही बार नॉट आउट गए हैं और उन नाबाद पारियों में कितनी ही ऐसी थीं कि ये लगता, कुछ गेंदे और होती तो धोनी इतने रन और बना देते. वो अधूरी-सी पारियां अब पूरी होने जा रही हैं. धोनी के शतकों और मैन-ऑफ-द-मैच की संख्या बढ़ने जा रही है. माहिया जब ऊपर आता है तो बहुत मारता है... ये बुझते हुए चिराग़ की आखिरी लौ नहीं बल्कि बहुत दिनों से इंतज़ार कर रही ख्वाहिश है और उससे भी बढ़कर 2017 चैंपियंस ट्रॉफी की तैयारी है.











