साल 2024 में लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर पेरिस ओलंपिक की तैयारी कर रहे थे. वह ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुके थे और उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वह पेरिस में इतिहास रच सकते हैं. लेकिन ट्रेनिंग के दौरान ही उनके घुटने में गंभीर चोट लग गई. यह खबर भारतीय फैंस के साथ-साथ उनके साथियों के लिए भी बेहद हैरान करने वाली थी. हर किसी ने इस चोट पर अफसोस जताया और मुरली श्रीशंकर को भरोसा दिलाया कि वह वापसी कर सकते हैं.
इंजरी ने किया ओलंपिक से बाहर तो CWG में किया कमाल, वापसी हो तो मुरली श्रीशंकर जैसी
कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले मुरली श्रीशंकर शानदार फॉर्म में थे. वह लगातार 8 मीटर से अधिक की जंप लगा रहे थे. लॉन्ग जंप में 8 मीटर के मार्क को स्टैंडर्ड मार्क माना जाता है. क्वालिफाइंग राउंड में भी उन्होंने अपने पहले ही अटेंप्ट में 8.01 मीटर की जंप लगाकर फाइनल के लिए ऑटोमेटिक क्वालिफिकेशन कर लिया था.

हालांकि, हर कोई यह भी जानता था कि इस तरह की गंभीर इंजरी के बाद वापसी करना बेहद मुश्किल होता है. लेकिन चैंपियन खिलाड़ी वही होता है जो मुश्किल कामों को आसान बना दे और दुनिया के सामने मिसाल पेश करे कि इच्छा शक्ति से बड़ी कोई ताकत नहीं होती. अगर इंसान ठान ले, तो वह वह सब हासिल कर सकता है जिसे दुनिया नामुमकिन मानती है. मुरली श्रीशंकर ने भी यही कर दिखाया. उन्होंने इंजरी से शानदार वापसी की और वापसी के बाद अपने पहले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीत लिया. इस इवेंट का गोल्ड मेडल जमैका के टीजे गेल ने 8.15 मीटर की जंप लगाकर जीता. केवल 0.14 मीटर के कारण वह गोल्ड नहीं जीत सके. इस प्रतियोगिता में भारत के एक और एथलीट लोकेश सत्यनाथन भी शामिल थे. हालांकि, वह 7.97 मीटर की जंप ही लगा सके और पांचवें स्थान पर रहे.
श्रीशंकर को मिला पिता का साथकॉमनवेल्थ गेम्स से पहले मुरली श्रीशंकर शानदार फॉर्म में थे. वह लगातार 8 मीटर से अधिक की जंप लगा रहे थे. लॉन्ग जंप में 8 मीटर के मार्क को स्टैंडर्ड मार्क माना जाता है. क्वालिफाइंग राउंड में भी उन्होंने अपने पहले ही अटेंप्ट में 8.01 मीटर की जंप लगाकर फाइनल के लिए ऑटोमेटिक क्वालिफिकेशन कर लिया था.
फाइनल में भी मुरली ने अच्छी शुरुआत की. उनके पिता कोच की भूमिका निभा रहे थे और लगातार मुरली को गाइड कर रहे थे. अपने पहले अटेंप्ट में उन्होंने 8.03 मीटर की जंप लगाई. इसके बाद दूसरे अटेंप्ट में उन्होंने और सुधार करते हुए 8.09 मीटर का जंप किया. यही जंप उन्हें सिल्वर मेडल दिलाने में निर्णायक साबित हुआ. इसके बाद उनका तीसरा और चौथा अटेंप्ट फाउल रहा, जबकि आखिरी दो अटेंप्टों में वह 8 मीटर का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके.
इंजरी के बाद की कमाल की वापसीअगर मुरली श्रीशंकर की बात करें, तो घुटने की गंभीर इंजरी के बाद उनके लिए वापसी की राह बिल्कुल आसान नहीं थी. सर्जरी के बाद जब रिकवरी शुरू हुई, तो उन्होंने जल्दबाजी में वापसी करने की बजाय खुद को पहले से ज्यादा मजबूत बनाने पर ध्यान दिया. उन्होंने घुटने की ताकत और स्थिरता दोबारा विकसित की, धीरे-धीरे अपने रन-अप की रफ्तार बढ़ाई और फिर दोबारा लॉन्ग जंप की ट्रेनिंग शुरू की. उन्होंने पोलैंड में काफी समय बिताया, जहां उन्होंने विशेष ट्रेनिंग की और अपने वर्कलोड को सावधानी से मैनेज किया ताकि दोबारा कोई चोट न लगे. मुरली का मानना है कि चोट के बाद उन्होंने जंप के डिस्टेंस से ज्यादा अपने शरीर को पूरी तरह फिट और स्वस्थ रखने पर ध्यान देना शुरू किया.
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कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले उनके प्रदर्शन पर नजर डालें, तो वह लगातार 8 मीटर से अधिक की जंप लगा रहे थे. इंडियन एथलेटिक्स सीरीज, बेंगलुरु में उन्होंने 8.15 मीटर का जंप किया. इसके बाद चेन्नई में आयोजित एथलेटिक्स सीरीज में उन्होंने 8.00 मीटर की जंप लगाई. साउथ अफ्रीका के एक्सपोजर टूर पर उन्होंने 8.05 मीटर का जंप किया. वहीं, उनका सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नेशनल इंटर-स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में आया, जहां उन्होंने 8.38 मीटर की जंप लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया.
इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था. फाइनल के दौरान भी वह कुछ समय तक पहले स्थान पर बने रहे. लेकिन आखिरी अटेंप्टों में वह 8.15 मीटर की दूरी को पार नहीं कर सके और अंत में सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा.
मुरली श्रीशंकर का लक्ष्य अपने 2022 के सिल्वर मेडल का रंग बदलकर गोल्ड जीतना था. हालांकि, इस बार वह ऐसा नहीं कर सके. लेकिन जिस तरह उन्होंने एक गंभीर इंजरी के बाद वापसी करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था.
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