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गुलवीर ने ठंड-बारिश को मात देकर रचा इतिहास, इस दौड़ में पहली बार कोई भारतीय जीता सिल्वर

CWG 2026 Gulveer Singh: गुलवीर सिंह की जीत ठीक वैसी ही है जैसी पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में अविनाश साबले की थी. उन्होंने भी 3000 मीटर स्टेपलचेज में केन्या का वर्चस्व खत्म किया था और गुलवीर ने 10000 मीटर में अफ्रीकन खिलाड़ियों का.

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गुलवीर सिंह भारत में तीन इवेंट के नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं. (Photo-PTI)

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  • गुलवीर सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 10000 मीटर पुरुष वर्ग में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता, जो इस इवेंट में भारत का पहला पदक है।
  • बारिश और ठंडी हवाओं की चुनौती के बीच गुलवीर सिंह ने अपनी ट्रेनिंग और रणनीति के आधार पर कठिन परिस्थितियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
  • इस जीत के बाद गुलवीर सिंह 5000 मीटर के इवेंट में भी भाग लेंगे, जिससे भारत की मैराथन प्रतिस्पर्धा में संभावित सुधार जारी रहेगा।

गुलवीर सिंह. यह नाम याद कर लीजिए. यह वह नाम है जिसने ग्लासगो में दुनिया को भारत की ताकत दिखाई. दिखाया कि कैसे भारतीय एथलीट सालों से चलते आ रहे वर्चस्व को तोड़ना जानते हैं, भीड़ से निकलकर पोडियम तक पहुंचना जानते हैं, और जानते हैं कि इतिहास कैसे रचा जाता है. ठंड और बारिश के बीच दौड़ते नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने वह कर दिखाया, जो आज तक कोई पुरुष भारतीय एथलीट नहीं कर सका. गुलवीर सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 10000 मीटर में देश के लिए सिल्वर मेडल जीता. यह भारत का इस इवेंट में पुरुष वर्ग में पहला मेडल है. गुलवीर ने 27:49.78 का समय निकाला.

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बारिश ने बढ़ाई मुश्किल

आमतौर पर ठंडे मौसम को लॉन्ग डिस्टेंस रनर्स के लिए अच्छा माना जाता है. लेकिन ठंडी हवाओं के साथ आई बारिश ने खिलाड़ियों की मुश्किल बढ़ा दी. कई खिलाड़ी ट्रैक पर ग्रिप नहीं पा रहे थे तो कुछ अपने गीले जूतों से परेशान थे. गुलवीर ने अच्छी शुरुआत की और आधी रेस तक दूसरे स्थान पर बने रहे. धीरे-धीरे वह पीछे हो गए. आखिरी 5 मिनट में वह सातवें स्थान पर थे. लेकिन गुलवीर ने आखिरी लैप में जबरदस्त तेजी दिखाते हुए भारत के लिए सिल्वर जीत लिया. यह गुलवीर सिंह का कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला मेडल है.

क्यों खास है यह जीत?

ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने 27 मिनट 48.93 सेकंड का समय निकालकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुलार्की ने 27 मिनट 50.28 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता. 1986 के बाद यह पहला मौका है जब इस इवेंट में केन्या या युगांडा का कोई भी खिलाड़ी पोडियम पर नहीं था. गुलवीर की जीत ठीक वैसी ही है जैसी पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में अविनाश साबले की थी. उन्होंने भी 3000 मीटर स्टेपलचेज में केन्या का वर्चस्व खत्म किया था. जीत के बाद गुलवीर ने कहा,

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मेरे माइंड में यही था कि मुझे बस मेडल लाना था. अच्छा लग रहा है कि मेडल ला पाया. रेस थोड़ी मुश्किल थी क्योंकि बीच में बारिश के कारण गति धीमी और तेज हो रही थी. मुझे कोच ने बस यही कहा था कि मेसी स्पीड अच्छी है तो मुझे बस रेस लीड करने वाले के पीछे रहना है. आखिर में मैंने पूरा जो लगाया और मेडल ला पाया.

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गुलवीर ने माता-पिता को किया याद

किसान परिवार से आने वाले गुलवीर ने सेना में भर्ती होने से पहले कॉमनवेल्थ गेम्स का नाम भी नहीं सुना था. लेकिन सेना की ट्रेनिंग ने उनकी जिंदगी बदल दी. उन्होंने लगभग 5 साल तक अपनी ड्यूटी और ट्रेनिंग का बैलेंस बनाया और इस इवेंट की बारीकियां सीखीं. उन्हें पहली बड़ी जीत मिली साल 2022 में. उन्होंने 2022 फेडरेशन कप में 10 मीटर के इवेंट में ही ब्रॉन्ज मेडल जीता. गुलवीर ने अपनी यह ऐतिहासिक जीत अपने माता-पिता को समर्पित की. उन्होंने कहा,

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बाहर रहता हूं तो घरवालों की बहुत याद आती है. मां की सबसे ज्यादा. मां और पिता जन्मदाता हैं. उनकी वजह से ही हूं जो हूं. यह मेडल उनके लिए और देश के लिए है.

आपको बता दें कि गुलवीर 10000 मीटर के साथ-साथ वह 5000 और 3000 मीटर में भी नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं. गुलवीर का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का सफर अभी खत्म नहीं हुआ है. रविवार, 2 अगस्त को वह 5000 मीटर में एक बार फिर मेडल जीतने उतरेंगे.

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